सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर प्रदर्शन स्थल पर मांगा सरकार से जवाब

दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। अदालत ने पूछा है कि क्या अब जंतर-मंतर बड़े स्तर के विरोध प्रदर्शनों के लिए उपयुक्त स्थान नहीं रह गया है और क्या सुरक्षा व व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को देखते हुए किसी वैकल्पिक जगह की जरूरत है।

जंतर-मंतर प्रदर्शन स्थल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन शामिल थे, इस मामले की सुनवाई कर रही थी। अदालत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से इस मुद्दे पर सरकार से जानकारी लेने को कहा है।

याचिका में कहा गया है कि जंतर-मंतर पर अब बड़ी संख्या में लोगों के आने-जाने की व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन सेवाओं को लेकर परेशानियां बढ़ रही हैं। इसलिए बड़े प्रदर्शनों के लिए किसी दूसरे स्थान को निर्धारित करने की मांग की गई है।

जंतर-मंतर क्यों रहा है विरोध प्रदर्शनों का केंद्र

जंतर-मंतर लंबे समय से दिल्ली में विरोध प्रदर्शन का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां अन्ना हजारे का भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन, 2012 का निर्भया आंदोलन, 2023 में पहलवानों का प्रदर्शन और हाल का छात्र आंदोलन जैसे कई बड़े प्रदर्शन हो चुके हैं।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने 20 जुलाई को हुए ‘संसद चलो’ मार्च का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जरूरी हैं। वकील ने आम आदमी पार्टी नेता अरविंद केजरीवाल द्वारा प्रधानमंत्री आवास तक मार्च की घोषणा का भी उल्लेख किया।

⚖️ जंतर-मंतर मामले की मुख्य बातें

  • सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट ने सरकारों से मांगा जवाब
  • मुद्दा: बड़े प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक जगह की मांग
  • चिंता: भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था
  • पुराना महत्व: कई ऐतिहासिक आंदोलनों का केंद्र
  • जांच: प्रशासनिक व्यवस्था की समीक्षा

सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन को लेकर कही बड़ी बात

इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि प्रशासन को स्थिति संभालने की जानकारी है। अगर व्यवस्था में कोई कमी होती है तो अदालत का रुख किया जा सकता है।

एक अलग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शनकारियों से जुड़े मामलों पर भी स्पष्टीकरण दिया। अदालत ने कहा कि उसके आदेश में इस्तेमाल किया गया “criminal antecedents” शब्द केवल गंभीर और बड़े अपराधों में शामिल लोगों के लिए है। अन्य छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR को राज्य सरकारें कानून के अनुसार वापस ले सकती हैं या बंद कर सकती हैं।

छात्र प्रदर्शन मामलों पर भी आया स्पष्टीकरण

केंद्र सरकार ने भी कहा था कि NEET पेपर लीक मामले को लेकर प्रदर्शन करने वाले उन छात्रों के खिलाफ कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई जाएगी, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।

📢 प्रदर्शन और सुरक्षा से जुड़े सवाल

  • सुरक्षा: बड़े प्रदर्शनों में व्यवस्था बनाए रखना चुनौती
  • प्रबंधन: भीड़ नियंत्रण और आपात सेवाओं पर ध्यान
  • दिशा-निर्देश: भविष्य के प्रदर्शनों के लिए नियमों की जरूरत
  • छात्र मामले: गंभीर अपराधों तक सीमित रहेगा criminal antecedents
  • सरकार का रुख: बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले छात्रों पर कार्रवाई नहीं

Disclaimer: यह जानकारी न्यायालय की सुनवाई और सार्वजनिक रिपोर्टों पर आधारित है।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

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