ब्रिटेन में किशोरों के लिए रात में सोशल मीडिया पर लगेगी रोक

ब्रिटेन सरकार ने 16 और 17 साल के किशोरों के लिए रात के समय सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाने की योजना बनाई है। सरकार का उद्देश्य युवाओं पर ज्यादा समय तक सोशल मीडिया इस्तेमाल करने से पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को कम करना है। इसके तहत सोशल मीडिया कंपनियों को ऐसे फीचर्स को डिफॉल्ट रूप से बंद करने के लिए कहा जाएगा, जो लोगों को लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखते हैं। इनमें ऑटो-प्ले वीडियो और लगातार चलने वाली कंटेंट फीड जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

ब्रिटेन में किशोरों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर नई योजना

हालांकि, कुछ लोगों ने इस योजना की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अगर यूजर्स चाहें तो वे इन डिफॉल्ट सेटिंग्स को खुद बदल सकते हैं, जिससे नियमों का असर कम हो सकता है।

यह कदम ब्रिटेन सरकार के उस फैसले के बाद आया है, जिसमें 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की योजना बनाई गई थी। यह नियम अगले साल से लागू होने की उम्मीद है और इसमें स्नैपचैट, टिकटॉक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स जैसे बड़े प्लेटफॉर्म शामिल होंगे। हालांकि, व्हाट्सऐप और सिग्नल जैसे मैसेजिंग ऐप को इससे बाहर रखा जाएगा।

ब्रिटेन सरकार की इस नई योजना को लागू करने के लिए संसद की मंजूरी जरूरी होगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के बाद एंडी बर्नहम सत्ता में आते हैं, तो वह भी इन योजनाओं को आगे बढ़ा सकते हैं।

📱 ब्रिटेन सोशल मीडिया कर्फ्यू योजना की मुख्य बातें

  • लक्षित उम्र: 16 और 17 साल के किशोर
  • समय: रात के समय सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक
  • उद्देश्य: ज्यादा स्क्रीन टाइम के नकारात्मक प्रभाव कम करना
  • बदलाव: ऑटो-प्ले वीडियो और कंटेंट फीड फीचर डिफॉल्ट बंद
  • शामिल प्लेटफॉर्म: स्नैपचैट, टिकटॉक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स
  • बाहर रखे गए ऐप: व्हाट्सऐप और सिग्नल

सरकार ने योजना के समर्थन में क्या तर्क दिए?

ब्रिटेन के ऑनलाइन सेफ्टी मंत्री कनिष्क नारायण ने उन चिंताओं को खारिज किया कि किशोर इन प्रतिबंधों को आसानी से बंद कर देंगे। उन्होंने कहा कि यह युवाओं की अच्छी डिजिटल आदतें अपनाने की क्षमता को कम आंकना होगा।

उन्होंने एक पायलट कार्यक्रम का उदाहरण दिया, जिसमें ब्रिटेन के 300 से ज्यादा किशोरों और उनके माता-पिता ने हिस्सा लिया था। इस परीक्षण में पाया गया कि रात के समय सोशल मीडिया का इस्तेमाल काफी कम हुआ और लोगों की नींद तथा ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में सुधार देखा गया।

बच्चों की सुरक्षा के लिए काम करने वाली संस्था नेशनल सोसाइटी फॉर द प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू चिल्ड्रन (NSPCC) ने भी इस पहल का स्वागत किया है। संस्था ने कहा कि यह कदम बच्चों के लिए सोशल मीडिया को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक अच्छा प्रयास है। हालांकि, संस्था का मानना है कि केवल इन उपायों से ऑनलाइन नुकसान को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता।

🛡️ बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर चिंता

  • NSPCC की राय: सोशल मीडिया को बच्चों के लिए सुरक्षित बनाने की जरूरत
  • मुख्य चिंता: ज्यादा स्क्रीन टाइम और लगातार इस्तेमाल की आदत
  • डिजाइन बदलाव: प्लेटफॉर्म फीचर में सुधार की मांग
  • पायलट परिणाम: नींद और ध्यान केंद्रित करने में सुधार
  • लक्ष्य: सुरक्षित डिजिटल आदतों को बढ़ावा देना
  • चुनौती: ऑनलाइन नुकसान को पूरी तरह खत्म करना आसान नहीं

विशेषज्ञ और संस्थाओं की क्या राय है?

NSPCC के प्रमुख क्रिस शेरवुड ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के डिजाइन में ऐसे बदलाव की जरूरत है, जो ज्यादा स्क्रीन टाइम और लगातार इस्तेमाल की आदत को बढ़ावा देते हैं।

ब्रिटेन की टेक्नोलॉजी सचिव लिज केंडल ने पहले कहा था कि ये कदम युवाओं को बेहतर नींद लेने, पढ़ाई पर ध्यान देने और परिवार व दोस्तों के साथ ज्यादा समय बिताने में मदद करेंगे। उनका कहना है कि सरकार चाहती है कि युवा तकनीक के फायदे उठाएं, लेकिन उनके पास ऑनलाइन दुनिया को सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल करने के लिए जरूरी साधन भी हों।

इंग्लैंड की चिल्ड्रेन कमिश्नर रेचल डी सूजा ने भी इस पहल का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि कई किशोर सोशल मीडिया पर बिताया जाने वाला समय कम करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें इसके लिए अतिरिक्त मदद की जरूरत होती है। उन्होंने यह भी कहा कि वह इस बात पर नजर रखेंगी कि सोशल मीडिया कर्फ्यू जैसी योजनाएं वास्तव में कितनी प्रभावी साबित होती हैं।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सार्वजनिक रिपोर्टों पर आधारित है। नीतियों में बदलाव संभव है।

Gourav Kumar Singh

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