आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती मांग के बीच दुनिया में डेटा सेंटर बनाने का काम तेजी से बढ़ रहा है। इस बढ़ते कारोबार का फायदा केवल Nvidia जैसी बड़ी चिप कंपनी को ही नहीं मिल रहा, बल्कि बिजली और कूलिंग से जुड़े उपकरण बनाने वाली कंपनियों को भी हो रहा है।
डेटा सेंटर को बड़ी मात्रा में बिजली की जरूरत होती है, इसलिए ट्रांसफॉर्मर, बिजली वितरण उपकरण और आधुनिक कूलिंग सिस्टम की मांग लगातार बढ़ रही है। एशिया की कई कंपनियां इस बढ़ती मांग से लाभ उठा रही हैं।
डेटा सेंटर में बिजली उपकरणों की बढ़ती मांग
McKinsey के अनुमान के अनुसार, 2030 तक दुनिया में डेटा सेंटर पर करीब 7 ट्रिलियन डॉलर का निवेश हो सकता है। हालांकि, इन केंद्रों को तेजी से बनाना आसान नहीं है।

बड़े तकनीकी ग्राहक कई बार छह महीने के भीतर नई सुविधा तैयार चाहते हैं, लेकिन बिजली ग्रिड से कनेक्शन मिलने में कुछ उभरते बाजारों में 24 महीने तक लग सकते हैं। विकसित देशों के बड़े बाजारों में यह इंतजार आठ साल से भी ज्यादा हो सकता है। ऐसे में बिजली से जुड़े उपकरणों की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बन रही है।
दक्षिण कोरिया की HD Hyundai Electric और चीन की Hainan Jinpan Smart Technology जैसी ट्रांसफॉर्मर कंपनियों को 2026 की पहली छमाही में डेटा सेंटर से जुड़े प्रोजेक्ट से मजबूत मांग मिली। HD Hyundai Electric ने बताया कि यूरोप में भी मांग बढ़ रही है, क्योंकि अमेरिका की बड़ी तकनीकी कंपनियां फिनलैंड, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देशों में निवेश बढ़ा रही हैं। जून के अंत तक कंपनी के लंबित ऑर्डर करीब 8.5 अरब डॉलर हो गए थे, जो छह महीने पहले की तुलना में 23 प्रतिशत अधिक हैं।
Jinpan को भी डेटा सेंटर से जुड़े नए ऑर्डर में तेज वृद्धि देखने को मिली। कंपनी के अनुसार, साल की पहली छमाही में ऐसे नए ऑर्डर पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले चार गुना से ज्यादा बढ़े। जैसे-जैसे AI चिप अधिक बिजली का इस्तेमाल कर रही हैं, वैसे-वैसे बिजली की खपत कम करने और गर्मी को नियंत्रित करने वाली तकनीक की जरूरत भी बढ़ रही है। Bank of America के अनुमान के मुताबिक, 2030 के अंत तक एक AI रैक की बिजली खपत 1.5 मेगावाट से अधिक हो सकती है।
डेटा सेंटर बिजली मांग की मुख्य बातें
- निवेश: 2030 तक करीब 7 ट्रिलियन डॉलर के निवेश का अनुमान
- बिजली कनेक्शन: कुछ उभरते बाजारों में 24 महीने तक इंतजार
- लंबित ऑर्डर: HD Hyundai Electric के करीब 8.5 अरब डॉलर
- ऑर्डर वृद्धि: छह महीने में करीब 23 प्रतिशत बढ़ोतरी
- AI रैक: 2030 तक बिजली खपत 1.5 मेगावाट से अधिक होने का अनुमान
नई ट्रांसफॉर्मर तकनीक पर बढ़ा ध्यान
इस क्षेत्र में Solid-State Transformer जैसी नई तकनीक पर भी ध्यान बढ़ रहा है। यह पारंपरिक भारी उपकरणों की जगह सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल करके बिजली को बदलने और आगे भेजने का काम करती है। UBS के अनुसार, इस तकनीक से बिजली की दक्षता करीब 4 प्रतिशत बेहतर हो सकती है और लागत भी घट सकती है। अभी इसका इस्तेमाल शुरुआती चरण में है, लेकिन 2030 तक इसकी हिस्सेदारी 40 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है।
डेटा सेंटर में कूलिंग की जरूरत भी तेजी से बढ़ रही है, क्योंकि शक्तिशाली AI चिप काफी गर्मी पैदा करती हैं। Bank of America का अनुमान है कि 2030 तक नए AI डेटा सेंटर में liquid cooling की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जबकि अभी यह करीब 30 प्रतिशत है। McKinsey के अनुसार, liquid cooling बिजली की खपत को 27 प्रतिशत से अधिक कम कर सकती है। इसी वजह से Delta Electronics, Asia Vital Components, Auras Technology और Shenzhen Envicool Technology जैसी कंपनियों को भी इस क्षेत्र में अवसर मिल रहे हैं।
