SEBI Chief ने Closing Auction पर दिया अपडेट, नहीं मिली गड़बड़ी

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के प्रमुख तुहिन कांत पांडे ने कहा है कि शेयरों के कारोबार के अंतिम चरण में शुरू किए गए क्लोजिंग ऑक्शन से अब तक किसी तरह की गड़बड़ी या कीमतों में हेरफेर का संकेत नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि निगरानी लगातार जारी है और आंकड़ों की नियमित जांच की जा रही है। उनके अनुसार, पहले इस व्यवस्था में म्यूचुअल फंड की भागीदारी करीब 5 से 7 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर लगभग 25 प्रतिशत हो गई है।

क्लोजिंग ऑक्शन पर सेबी की नजर, अब तक नहीं मिली गड़बड़ी

शेयर बाजार में क्लोजिंग ऑक्शन की शुरुआत 3 अगस्त से हुई थी। पहले चरण में डेरिवेटिव कारोबार वाले 208 शेयरों को इसमें शामिल किया गया। इस व्यवस्था ने लंबे समय से इस्तेमाल हो रही वॉल्यूम आधारित औसत कीमत प्रणाली की जगह ली है। इसका उद्देश्य कारोबार के आखिरी समय में कीमतों में होने वाली गड़बड़ी को रोकना और शेयर की सही कीमत तय करने में मदद करना है।

हालांकि, नई व्यवस्था को लेकर बाजार के कुछ लोगों ने चिंता भी जताई है। कारोबार में कम भागीदारी के कारण कुछ शेयरों की कीमतों में अचानक बड़े बदलाव देखने को मिले। क्लोजिंग ऑक्शन के पहले दिन निफ्टी 50 में 1.6 प्रतिशत की तेजी आई, जबकि सेंसेक्स केवल 0.7 प्रतिशत बढ़ा। निफ्टी में आखिरी दो मिनट के दौरान करीब 200 अंकों की तेजी ने कारोबारियों का ध्यान खींचा।

कीमतों में इस अंतर की एक वजह बाजार में पर्याप्त भागीदारी नहीं होना भी बताई गई। आम तौर पर ऐसे अंतर का फायदा उठाने वाले कारोबारियों की मौजूदगी से शेयरों की कीमतों में संतुलन बना रहता है। लेकिन नई व्यवस्था को लेकर अनिश्चितता के कारण कई ऐसे कारोबारी अभी इससे दूर हैं।

📊 क्लोजिंग ऑक्शन का ताजा अपडेट

  • शुरुआत: 3 अगस्त से
  • पहला चरण: 208 शेयर शामिल
  • म्यूचुअल फंड भागीदारी: करीब 25 प्रतिशत
  • पुरानी व्यवस्था: वॉल्यूम आधारित औसत कीमत प्रणाली
  • मुख्य उद्देश्य: अंतिम कीमत को बेहतर तरीके से तय करना

बाजार भागीदारी बढ़ाने पर जोर

पांडे ने कहा कि भारत ने क्लोजिंग ऑक्शन व्यवस्था शुरू करने में कुछ देर की है और दुनिया के कई अन्य बाजार पहले ही इसे अपना चुके हैं। उनके अनुसार, किसी भी नई व्यवस्था को समझने और उसके अनुसार खुद को तैयार करने में बाजार के सभी लोगों को समय लगता है। उन्होंने यह भी कहा कि इसमें कारोबारियों से कोई जानकारी छिपाई नहीं जाती, क्योंकि 15 मिनट की इस प्रक्रिया के दौरान अनुमानित कीमतें दिखाई देती हैं। इसलिए ज्यादा से ज्यादा बाजार भागीदारों को इस व्यवस्था को समझने और इसमें भाग लेने की जरूरत है।

नई व्यवस्था के कारण सूचकांक वायदा कारोबार में भी कमी देखी गई है। 7 अगस्त तक के सप्ताह में निफ्टी और बैंक निफ्टी वायदा के औसत दैनिक कारोबार में करीब 40 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 69,982 अनुबंध रह गया। इससे पहले 31 जुलाई को खत्म हुए सप्ताह में यह आंकड़ा 1,34,754 अनुबंध था।

सूचकांक विकल्प कारोबार में भी गिरावट देखने को मिली। 4 अगस्त को खरीदे गए कॉल विकल्पों का कारोबार करीब 15.19 करोड़ अनुबंध रहा, जो 28 जुलाई के 18.06 करोड़ अनुबंध से लगभग 16 प्रतिशत कम है। इसी तरह पुट विकल्पों के कारोबार में भी पिछले सप्ताह की तुलना में करीब 10 प्रतिशत की कमी आई।

⚠️ कारोबार पर नई व्यवस्था का असर

  • निफ्टी और बैंक निफ्टी वायदा: औसत दैनिक कारोबार में करीब 40 प्रतिशत गिरावट
  • 7 अगस्त तक कारोबार: 69,982 अनुबंध
  • 31 जुलाई तक कारोबार: 1,34,754 अनुबंध
  • कॉल विकल्प: करीब 15.19 करोड़ अनुबंध
  • कॉल विकल्प में कमी: करीब 16 प्रतिशत
  • पुट विकल्प में बदलाव: करीब 10 प्रतिशत की कमी

बाजार नियामक का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य बाजार को अधिक पारदर्शी बनाना और शेयरों की अंतिम कीमत को बेहतर तरीके से तय करना है। फिलहाल नियामक की नजर इसकी कार्यप्रणाली और बाजार में भागीदारी पर बनी हुई है। आने वाले समय में अधिक भागीदारी बढ़ने के साथ इस व्यवस्था से जुड़ी मौजूदा अनिश्चितता कम होने की उम्मीद की जा रही है।

Gourav Kumar Singh

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