भारत अगले कुछ वर्षों में आर्थिक विकास की रफ्तार के दम पर अपर मिडिल इनकम देशों की श्रेणी में पहुंच सकता है, लेकिन इसके लिए केवल जीडीपी बढ़ना ही काफी नहीं होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि देश को औपचारिक रोजगार बढ़ाने, उत्पादकता में सुधार लाने और कारोबार के विस्तार पर भी बराबर ध्यान देना होगा। इसी से भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ सकेगा।
भारत अपर मिडिल इनकम देश कैसे बन सकता है
भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी हुई है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि विकसित अर्थव्यवस्था बनने के लिए केवल जीडीपी वृद्धि नहीं बल्कि औपचारिक jobs, उत्पादकता और कारोबार के विस्तार पर भी बराबर ध्यान देना जरूरी होगा।
विश्व बैंक देशों को प्रति व्यक्ति आय के आधार पर चार वर्गों में बांटता है। इनमें लो इनकम, लोअर मिडिल इनकम, अपर मिडिल इनकम और हाई इनकम देश शामिल हैं। हाल ही में जारी नई सूची में वियतनाम, फिलीपींस और श्रीलंका को अपर मिडिल इनकम श्रेणी में शामिल किया गया है, जबकि चीन हाई इनकम देशों की दहलीज पर पहुंच चुका है। भारत अभी भी लोअर मिडिल इनकम श्रेणी में है, लेकिन मौजूदा आर्थिक रफ्तार को देखते हुए आने वाले वर्षों में वह अगली श्रेणी में पहुंच सकता है।
जानकारों का कहना है कि किसी भी देश की आय बढ़ने के साथ उसकी रोजगार व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव आता है। लोग धीरे-धीरे खेती या छोटे पारिवारिक कामकाज से निकलकर फैक्ट्रियों, कंपनियों और दफ्तरों में वेतनभोगी नौकरियों की ओर बढ़ते हैं। इसी बदलाव से उत्पादकता बढ़ती है और अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।
भारत की आर्थिक स्थिति एक नजर में
- वर्तमान श्रेणी: लोअर मिडिल इनकम
- लक्ष्य: अपर मिडिल इनकम और विकसित राष्ट्र
- समयसीमा: वर्ष 2047 का लक्ष्य
- फोकस: औपचारिक jobs और उत्पादकता
- आधार: मजबूत आर्थिक विकास
- जरूरत: बड़े और मध्यम उद्योगों का विस्तार
रोजगार और उद्योगों की भूमिका
आंकड़ों के अनुसार भारत में करीब 75 प्रतिशत कामकाजी लोग अभी भी स्वरोजगार से जुड़े हैं। इसकी तुलना में वियतनाम में यह हिस्सा लगभग 53.3 प्रतिशत, श्रीलंका में 42.1 प्रतिशत, फिलीपींस में 36.1 प्रतिशत और चीन में करीब 37 प्रतिशत है। इससे पता चलता है कि भारत में बड़ी संख्या में लोग अभी भी छोटे कारोबार या पारिवारिक काम पर निर्भर हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल छोटे घरेलू कारोबार या gig अर्थव्यवस्था के सहारे भारत विकसित देश नहीं बन सकता। इसके लिए बड़ी संख्या में ऐसे रोजगार पैदा करने होंगे, जहां लोगों को नियमित वेतन, सामाजिक सुरक्षा और बेहतर कामकाजी सुविधाएं मिलें।
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत को सबसे पहले बड़ी कंपनियों की संख्या और उनकी रोजगार क्षमता बढ़ानी होगी। कई उद्योग अभी भी अधिक मशीनों पर आधारित हैं, जिससे बड़े पैमाने पर नौकरियां नहीं बन पातीं। आसान नियम, बेहतर बुनियादी ढांचा और निर्यात को बढ़ावा देने वाली नीतियां इस दिशा में मदद कर सकती हैं।
विकसित राष्ट्र बनने के लिए जरूरी कदम
- रोजगार: अधिक औपचारिक jobs का सृजन
- उद्योग: मध्यम और बड़े उद्योगों का विस्तार
- Technology: आधुनिक तकनीक को बढ़ावा
- Credit: छोटे कारोबार को आसान वित्तीय सहायता
- निर्यात: वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाना
- उत्पादकता: कारोबार और श्रम क्षमता में सुधार
छोटे कारोबार को मिलेगा फायदा
दूसरी बड़ी चुनौती मध्यम आकार की कंपनियों की कमी है। जर्मनी जैसे देशों में हजारों मध्यम उद्योग लाखों लोगों को रोजगार देते हैं, लेकिन भारत में छोटे कारोबार और बड़े समूहों के बीच का यह वर्ग काफी कमजोर है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे उद्योगों को पूंजी, नई technology, प्रशिक्षण और निर्यात सहायता देकर मजबूत किया जा सकता है।
इसके अलावा देश के अधिकांश छोटे कारोबार अब भी बहुत सीमित स्तर पर काम कर रहे हैं। उन्हें credit, बाजार और आधुनिक सुविधाएं आसानी से उपलब्ध नहीं हो पातीं। केवल औपचारिक पंजीकरण कराने से उनकी स्थिति नहीं बदलेगी। जरूरत इस बात की है कि उन्हें वित्तीय सहायता, डिजिटल मंचों तक पहुंच और साझा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि वे धीरे-धीरे अपने कारोबार का विस्तार कर सकें।
विशेषज्ञों की राय
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि भारत बड़े उद्योगों, मध्यम कंपनियों और छोटे कारोबार—तीनों स्तरों पर एक साथ सुधार करता है, तो देश में औपचारिक jobs तेजी से बढ़ सकते हैं। इससे रोजगार के अवसर मजबूत होंगे, उत्पादकता बढ़ेगी और भारत के लिए आने वाले वर्षों में अपर मिडिल इनकम से आगे बढ़कर विकसित राष्ट्र बनने का रास्ता अधिक आसान हो सकता है।
Disclaimer: यह जानकारी सार्वजनिक रिपोर्टों और विशेषज्ञों के आकलन पर आधारित है। भविष्य के आर्थिक परिणाम नीतियों और वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेंगे।