डेटा सेंटर उद्योग में नए तरीके भी तलाशे जा रहे हैं। कुछ कंपनियां समुद्र पर बने केंद्र, पानी के अंदर सुविधाएं और गुफाओं या सुरंगों में सर्वर लगाने जैसे विकल्पों पर विचार कर रही हैं। इससे समुद्री इंजन और तापमान नियंत्रण उपकरण बनाने वाली कंपनियों के लिए नए बाजार खुल सकते हैं। हालांकि, बढ़ते ऑर्डर के बावजूद इन कंपनियों के शेयरों में तेजी पहले जैसी नहीं रही है। निवेशक ऊंचे मूल्यांकन, बढ़ती प्रतिस्पर्धा, प्रोजेक्ट में देरी और उपकरणों की कमी जैसे जोखिमों को लेकर सावधान हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डेटा सेंटर की इस दौड़ में हर कंपनी को फायदा नहीं मिलेगा और आगे चलकर मजबूत ग्राहक आधार वाली कंपनियों को ही ज्यादा लाभ मिल सकता है।
कूलिंग और नई तकनीक से जुड़े अवसर
- नई तकनीक: Solid-State Transformer पर बढ़ता ध्यान
- दक्षता: बिजली की दक्षता करीब 4 प्रतिशत बेहतर होने की संभावना
- तरल कूलिंग: 2030 तक नए AI डेटा सेंटर में हिस्सेदारी 70 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान
- मौजूदा हिस्सेदारी: अभी liquid cooling करीब 30 प्रतिशत
- ऊर्जा बचत: liquid cooling बिजली खपत को 27 प्रतिशत से अधिक कम कर सकती है
- जोखिम: प्रतिस्पर्धा, देरी, उपकरणों की कमी और ऊंचा मूल्यांकन
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल 1: डेटा सेंटर में बिजली उपकरणों की मांग क्यों बढ़ रही है?
एआई आधारित सर्वर बहुत ज्यादा बिजली का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए डेटा सेंटर बनाने वाली कंपनियों को ट्रांसफॉर्मर, बिजली वितरण उपकरण और अन्य ऊर्जा संबंधी साधनों की जरूरत बढ़ रही है। इससे इन उपकरणों के निर्माताओं के कारोबार को फायदा मिल रहा है।
सवाल 2: 2030 तक डेटा सेंटर पर कितना निवेश होने का अनुमान है?
McKinsey के अनुमान के अनुसार, 2030 तक दुनियाभर में डेटा सेंटर से जुड़े निवेश का आकार करीब 7 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। एआई के बढ़ते इस्तेमाल, क्लाउड सेवाओं और डिजिटल सुविधाओं की मांग इसके पीछे प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।
सवाल 3: डेटा सेंटर में कूलिंग सिस्टम इतना जरूरी क्यों है?
एआई सर्वर लगातार काम करते समय काफी गर्मी पैदा करते हैं। अगर तापमान नियंत्रित नहीं किया जाए तो उपकरणों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए आधुनिक डेटा सेंटर में बेहतर कूलिंग सिस्टम जरूरी है, जिससे ऊर्जा खपत और गर्मी दोनों को नियंत्रित किया जा सके।
सवाल 4: Solid-State Transformer क्या है और इसका उपयोग क्यों बढ़ रहा है?
Solid-State Transformer बिजली को बदलने और आगे भेजने के लिए सेमीकंडक्टर तकनीक का इस्तेमाल करता है। यह पारंपरिक ट्रांसफॉर्मर की तुलना में कम जगह ले सकता है और ऊर्जा दक्षता सुधारने में मदद कर सकता है। हालांकि, इसका व्यापक इस्तेमाल अभी शुरुआती दौर में है।
सवाल 5: डेटा सेंटर कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौतियां क्या हैं?
डेटा सेंटर उद्योग के सामने बिजली कनेक्शन में देरी, उपकरणों की कमी, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और प्रोजेक्ट पूरा करने में लगने वाला समय बड़ी चुनौतियां हैं। इसके अलावा बढ़ती लागत और ऊंचे मूल्यांकन के कारण निवेशकों के लिए कंपनियों का चयन करना भी महत्वपूर्ण हो गया है।
निष्कर्ष
एआई के विस्तार से डेटा सेंटर उद्योग में बिजली और कूलिंग उपकरणों की मांग मजबूत बनी रह सकती है। हालांकि, सभी कंपनियों को समान फायदा नहीं मिलेगा। बेहतर तकनीक, मजबूत ऑर्डर और विश्वसनीय ग्राहक वाली कंपनियां इस बढ़ते बाजार में आगे रह सकती हैं।
अस्वीकरण: यह जानकारी सामान्य सूचना के लिए है और निवेश से पहले योग्य वित्तीय सलाहकार की सलाह लेना उचित है।