भारत के कई बड़े परिवारों के लिए विदेशों में निवेश करने के मामले में सिंगापुर एक पसंदीदा जगह बनता जा रहा है। भारत में बाहर पैसा भेजने की तय सीमा के कारण बड़े परिवारों के निवेश कार्यालयों को वैश्विक अवसरों तक पहुंच बनाने में परेशानी होती है। इसी वजह से कुछ परिवार सिंगापुर में अपनी अलग संस्था बनाने या वहां पहले से बनी व्यवस्था का विस्तार करने पर विचार कर रहे हैं।
भारतीय परिवारों के लिए सिंगापुर क्यों बन रहा है पसंदीदा
भारत की Liberalised Remittance Scheme के तहत निवासी भारतीय एक वित्त वर्ष में 2.5 लाख डॉलर तक विदेश भेज सकते हैं। यह सीमा आम लोगों के लिए पर्याप्त हो सकती है, लेकिन करोड़ों रुपये का निवेश करने वाले बड़े परिवारों के लिए यह रकम काफी कम है। जैसे-जैसे ये निवेश कार्यालय बड़े सौदों और सीधे विदेशी निवेश की ओर बढ़ रहे हैं, उन्हें ऐसी व्यवस्था की जरूरत महसूस हो रही है जिससे बड़ी रकम को वैश्विक बाजारों में आसानी से लगाया जा सके।

विदेशों में निवेश के लिए परिवार कई रास्ते अपना सकते हैं। इनमें दूसरे देशों में संस्था बनाना, विदेशी शेयर बाजारों में पैसा लगाना, निजी कंपनियों में निवेश, सह-निवेश और अलग-अलग मुद्रा में निवेश शामिल हैं। कर्नाटक के Baldota Group से जुड़े Baldota Family Office ने GIFT City, दुबई और सिंगापुर का मूल्यांकन करने के बाद सिंगापुर में अपनी विदेशी संस्था बनाने का फैसला किया है।
भारत के कुछ अन्य बड़े परिवारों के निवेश कार्यालय भी सिंगापुर में व्यवस्था बनाने या वहां निवेश बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इनमें Premji Invest, Munjal Family Office, Patni Family Office और Kothari Family Office के नाम शामिल हैं। इन परिवारों की रुचि खास तौर पर विदेशों में तकनीक से जुड़े नए क्षेत्रों और दूसरे निवेश अवसरों में बढ़ रही है।
सिंगापुर की ओर भारतीय परिवारों का रुख
- मुख्य वजह: बड़े विदेशी निवेश के लिए बेहतर व्यवस्था
- निवेश विकल्प: शेयर बाजार, निजी कंपनियां और वैकल्पिक निवेश
- प्रमुख परिवार: Baldota, Premji, Munjal, Patni और Kothari
- अन्य स्थान: GIFT City और दुबई का भी मूल्यांकन
- उद्देश्य: वैश्विक बाजारों में संपत्ति का विस्तार
वैश्विक निवेश के लिए बढ़ती जरूरत
Baldota Family Office के मुख्य निवेश अधिकारी नितेश अग्रवाल के अनुसार, भारतीय संपत्ति अब तेजी से वैश्विक हो रही है और परिवार अपनी संपत्ति का कुछ हिस्सा भारत के बाहर रखना चाहते हैं। उनका मानना है कि अगर भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था के रूप में आगे बढ़ना है तो देश में पूंजी के आने और बाहर जाने की प्रक्रिया को अधिक आसान बनाया जाना जरूरी है।
Thermax Group से जुड़े Thermax Family Office ने भी वैश्विक निवेश के लिए सिंगापुर में व्यवस्था बनाई है। यह कार्यालय मुख्य रूप से विदेशी शेयर बाजारों में निवेश करता है और निजी बाजारों में इसकी हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम है। इसके अनुसार, सिंगापुर में मौजूदगी से अलग-अलग देशों में निवेश करने के साथ ऐसी निवेश रणनीतियों तक पहुंच मिलती है जो भारत में आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। इसमें hedge funds जैसी योजनाएं भी शामिल हैं। इससे पूरे निवेश में जोखिम को बेहतर तरीके से संभालने में मदद मिल सकती है।
कर से जुड़े लाभ भी परिवारों को सिंगापुर जैसे स्थिर नियमों वाले देशों की ओर आकर्षित करते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के मध्यम और बड़े परिवारों के निवेश कार्यालयों के पास 2024 में करीब 70,000 करोड़ रुपये की संपत्ति थी। अगले तीन वर्षों में इस संपत्ति के सालाना औसतन 14 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया गया है। इन कार्यालयों का काम अब केवल परिवार की पुरानी संपत्ति को सुरक्षित रखने तक सीमित नहीं है। वे स्टार्टअप, बुनियादी ढांचे, निजी ऋण, वैकल्पिक निवेश और विदेशी बाजारों में भी पैसा लगा रहे हैं।
सिंगापुर में निवेश के प्रमुख फायदे
