सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान के बीच शुक्रवार को हुए रक्षा समझौते को लेकर सऊदी सरकार ने स्पष्ट किया है कि इसका उद्देश्य किसी नए सैन्य गुट या धार्मिक आधार वाले समूह का निर्माण करना नहीं है। सऊदी अधिकारी के अनुसार यह समझौता किसी देश के खिलाफ नहीं है और न ही इसका संबंध परमाणु हथियारों की होड़ से है। इसका मुख्य उद्देश्य तीनों देशों की रक्षा क्षमता को मजबूत करना और किसी भी संभावित खतरे से निपटने की तैयारी बेहतर करना है।
🛡️ रक्षा समझौते का उद्देश्य
- रक्षा क्षमता: तीनों देशों की रक्षा क्षमता को मजबूत करना
- सुरक्षा: संभावित खतरे से निपटने की तैयारी बेहतर करना
- सैन्य सहयोग: आपसी रक्षा क्षमताओं को बेहतर तरीके से जोड़ना
- मुख्य उद्देश्य: किसी देश के खिलाफ मोर्चा बनाना नहीं
मक्का में हुआ रक्षा समझौता
यह समझौता मक्का में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मौजूदगी में हुआ। इसे तीनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक संबंधों का हिस्सा बताया गया है। सऊदी उप विदेश मंत्री रायद करिमली ने कहा कि इस समझौते के लिए कई वर्षों से बातचीत चल रही थी।
समझौते की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर तीनों में से किसी एक देश पर बाहरी सशस्त्र हमला होता है तो उसे बाकी दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। इसके तहत तीनों देश अपनी रक्षा क्षमताओं को एक-दूसरे के साथ बेहतर तरीके से जोड़ने और सुरक्षा से जुड़े खतरों का मिलकर सामना करने की दिशा में काम करेंगे।
सऊदी अधिकारी के मुताबिक समझौते का उद्देश्य संयुक्त रक्षा क्षमता बढ़ाना, सेना की तैयारी मजबूत करना और रणनीतिक सुरक्षा को बेहतर बनाना है। उन्होंने कहा कि यह समझौता किसी दूसरे देश को धमकाने या क्षेत्र में तनाव बढ़ाने के लिए नहीं किया गया है।
पुराने रक्षा समझौतों पर असर नहीं
सऊदी सरकार ने यह भी साफ किया है कि इस समझौते से उसके खाड़ी देशों, अरब देशों और दूसरे अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ पुराने संबंध प्रभावित नहीं होंगे। सऊदी अरब के पहले से मौजूद द्विपक्षीय और बहुपक्षीय रक्षा समझौते भी इस नए समझौते के कारण खत्म नहीं होंगे।
🌍 समझौते को लेकर सऊदी सरकार का रुख
- किसी देश के खिलाफ नहीं: समझौते का उद्देश्य किसी देश को धमकाना नहीं
- Military गठजोड़ नहीं: इसे किसी सैन्य गुट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए
- धार्मिक गुट नहीं: इसका उद्देश्य धार्मिक आधार वाला समूह बनाना नहीं
- Defence: सुरक्षा खतरों से निपटने और सहयोग को मजबूत करना
अधिकारी ने कहा कि इस समझौते का उद्देश्य तीनों देशों की अपनी रक्षा क्षमताओं को विकसित करना और जरूरत पड़ने पर उनका बेहतर इस्तेमाल करना है। उन्होंने इसे किसी Military गठजोड़ या धार्मिक गुट के रूप में देखने से इनकार किया।
क्षेत्रीय सुरक्षा में बढ़ेगा सहयोग
तीनों देशों के बीच हुए इस समझौते को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Saudi Arabia, Turkiye और Pakistan के बीच रक्षा सहयोग बढ़ने से आने वाले समय में सैन्य प्रशिक्षण, सुरक्षा तैयारी और आपसी सहयोग के नए रास्ते खुल सकते हैं।
हालांकि सऊदी सरकार ने जोर देकर कहा है कि समझौते का मकसद किसी देश के खिलाफ मोर्चा बनाना नहीं है। इसका मुख्य ध्यान Defence क्षमता बढ़ाने, सुरक्षा खतरों से निपटने और तीनों देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने पर है।