FPI Investment: विदेशी निवेश बढ़ा, फिर भी बाजार में सुस्ती

विदेशी निवेशकों की भारतीय शेयर बाजार में वापसी जरूर हुई है, लेकिन इसका असर अभी पूरे बाजार में तेज तेजी के रूप में दिखाई नहीं दे रहा है। पिछले दो महीनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने करीब 50,000 करोड़ रुपये भारतीय शेयरों में लगाए हैं। इसके बावजूद Sensex में केवल 0.6 प्रतिशत और Nifty में 0.9 प्रतिशत की बढ़त हुई। इससे संकेत मिलता है कि विदेशी पैसा मौजूदा शेयरों को खरीदने के बजाय नए शेयरों और बड़े सौदों में ज्यादा जा रहा है।

विदेशी निवेश बढ़ा, लेकिन बाजार में तेज तेजी नहीं

सितंबर में नए शेयरों की आपूर्ति बढ़ने की संभावना है। बड़ी कंपनियों के IPO, संस्थागत बिक्री और बड़े शेयर सौदे विदेशी निवेशकों की ओर से आने वाली नई रकम का बड़ा हिस्सा अपने पास खींच सकते हैं। ऐसे में बाजार के मौजूदा शेयरों में खरीदारी के लिए कम पैसा बच सकता है और प्रमुख सूचकांक कुछ समय तक एक सीमित दायरे में रह सकते हैं।

अगस्त में IPO, QIP और बड़े शेयर सौदों की कुल रकम करीब 1.07 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई। यह इस साल किसी एक महीने में सबसे ऊंचा स्तर था। इनमें बड़े शेयर सौदों की भूमिका सबसे ज्यादा रही। अगस्त में इन सौदों की रकम जुलाई के मुकाबले 63 प्रतिशत बढ़कर करीब 80,000 करोड़ रुपये हो गई। कई निजी निवेश संस्थानों और कंपनियों के पुराने निवेश पर तय रोक की अवधि पूरी होने के बाद उन्होंने अपने शेयर बेच दिए।

बड़े शेयर सौदों में बढ़ी गतिविधि

पिछले साल नवंबर से इस साल फरवरी के बीच Lenskart, Groww और Fractal जैसी नई कंपनियां शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई थीं। इन कंपनियों के शुरुआती निवेशकों और अन्य बड़े हिस्सेदारों की छह महीने की रोक अवधि अलग-अलग समय पर खत्म हुई। इसके बाद उनके शेयरों की बिक्री बढ़ी। बड़े और अपने क्षेत्र में मजबूत कारोबार वाली ऐसी कंपनियों के शेयरों में खरीदारों की रुचि बनी रही, भले ही पूरे बाजार में धारणा बहुत मजबूत नहीं थी।

26 अगस्त को Groww, PhysicsWallah और Lenskart समेत कई कंपनियों में 10,300 करोड़ रुपये से अधिक के बड़े शेयर सौदे हुए। इन सौदों में घरेलू म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियों और NPS से जुड़े निवेशकों ने भी हिस्सा लिया। कुछ विदेशी निवेशकों ने भी ऐसे सौदों में खरीदारी की। इससे पता चलता है कि विदेशी निवेशक भारत में पैसा जरूर ला रहे हैं, लेकिन वे अपनी पसंद के खास शेयरों और नए अवसरों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

विदेशी निवेश से बाजार पर असर

  • विदेशी निवेश: पिछले दो महीनों में करीब 50,000 करोड़ रुपये का निवेश
  • Sensex: करीब 0.6 प्रतिशत की बढ़त
  • Nifty: करीब 0.9 प्रतिशत की बढ़त
  • बड़ी रकम: नए शेयरों और बड़े सौदों में निवेश का रुझान
  • संभावित असर: बाजार कुछ समय सीमित दायरे में रह सकता है

IPO और QIP में भी गया विदेशी पैसा

अगस्त में कंपनियों ने IPO के जरिए 22,406 करोड़ रुपये और QIP के जरिए 5,450 करोड़ रुपये जुटाए। दोनों को मिलाकर यह रकम करीब 29,361 करोड़ रुपये रही। यह पिछले महीने विदेशी निवेशकों की ओर से भारतीय शेयरों में लगाए गए कुल पैसे का लगभग 40 प्रतिशत थी। जुलाई में भी नए शेयरों की बिक्री काफी अधिक रही थी। इसका मतलब है कि विदेशी निवेश से बाजार में नई मांग तो पैदा हुई, लेकिन उसका बड़ा हिस्सा नए शेयरों की आपूर्ति को खरीदने में चला गया।

2026 में अब तक विदेशी निवेशकों ने प्राथमिक बाजार में करीब 45,711 करोड़ रुपये लगाए हैं, जबकि मौजूदा शेयरों के बाजार से करीब 2.7 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। इस अंतर के पीछे शेयरों की कीमत, निवेश का समय और पैसे के बंटवारे जैसे कई कारण बताए जा रहे हैं। दुनिया भर में कुछ निवेशकों को यह चिंता भी हुई कि उन्होंने AI और डेटा सेंटर से जुड़े क्षेत्रों में जरूरत से ज्यादा निवेश कर दिया है। इसके बाद दूसरे बाजारों में अवसर तलाशने की कोशिश बढ़ी।

