भारत सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार ने देश में दूसरे बड़े chip manufacturing plant को स्थापित करने की योजना बनाई है, जिसे वर्ष 2031 तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
भारत में दूसरे बड़े चिप संयंत्र की तैयारी
इस परियोजना के लिए कंपनियों को कम से कम 20,000 करोड़ रुपये की अपनी पूंजी लगानी होगी। सरकार की नई योजना के तहत आधुनिक 12 इंच वाली वेफर तकनीक पर आधारित संयंत्र लगाने वाली पात्र कंपनियों को परियोजना लागत का 40 प्रतिशत तक आर्थिक सहायता दी जा सकती है।

सरकार का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में देश में चिप उद्योग के लिए जरूरी ढांचा तैयार हुआ है। इसी वजह से अब विदेशी और बड़ी तकनीकी कंपनियां भारत में निवेश करने में पहले की तुलना में ज्यादा रुचि दिखा सकती हैं।
पहले की योजना में Central government परियोजना लागत का लगभग आधा हिस्सा सहायता के रूप में देती थी। उस योजना के तहत गुजरात में टाटा समूह से जुड़ा एक बड़ा व्यावसायिक चिप संयंत्र सामने आया था। अब नई योजना के लिए कुल बजट बढ़ाकर करीब 1.28 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है।
दूसरे चिप संयंत्र की मुख्य जानकारी
- लक्ष्य: दूसरा बड़ा चिप निर्माण संयंत्र वर्ष 2031 तक शुरू करना
- कंपनी का निवेश: कम से कम 20,000 करोड़ रुपये
- सरकारी सहायता: परियोजना लागत का 40 प्रतिशत तक
- तकनीक: आधुनिक 12 इंच वाली वेफर तकनीक
- नई योजना का बजट: करीब 1.28 लाख करोड़ रुपये
- जरूरी आय: वित्त वर्ष 2026 तक कम से कम 7,500 करोड़ रुपये
नई योजना में चिप निर्माण के साथ कई क्षेत्रों पर जोर
नई Semicon योजना में केवल चिप निर्माण पर ही ध्यान नहीं दिया गया है। इसमें देश में पहली डिस्प्ले चिप निर्माण इकाई स्थापित करने, विशेष प्रकार के सेमीकंडक्टर बनाने और जरूरी कच्चे माल से जुड़ी क्षमता विकसित करने पर भी जोर दिया गया है। सरकार का उद्देश्य ऐसा पूरा तंत्र तैयार करना है जिससे भारत को चिप के लिए दूसरे देशों पर कम निर्भर रहना पड़े और घरेलू उत्पादन बढ़ाया जा सके।
दूसरे silicon plant के लिए आवेदन करने वाली कंपनियों के पास उत्पादन स्तर की लाइसेंस प्राप्त तकनीक होना जरूरी होगा। इसके अलावा वित्त वर्ष 2026 तक उनकी सालाना आय कम से कम 7,500 करोड़ रुपये होनी चाहिए।
सरकार का कहना है कि इस बार केवल योजनाओं की संख्या बढ़ाने के बजाय बेहतर और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, भारत में पिछले पांच वर्षों के दौरान किए गए निवेश से बाजार में प्रवेश करने का जोखिम काफी कम हुआ है।
डिस्प्ले चिप इकाई के लिए भी आर्थिक सहायता
पहली डिस्प्ले chip इकाई भी सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए केंद्र परियोजना लागत का 35 प्रतिशत तक आर्थिक सहयोग देगा। संबंधित कंपनी को अपनी तरफ से कम से कम 10,000 करोड़ रुपये लगाने होंगे और वित्त वर्ष 2026 में उसकी आय कम से कम 5,000 करोड़ रुपये होनी चाहिए।
डिस्प्ले चिप और डिजाइन कंपनियों के लिए सहायता
- डिस्प्ले इकाई: परियोजना लागत का 35 प्रतिशत तक सरकारी सहयोग
- कंपनी का निवेश: कम से कम 10,000 करोड़ रुपये
- सालाना आय: वित्त वर्ष 2026 में कम से कम 5,000 करोड़ रुपये
- चिप डिजाइन: शुरुआती कंपनियों को सहायता देने की तैयारी
- शुरुआती पूंजी: 15 करोड़ रुपये तक
- निजी निवेश: योग्य कंपनियों में सरकार उसी अनुपात में निवेश कर सकती है
चिप डिजाइन कंपनियों और स्टार्टअप को भी मदद
