SBI ने विदेशी बाजार से जुटाए $300 मिलियन, RBI के फैसले का बड़ा असर

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने विदेशी पूंजी बाजार से 300 मिलियन डॉलर (करीब ₹2,500 करोड़) जुटाए हैं। बैंक ने अपनी लंदन शाखा के माध्यम से तीन साल की अवधि वाले सीनियर अनसिक्योर्ड फ्लोटिंग रेट नोट्स (Senior Unsecured Floating Rate Notes) जारी किए हैं।

SBI ने विदेशी बॉन्ड के जरिए जुटाए 300 मिलियन डॉलर

हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी मुद्रा में कर्ज जुटाने को आसान बनाने के लिए किए गए बदलावों के बाद SBI ऐसा करने वाले पहले बड़े सरकारी बैंकों में शामिल हो गया है।

SBI ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि तीन साल की अवधि वाले इन डॉलर बॉन्ड पर निवेशकों को SOFR (Secured Overnight Financing Rate) + 100 बेसिस प्वाइंट के हिसाब से ब्याज मिलेगा। ब्याज का भुगतान प्रत्येक तिमाही किया जाएगा। यह बॉन्ड Regulation-S के तहत जारी किए गए हैं और 6 जुलाई को बैंक की लंदन शाखा के माध्यम से जारी होंगे।

💰 SBI विदेशी बॉन्ड इश्यू की प्रमुख बातें

  • जुटाई गई राशि: 300 मिलियन डॉलर
  • भारतीय मूल्य: करीब ₹2,500 करोड़
  • अवधि: 3 वर्ष
  • ब्याज दर: SOFR + 100 बेसिस प्वाइंट
  • भुगतान: प्रत्येक तिमाही
  • जारीकर्ता: SBI की लंदन शाखा

Regulation-S के तहत जारी किए गए डॉलर बॉन्ड

Regulation-S के जरिए कंपनियां और वित्तीय संस्थान अमेरिका के बाहर अंतरराष्ट्रीय संस्थागत निवेशकों से पूंजी जुटा सकती हैं, जिससे वैश्विक निवेशकों तक उनकी पहुंच बढ़ती है।

SBI के निदेशक मंडल ने 12 मई को वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान विदेशी बॉन्ड जारी कर 2 अरब डॉलर तक जुटाने की मंजूरी दी थी। बैंक का उद्देश्य घरेलू बाजार पर निर्भरता कम करना, फंडिंग के स्रोतों में विविधता लाना और वैश्विक निवेशकों तक अपनी पहुंच मजबूत करना है।

इससे पहले सितंबर 2025 में SBI ने पांच साल की अवधि वाले डॉलर बॉन्ड के जरिए 500 मिलियन डॉलर जुटाए थे। उस समय बैंक ने 4.5% की रिकॉर्ड कम कूपन दर पर यह बॉन्ड जारी किए थे।

🏦 RBI के नए नियम और बैंकों को फायदा

  • RBI कदम: ECB नियमों में राहत
  • फायदा: विदेशी फंडिंग की लागत कम
  • हेजिंग: पात्र विदेशी मुद्रा उधारी पर राहत
  • लक्ष्य: विदेशी निवेश बढ़ाना
  • अन्य बैंक: HDFC Bank, Axis Bank और PFC भी सक्रिय
  • संभावना: आने वाले महीनों में विदेशी बॉन्ड इश्यू बढ़ सकते हैं

RBI के नए नियमों से विदेशी फंडिंग होगी आसान

5 जून को RBI ने विदेशी मुद्रा में कर्ज (ECB) जुटाने को प्रोत्साहित करने के लिए कई अहम कदम उठाए थे। नए नियमों के तहत पात्र विदेशी मुद्रा उधारी पर हेजिंग लागत का भार RBI वहन करेगा, जिससे विदेशी बाजार से पूंजी जुटाने की कुल लागत कम हो जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से भारतीय बैंकों और सरकारी कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार से सस्ती दरों पर फंड जुटाना आसान होगा। इससे विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ेगा और कंपनियों की फंडिंग लागत भी कम होगी।

SBI की पूंजी स्थिति और आगे की रणनीति

इस महीने की शुरुआत में SBI के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान 60,000 करोड़ रुपये तक जुटाने की मंजूरी भी दी थी। यह राशि लॉन्ग-टर्म बॉन्ड, बेसल-III के अनुरूप एडिशनल टियर-1 (AT-1) और टियर-2 बॉन्ड के जरिए घरेलू और विदेशी दोनों बाजारों से जुटाई जाएगी।

मार्च 2026 के अंत तक बैंक का कैपिटल-टू-रिस्क वेटेड एसेट रेशियो (CRAR) 15.40% और कॉमन इक्विटी टियर-1 (CET-1) अनुपात 12.29% रहा, जो बैंक की मजबूत पूंजी स्थिति को दर्शाता है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि RBI की नई व्यवस्था के बाद आने वाले महीनों में कई अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और सरकारी कंपनियां भी विदेशी बॉन्ड बाजार का रुख कर सकती हैं। अब तक HDFC Bank, Axis Bank और Power Finance Corporation (PFC) भी विदेशी बाजार से पूंजी जुटाने के लिए इस अवसर का लाभ उठा चुके हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि वैश्विक बाजार की स्थितियां अनुकूल रहीं तो भारतीय वित्तीय संस्थानों की विदेशी फंडिंग गतिविधियां आने वाले समय में और तेज हो सकती हैं।

Gourav Kumar Singh

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