आज टाटा मोटर्स भारत की बड़ी कार कंपनियों में शामिल है और अपनी मजबूत व सुरक्षित कारों के लिए जानी जाती है। लेकिन कंपनी के लंबे इतिहास में कई ऐसी खास कारें भी रही हैं, जिन्हें लोगों ने समय के साथ भुला दिया। टाटा मोटर्स ने अलग-अलग समय पर कई अनोखे कॉन्सेप्ट मॉडल तैयार किए थे। इनमें कुछ छोटी शहरों में चलने वाली कारों के विचार पर आधारित थे, जबकि कुछ स्पोर्ट्स कार, एसयूवी और पिकअप जैसे अलग-अलग रूपों में पेश किए गए थे।
टाटा मोटर्स के भूले-बिसरे कॉन्सेप्ट मॉडल
टाटा जिंग एक ऐसी छोटी कार थी, जिस पर कंपनी ने नैनो से काफी पहले काम शुरू किया था। इसे टाटा इंडिका के साथ विकसित किया गया था। उस समय कंपनी का लक्ष्य ऐसी कार तैयार करना था, जिसे आम भारतीय परिवार आसानी से खरीद सके। जिंग को छोटी और किफायती शहर की कार के रूप में तैयार किया गया था और इसके डिजाइन पर फॉक्सवैगन बीटल का प्रभाव भी बताया गया था।
इस कार की खास बात पीछे लगा दो सिलेंडर वाला इंजन था। इससे कार के आगे के हिस्से को छोटा रखने और अंदर यात्रियों के लिए ज्यादा जगह बनाने में मदद मिलती। टाटा ने इसके विकास के दौरान बॉश के साथ भी काम किया था। कार में चार दरवाजे थे और डिजाइन को हल्का रखने के लिए पीछे सामान्य हैच नहीं दिया गया था। कम ईंधन खर्च करना भी इसके विकास का अहम उद्देश्य था। हालांकि, बाद में कंपनी ने गुणवत्ता और सुरक्षा से समझौता न करने के कारण इस परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया। फिर भी जिंग ने आगे चलकर सस्ती कार बनाने की टाटा की सोच को दिशा दी, जिसका नतीजा बाद में नैनो के रूप में सामने आया।
टाटा जिंग से नैनो तक का सफर
🚗 टाटा के खास कॉन्सेप्ट मॉडल
- टाटा जिंग: छोटी और किफायती शहर की कार
- अरिआ रोडस्टर: दो सीटों वाली खुली छत की कार
- टाटा एक्सओवर: सात सीटों वाली क्रॉसओवर एसयूवी
- क्लिफराइडर: सेडान, एसयूवी और पिकअप का मिश्रण
- टाटा रेसमो: दो सीटों वाली स्पोर्ट्स कार
साल 2000 में टाटा मोटर्स ने जिनेवा मोटर शो में अरिया रोडस्टर पेश कर लोगों को चौंका दिया था। यह दो सीटों वाली खुली छत की कार थी और कंपनी की सामान्य पारिवारिक कारों से बिल्कुल अलग दिखाई देती थी। इसे टाटा इंडिका के आधार पर तैयार किया गया था और इसकी लंबाई करीब 3.7 मीटर थी। इसमें 140 हॉर्सपावर वाला पेट्रोल इंजन लगाने की योजना थी, जो आगे के पहियों को ताकत देता। इसका बाहरी डिजाइन इटली के आई.डी.ई.ए. संस्थान ने तैयार किया था।
अरिया रोडस्टर में मुड़कर खुलने वाली छत दी गई थी, जिसे बिजली और हाइड्रोलिक व्यवस्था की मदद से चलाया जाना था। कंपनी ने इसे कुछ वर्षों के भीतर उत्पादन में लाने की योजना भी बनाई थी, लेकिन यह योजना पूरी नहीं हो सकी। इसी दौरान टाटा ने अरिया कूपे भी पेश की थी। इसमें खुली छत के बजाय स्थायी छत थी और इसका डिजाइन अधिक स्पोर्टी रखा गया था। इसमें 1.6 से 2.0 लीटर तक के पेट्रोल इंजन लगाने की योजना थी।