सरकार के अनुसार, इस तरह की सहायता दुनिया के उन देशों में अपनाई जाने वाली व्यवस्था के अनुरूप है, जहां चिप उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकारें आर्थिक मदद देती हैं। नई योजना में चिप डिजाइन से जुड़े घरेलू कारोबार को भी सहायता देने की तैयारी है। शुरुआती स्तर की कंपनियों को 15 करोड़ रुपये तक की शुरुआती पूंजी मिल सकती है।
इसके अलावा निजी निवेशकों से पैसा जुटाने वाली योग्य कंपनियों में सरकार भी उसी अनुपात में निवेश कर सकती है। इस व्यवस्था में आगे चलकर सफल कंपनियों को सरकार की हिस्सेदारी वापस खरीदने का विकल्प दिया जाएगा। इससे देश में नई तकनीक विकसित करने वाली कंपनियों को लंबे समय तक बढ़ने का अवसर मिल सकता है।
भारत की चिप नीति का बड़ा लक्ष्य
भारत की यह नीति America और China जैसे बड़े बाजारों में अपनाए जा रहे तरीकों से भी जुड़ी हुई है। सरकार का मुख्य लक्ष्य केवल अधिक संयंत्र लगाना नहीं, बल्कि देश में मजबूत चिप निर्माण क्षमता और अपनी तकनीकी क्षमता तैयार करना है। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल, वाहन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अन्य आधुनिक क्षेत्रों के लिए जरूरी उपकरणों की घरेलू उपलब्धता बढ़ सकती है।
Conclusion
भारत का नया Semiconductor Program देश में चिप निर्माण और तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। दूसरे संयंत्र, डिस्प्ले निर्माण और डिजाइन कंपनियों पर ध्यान देने से घरेलू उद्योग को मजबूती मिल सकती है और विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता घट सकती है।
Frequently asked questions
1. भारत में दूसरा चिप संयंत्र कब तक शुरू हो सकता है?
भारत सरकार का लक्ष्य दूसरा व्यावसायिक सिलिकॉन चिप संयंत्र वर्ष 2031 तक शुरू करने का है। इसके लिए योग्य कंपनियों को बड़ी पूंजी लगानी होगी और सरकार नई योजना के तहत परियोजना लागत पर आर्थिक सहायता भी देगी।
2. दूसरे चिप संयंत्र के लिए कंपनी को कितना निवेश करना होगा?
नई योजना के तहत आवेदन करने वाली कंपनी को कम से कम 20,000 करोड़ रुपये की अपनी पूंजी लगानी होगी। इसके साथ कंपनी के पास उत्पादन योग्य तकनीक और वित्त वर्ष 2026 तक कम से कम 7,500 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार होना जरूरी है।
3. भारत की नई सेमीकंडक्टर योजना में कितनी सरकारी मदद मिलेगी?
दूसरे सिलिकॉन संयंत्र के लिए केंद्र सरकार परियोजना लागत का 40 प्रतिशत तक आर्थिक सहयोग दे सकती है। वहीं डिस्प्ले चिप निर्माण परियोजनाओं के लिए सहायता 35 प्रतिशत तक रखी गई है, जबकि राज्य सरकारों की अलग मदद भी मिल सकती है।
4. क्या भारत में पहली display chip फैक्ट्री भी बनाई जाएगी?
हां, नई योजना में भारत की पहली डिस्प्ले चिप निर्माण इकाई स्थापित करना प्रमुख लक्ष्य है। इसके लिए कंपनी को कम से कम 10,000 करोड़ रुपये निवेश करना होगा और वित्त वर्ष 2026 में उसकी आय कम से कम 5,000 करोड़ रुपये होनी चाहिए।
5. चिप डिजाइन करने वाले Startup को सरकार कैसे मदद करेगी?
सरकार चिप डिजाइन क्षेत्र की नई कंपनियों को शुरुआती स्तर पर 15 करोड़ रुपये तक की पूंजी दे सकती है। निजी निवेश मिलने पर सरकार भी बराबर निवेश कर सकती है, जिससे योग्य स्टार्टअप को कारोबार बढ़ाने और नई तकनीक विकसित करने में सहायता मिलेगी।
अस्वीकरण: यह जानकारी सामान्य सूचना के लिए है और निवेश निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित है।