भारत इस स्थिति में विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बन गया, क्योंकि कुछ शेयरों की कीमत पहले की तुलना में अधिक उचित स्तर पर आ गई थी। साथ ही, पुराने निवेशकों के शेयर बाजार में उपलब्ध होने से खरीदारी के नए अवसर भी मिले। निवेश बैंकों और IPO से जुड़े संस्थानों ने भी बड़े विदेशी निवेशकों को नए शेयरों में निवेश के लिए आकर्षित करने की कोशिश की।

सितंबर में शेयर बाजार की नजर किन बातों पर

  • नई आपूर्ति: IPO और संस्थागत बिक्री से शेयरों की उपलब्धता बढ़ सकती है
  • बड़े सौदे: पुराने निवेशकों की बिक्री से बाजार में अतिरिक्त शेयर आ सकते हैं
  • QIP: कंपनियों की पूंजी जुटाने की गतिविधि महत्वपूर्ण रहेगी
  • रुपया: डॉलर के मुकाबले कमजोर रुपये पर विदेशी निवेशकों की नजर रहेगी
  • बाजार दिशा: मौजूदा शेयरों में लगातार खरीदारी तेजी के लिए जरूरी हो सकती है

छूट और कमजोर रुपये का भी असर

QIP और बड़े शेयर सौदों में मिलने वाली छूट भी विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षण का कारण बन सकती है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे सौदों में कुछ कम कीमत पर शेयर मिलने से निवेशकों को सुरक्षा का अतिरिक्त अंतर मिल सकता है। यह उस समय भी मदद कर सकता है जब डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमजोर हो रहा हो।

भारतीय कंपनियों में प्रमोटरों की हिस्सेदारी भी धीरे-धीरे घट रही है। जून 2014 में बड़े शेयरों में प्रमोटरों की औसत हिस्सेदारी 53.4 प्रतिशत थी, जो जून 2026 में घटकर 50.3 प्रतिशत रह गई। कई बड़ी, मध्यम और छोटी कंपनियों में भी प्रमोटरों ने अपनी हिस्सेदारी कम की है। इससे बाजार में शेयरों की आपूर्ति बढ़ रही है।

जानकारों का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार में बड़ी और टिकाऊ तेजी के लिए विदेशी निवेश का प्रवाह प्राथमिक बाजार में आने वाली नई शेयर आपूर्ति से काफी ज्यादा होना चाहिए। जब तक विदेशी निवेशक मौजूदा शेयरों में लगातार बड़ी खरीदारी नहीं करते और बिक्री का दबाव कम नहीं होता, तब तक सितंबर में बाजार के सीमित दायरे में रहने की संभावना बनी रह सकती है।

Frequently asked questions

1. विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में कितना पैसा लगाया है?

पिछले दो महीनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने करीब 50,000 करोड़ रुपये भारतीय शेयरों में लगाए हैं। हालांकि, इसका बड़ा हिस्सा मौजूदा शेयरों की बजाय नए शेयरों और बड़े सौदों में गया है, इसलिए प्रमुख सूचकांकों में सीमित बढ़त देखने को मिली है।

2. सितंबर में भारतीय शेयर बाजार सीमित दायरे में क्यों रह सकता है?

सितंबर में IPO, संस्थागत बिक्री और बड़े शेयर सौदों से नई शेयर आपूर्ति बढ़ सकती है। इससे विदेशी निवेशकों की नई रकम का बड़ा हिस्सा नए शेयरों को खरीदने में जा सकता है। मौजूदा शेयरों में कम खरीदारी होने पर बाजार की तेजी सीमित रह सकती है।

3. अगस्त में IPO और QIP से कंपनियों ने कितनी रकम जुटाई?

अगस्त में कंपनियों ने IPO के जरिए 22,406 करोड़ रुपये और QIP के जरिए 5,450 करोड़ रुपये जुटाए। दोनों माध्यमों से कुल करीब 29,361 करोड़ रुपये जुटाए गए। इससे बाजार में नए शेयरों की आपूर्ति और निवेश के अवसर दोनों बढ़े।

4. विदेशी निवेशक भारत के शेयर बाजार में किन अवसरों को पसंद कर रहे हैं?

विदेशी निवेशक खास शेयरों, नए शेयरों और बड़े सौदों को प्राथमिकता दे रहे हैं। कुछ कंपनियों के शुरुआती निवेशकों की रोक अवधि खत्म होने के बाद उपलब्ध हुए शेयरों में भी खरीदारी के अवसर मिले हैं। इससे चुनिंदा कंपनियों में निवेश रुचि बनी हुई है।

5. भारतीय शेयर बाजार में बड़ी तेजी के लिए क्या जरूरी है?

बड़ी और टिकाऊ तेजी के लिए विदेशी निवेश का प्रवाह नई शेयर आपूर्ति से काफी ज्यादा होना जरूरी माना जा रहा है। इसके साथ मौजूदा शेयरों में लगातार खरीदारी और बिक्री दबाव में कमी भी जरूरी है।

निष्कर्ष

विदेशी निवेशकों की वापसी भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है, लेकिन नई शेयर आपूर्ति और बड़े सौदों के कारण इसका असर सीमित रह सकता है। मौजूदा शेयरों में मजबूत खरीदारी बढ़ने पर ही बाजार में टिकाऊ तेजी का रास्ता साफ होगा।

Disclaimer: यह जानकारी केवल सामान्य जानकारी के लिए है और निवेश निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित है।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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