अरिआ रोडस्टर और अरिआ कूपे
टाटा एक्सओवर कंपनी का एक और महत्वपूर्ण कॉन्सेप्ट था। इसे 2005 में जिनेवा मोटर शो में पेश किया गया था। यह सात सीटों वाली क्रॉसओवर एसयूवी थी और इसे खास तौर पर यूरोप के बाजार को ध्यान में रखकर बनाया गया था। इसकी लंबाई करीब 4.85 मीटर थी। इसके इंजीनियरिंग काम में लंदन स्थित टाटा मोटर्स यूरोपियन टेक्निकल सेंटर की भूमिका थी, जबकि बाहरी डिजाइन आई.डी.ई.ए. संस्थान ने तैयार किया था। बाद में इसी कॉन्सेप्ट को आगे बढ़ाकर उत्पादन वाली टाटा अरिया तैयार की गई, जिसे 2010 में ऑटो एक्सपो में पेश किया गया।
2006 के जिनेवा मोटर शो में टाटा ने क्लिफराइडर नाम का एक अनोखा मॉडल भी दिखाया था। कंपनी ने इसे ऐसी बहुउद्देश्यीय गाड़ी के रूप में पेश किया था, जिसमें सेडान, एसयूवी और पिकअप के गुण एक साथ थे। इसमें ऊंची बॉडी, पीछे की ओर खुलने वाले दरवाजे और सामान रखने के लिए अलग हिस्सा दिया गया था। इसमें साइकिल, स्की और दूसरे बड़े सामान को रखने की सुविधा थी। डीजल और पेट्रोल इंजन के साथ दो और चार पहिया ड्राइव विकल्पों की भी योजना थी। एयरबैग, एबीएस, ट्रैक्शन कंट्रोल और नेविगेशन जैसी सुविधाएं इसे अपने समय से काफी आगे बनाती थीं। लेकिन यह भी उत्पादन तक नहीं पहुंच सका।
🏎️ टाटा रेसमो की खासियत
- पेश किया गया: 2017
- सीटें: दो
- इंजन: 1.2 लीटर तीन सिलेंडर टर्बो पेट्रोल
- ताकत: 190 पीएस
- टॉर्क: 210 एनएम
- 0 से 100 किमी प्रति घंटा: करीब छह सेकंड
- इलेक्ट्रिक संस्करण: अनुमानित दूरी करीब 350 किलोमीटर
टाटा रेसमो की स्पोर्ट्स कार परियोजना
टाटा रेसमो कंपनी की सबसे महत्वाकांक्षी स्पोर्ट्स कार परियोजनाओं में से एक थी। इसे 2017 में पेश किया गया और 2018 में भारत में ऑटो एक्सपो के दौरान दिखाया गया। यह दो सीटों वाली पीछे इंजन वाली कार थी और इसमें बहुत अलग डिजाइन दिया गया था।
इसमें ऊपर की ओर खुलने वाले दरवाजे और स्पोर्टी डिजाइन शामिल थे। इसमें 1.2 लीटर का तीन सिलेंडर टर्बो पेट्रोल इंजन था, जो 190 पीएस की ताकत और 210 एनएम का टॉर्क देता था। कंपनी के अनुसार, यह कार करीब छह सेकंड में 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकती थी।
टाटा ने इसका इलेक्ट्रिक संस्करण भी दिखाया था, जिसकी अनुमानित दूरी करीब 350 किलोमीटर बताई गई थी। कंपनी की इसे भारत में लाने की योजना थी, लेकिन उत्पादन लागत ज्यादा होने के कारण परियोजना को बाद में रोक दिया गया। इस तरह टाटा मोटर्स के कई कॉन्सेप्ट मॉडल अपने समय में बेहद अलग और आधुनिक विचार लेकर आए, लेकिन उनमें से कुछ ही आगे चलकर वास्तविक कारों का रूप ले पाए।
अस्वीकरण: यह जानकारी केवल समाचार और जानकारी के उद्देश्य से है, वाहन खरीदने से पहले आधिकारिक जानकारी जरूर जांचें।