- वैश्विक पहुंच: कई देशों के बाजारों में निवेश की सुविधा
- वित्तीय सेवाएं: संपत्ति प्रबंधन और ट्रस्ट से जुड़ी सेवाएं
- विविधता: विदेशी शेयर, स्टार्टअप और निजी निवेश के विकल्प
- उत्तराधिकार योजना: परिवार की संपत्ति को आगे संभालने की व्यवस्था
- जोखिम प्रबंधन: अलग-अलग बाजारों में पैसा फैलाने का अवसर
सिंगापुर में बढ़ रहे फैमिली ऑफिस
सिंगापुर को वैश्विक निवेश के लिए एक प्रवेश द्वार के रूप में देखा जा रहा है। वहां संपत्ति प्रबंधन, ट्रस्ट व्यवस्था और उत्तराधिकार योजना जैसी सेवाओं का मजबूत नेटवर्क मौजूद है। 2024 के अंत तक सिंगापुर में एकल परिवारों के लिए बनाए गए निवेश कार्यालयों की संख्या 2,000 से अधिक हो गई थी, जो एक साल पहले करीब 1,400 थी।
कुछ भारतीय परिवारों के लिए विदेश में संस्था बनाने का एक कारण ऐसे निवेशों तक पहुंच बनाना भी है जिन्हें भारत से करना मुश्किल हो सकता है। बड़े परिवारों के लिए विदेशी मुद्रा, अलग-अलग देशों में संपत्ति और परिवार के सदस्यों की विदेश में मौजूदगी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जिन परिवारों के पास पहले से विदेशों में कमाई या पूंजी मौजूद है, वे उसी विदेशी संस्था के जरिए निवेश कर सकते हैं और पैसा भारत लाकर फिर विदेश भेजने की जरूरत कम हो सकती है।
बड़े परिवारों के लिए विदेशी निवेश की व्यवस्था अब पहले से ज्यादा जटिल होती जा रही है। कुछ परिवार विदेशों में 3 करोड़ डॉलर से अधिक राशि लगाने की योजना रखते हैं, इसलिए उनके लिए केवल व्यक्तिगत पैसा भेजने की सीमा पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। साथ ही, जिन परिवारों की अगली पीढ़ी विदेशों में रहती है, उनके लिए नियमों के अनुसार विदेशी संस्था बनाना और भी उपयोगी हो सकता है। इसी वजह से सिंगापुर भारतीय परिवारों के लिए वैश्विक निवेश का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है।
Frequently asked questions
1. भारतीय फैमिली ऑफिस सिंगापुर में निवेश क्यों कर रहे हैं?
भारतीय फैमिली ऑफिस वैश्विक बाजारों में बड़े निवेश के लिए सिंगापुर का रुख कर रहे हैं। यहां मजबूत वित्तीय व्यवस्था, स्थिर नियम और विदेशी निवेश के कई विकल्प उपलब्ध हैं। इससे बड़े परिवारों को भारत के बाहर संपत्ति फैलाने में मदद मिलती है।
2. भारत से विदेश में कितना पैसा भेजा जा सकता है?
Liberalised Remittance Scheme के तहत निवासी भारतीय एक वित्त वर्ष में 2.5 लाख डॉलर तक विदेश भेज सकते हैं। यह सीमा व्यक्तिगत निवेश के लिए उपयोगी है, लेकिन बड़े परिवारों और निवेश कार्यालयों के लिए बड़ी रकम लगाने में सीमित हो सकती है।
3. सिंगापुर में फैमिली ऑफिस बनाने का क्या फायदा है?
सिंगापुर में फैमिली ऑफिस बनाने से विदेशी शेयर, निजी कंपनियों, वैकल्पिक निवेश और कुछ विशेष निवेश रणनीतियों तक पहुंच आसान हो सकती है। इसके अलावा संपत्ति प्रबंधन, ट्रस्ट और उत्तराधिकार योजना से जुड़ी पेशेवर सेवाएं भी एक ही वित्तीय केंद्र में मिलती हैं।
4. भारतीय परिवार किन विदेशी निवेशों में पैसा लगा रहे हैं?
भारतीय परिवार अब केवल शेयर बाजार तक सीमित नहीं हैं। वे स्टार्टअप, निजी कंपनियों, बुनियादी ढांचे, निजी ऋण, वैकल्पिक निवेश और अलग-अलग देशों के बाजारों में पैसा लगा रहे हैं। इसका उद्देश्य जोखिम को अलग-अलग जगह बांटना और लंबी अवधि में संपत्ति बढ़ाना है।
5. सिंगापुर को वैश्विक निवेश का केंद्र क्यों माना जाता है?
सिंगापुर में वित्तीय सेवाओं का मजबूत नेटवर्क, निवेश प्रबंधक, ट्रस्ट सेवाएं और उत्तराधिकार योजना की सुविधाएं मौजूद हैं। इसकी वैश्विक बाजारों से अच्छी कनेक्टिविटी भी है। इसी कारण बड़े भारतीय परिवार इसे विदेशी संपत्ति और निवेश के लिए उपयोगी स्थान मान रहे हैं।
निष्कर्ष
भारतीय परिवारों का विदेशी निवेश की ओर बढ़ता रुझान सिंगापुर की भूमिका को मजबूत कर रहा है। बड़ी रकम, वैश्विक अवसर और संपत्ति में विविधता की जरूरत के कारण आने वाले वर्षों में ऐसे निवेश कार्यालयों की संख्या बढ़ सकती है।
Disclaimer: निवेश से जुड़े फैसले लेने से पहले नियमों और विशेषज्ञ की सलाह की जांच जरूर करें।