रूस की सरकारी तेल कंपनी ‘रोसनेफ्ट’ के प्रेसिडेंट इगोर सेचिन ने ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर चल रहे तनाव के बीच अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि वॉशिंगटन अपने फ़ायदे के हिसाब से दुनिया के एनर्जी मार्केट को ढालने की कोशिश कर रहा है और इस पूरी स्थिति का सबसे ज़्यादा फ़ायदा अमेरिकी एनर्जी कंपनियों को हुआ है।
होर्मुज जलडमरूमध्य विवाद पर रूस का बड़ा बयान
सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फ़ोरम में बोलते हुए सेचिन ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी का असर पूरी दुनिया पर पड़ा और यह सिर्फ़ ईरान के ख़िलाफ़ उठाया गया कदम नहीं था। उन्होंने कहा कि रणनीतिक जोखिमों का सही आकलन न होने की वजह से दुनिया की अर्थव्यवस्था को नुकसान उठाना पड़ा।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक रास्तों में से एक है। दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा इसी रास्ते से आता-जाता है। यह समुद्री रास्ता खाद और दूसरी ज़रूरी चीज़ों की सप्लाई के लिए भी ज़रूरी है। जब ईरान और अमेरिका-इज़राइल गठबंधन के बीच तनाव बढ़ा, तो इस रास्ते पर संकट पैदा हो गया, जिससे ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतें कई सालों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुँच गईं।
🌍 होर्मुज जलडमरूमध्य का वैश्विक महत्व
- वैश्विक तेल आपूर्ति: लगभग 20% तेल इसी मार्ग से गुजरता है
- महत्व: दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक रास्तों में शामिल
- प्रभाव: तेल, खाद और आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई प्रभावित हो सकती है
- कारण: ईरान और अमेरिका-इज़राइल तनाव
- नतीजा: वैश्विक तेल कीमतों में तेज़ उछाल
- चिंता: अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा पर असर
अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों को फायदा मिलने का दावा
सेचिन के मुताबिक, इन हालात का सबसे ज़्यादा फ़ायदा अमेरिकी एनर्जी कंपनियों को हुआ है। उनका कहना है कि तेल की ऊंची कीमतों और सप्लाई में रुकावट की वजह से अमेरिकी कंपनियों को एनर्जी रिसोर्स ज़्यादा कीमतों पर बेचकर कॉम्पिटिटिव फ़ायदा मिला।
रूसी CEO ने कहा, “होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी का मामला ग्लोबल एनर्जी मार्केट के नियमों को अमेरिका के पक्ष में बदलने की कोशिश है।” हालाँकि इसका मकसद ईरान पर दबाव बनाना था, लेकिन इसका असर पूरी दुनिया पर दिखा।
अन्य समुद्री मार्गों और OPEC+ को लेकर चेतावनी
रोसनेफ्ट के प्रमुख ने चेतावनी दी कि अगर मौजूदा तनाव जारी रहा, तो दूसरे अहम इंटरनेशनल शिपिंग रूट भी खतरे में पड़ सकते हैं। उन्होंने बाब-अल-मंडेब, जिब्राल्टर जलडमरूमध्य और मलक्का जलडमरूमध्य का ज़िक्र करते हुए कहा कि इन रास्तों में किसी भी तरह की रुकावट से इंटरनेशनल व्यापार और एनर्जी सप्लाई में और मुश्किलें आ सकती हैं।
सेचिन ने अपने भाषण में OPEC-प्लस (OPEC+) पार्टनरशिप की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि UAE के गठबंधन से बाहर निकलने और कतर जैसे दूसरे देशों के पहले ही बाहर हो जाने से इस ग्रुप की ताकत कम हो गई है।
⛽ OPEC+ और रूस की प्रमुख चिंताएँ
- OPEC+ उत्पादन: 58 से घटकर 37 मिलियन बैरल प्रतिदिन
- रूस का उत्पादन: 2016 के बाद लगभग 15% कम
- मुख्य चिंता: गठबंधन की घटती ताकत
- कारण: UAE और अन्य देशों का अलग होना
- निवेश आवश्यकता: लगभग 10 ट्रिलियन रूबल
- भविष्य: OPEC+ देशों के साथ निवेश सहयोग बढ़ाने की उम्मीद
रूस के उत्पादन और निवेश पर फोकस
सेचिन का दावा है कि पिछले दस सालों में OPEC+ देशों का कुल प्रोडक्शन 58 मिलियन बैरल प्रति दिन से घटकर लगभग 37 मिलियन बैरल प्रति दिन रह गया है। इसके अलावा, उन्होंने बताया कि 2016 की डील के बाद रूस का प्रोडक्शन लगभग 15% कम हो गया, जबकि कई सदस्य देशों ने अपना प्रोडक्शन बढ़ाया था।
उन्होंने कहा कि प्रोडक्शन में आई कमी की भरपाई के लिए रूस के ऑयल सेक्टर को कम से कम 10 ट्रिलियन रूबल खर्च करने होंगे। साथ ही, उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में रूस और OPEC+ देशों के बीच इन्वेस्टमेंट के मामले में सहयोग बढ़ेगा।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध रिपोर्टों और सार्वजनिक बयानों पर आधारित है। परिस्थितियाँ समय के साथ बदल सकती हैं।

