US Stock Market: ईरान तनाव और Oil Price का असर

अमेरिकी शेयर बाजार में पिछले तीन सप्ताह से जारी तेजी के बाद सोमवार को कारोबार से पहले बाजार का रुख मिला-जुला रहा। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े घटनाक्रम के कारण कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती बनी हुई है। इससे निवेशकों की चिंता बढ़ी है, क्योंकि तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी महंगाई और कंपनियों की लागत पर असर डाल सकती है।

अमेरिकी शेयर बाजार में तेजी के बीच बढ़ी तेल की चिंता

एसएंडपी 500 से जुड़े वायदा कारोबार में करीब 0.1 प्रतिशत की बढ़त दिखाई दी, जबकि नैस्डैक 100 के वायदा में लगभग 0.5 प्रतिशत की तेजी रही। दूसरी ओर डॉव जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज के वायदा में 88 अंक यानी करीब 0.2 प्रतिशत की गिरावट रही। बाजार खुलने से पहले अलीबाबा और इंटेल के शेयरों में करीब 1.5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। सोफी टेक्नोलॉजीज के शेयर में भी लगभग 2 प्रतिशत की तेजी देखी गई।

अमेरिका के तीनों प्रमुख शेयर सूचकांकों में लगातार तीन सप्ताह तक बढ़त रही है। इस दौरान एसएंडपी 500 ने नया रिकॉर्ड स्तर भी बनाया। कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजों ने निवेशकों के भरोसे को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई। बड़ी तकनीकी कंपनियों के बेहतर नतीजों से बाजार में महंगे मूल्यांकन को लेकर बनी चिंता कुछ कम हुई और निवेशकों का रुझान कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी कंपनियों की तरफ फिर बढ़ा।

ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की नजर फेड पर

पिछले सप्ताह आए महंगाई के अपेक्षाकृत शांत आंकड़ों और उम्मीद से कमजोर खुदरा बिक्री ने भी बाजार को राहत दी। इन आंकड़ों के बाद निवेशकों को अब निकट भविष्य में अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ओर से ब्याज दर बढ़ाने की संभावना पहले के मुकाबले कम लग रही है। सितंबर में ब्याज दरों को मौजूदा स्तर पर बनाए रखने की संभावना करीब 67 प्रतिशत मानी जा रही है, जबकि एक महीने पहले यह अनुमान 50 प्रतिशत से भी कम था।

अब निवेशकों की नजर केंद्रीय बैंक की बैठक के विवरण और जैक्सन होल में होने वाले आर्थिक सम्मेलन के दौरान फेड प्रमुख के भाषण पर है। इनसे ब्याज दरों की अगली दिशा को लेकर संकेत मिलने की उम्मीद है। अगर केंद्रीय बैंक की ओर से ब्याज दरों में जल्द बढ़ोतरी नहीं करने के संकेत मिलते हैं, तो शेयर बाजार को इससे सहारा मिल सकता है। वहीं महंगाई और तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी बाजार के लिए नई चिंता पैदा कर सकती है।

📈 अमेरिकी बाजार की मौजूदा स्थिति

  • एसएंडपी 500 वायदा: करीब 0.1 प्रतिशत बढ़त
  • नैस्डैक 100 वायदा: करीब 0.5 प्रतिशत बढ़त
  • डॉव जोंस वायदा: करीब 0.2 प्रतिशत गिरावट
  • बाजार की तेजी: लगातार तीन सप्ताह
  • मुख्य चिंता: महंगाई, तेल की कीमतें और मध्य पूर्व तनाव

मध्य पूर्व तनाव से बढ़ी बाजार की चिंता

बाजार में फिलहाल सबसे बड़ी चिंता मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को लेकर है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में कोई स्पष्ट प्रगति नहीं हुई है। इसी बीच लेबनान में फिर से हिंसा बढ़ने और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमलों की खबरों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। इस वजह से निवेशक आगे की स्थिति को लेकर सतर्क हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया के कुल कारोबार वाले तेल का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता था। ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमले के बाद इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। अगर यहां लंबे समय तक रुकावट बनी रहती है, तो दुनिया के कई देशों में तेल की आपूर्ति और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पर नजर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान के जहाजों की आवाजाही पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा है कि ईरान पर दबाव बनाने के लिए समुद्री रास्तों को लेकर कार्रवाई जारी रखी जाएगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि संघर्ष को खत्म करने की कोई जल्दबाजी नहीं है। इससे निवेशकों को अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जल्दी कम होने की उम्मीद कम हुई है।

दूसरी तरफ ईरान की ओर से कहा गया है कि वह ओमान के साथ जहाजों की आवाजाही को लेकर एक संयुक्त बयान तैयार करने पर काम कर रहा है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच समझौते के लिए तय 60 दिन की बातचीत की अवधि समाप्त होने के करीब है। दोनों देशों के बीच अभी तक किसी बड़े समझौते की जानकारी सामने नहीं आई है।

🛢️ कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव

  • ब्रेंट कच्चा तेल: करीब 89 डॉलर प्रति बैरल
  • डब्ल्यूटीआई: करीब 83.21 डॉलर प्रति बैरल
  • पिछले सप्ताह ब्रेंट: लगभग 6 प्रतिशत बढ़त
  • इस साल ब्रेंट: 45 प्रतिशत से ज्यादा बढ़त
  • मुख्य कारण: मध्य पूर्व तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति

तेल की कीमतों में तेजी का असर

कच्चे तेल की कीमतों पर इन घटनाक्रमों का सीधा असर दिखाई दे रहा है। ब्रेंट कच्चा तेल करीब 89 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। पिछले सप्ताह इसमें लगभग 6 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई थी। वहीं डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल का भाव करीब 83.21 डॉलर प्रति बैरल रहा। इस साल ब्रेंट की कीमत अब तक 45 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ चुकी है।

लेबनान में भी कई महीनों के बाद सबसे घातक संघर्ष वाले दिनों में से एक देखने को मिला। इजरायल और ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के बीच बढ़ती हिंसा ने पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ा दिया है। इससे निवेशकों की चिंता सिर्फ अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष तक सीमित नहीं रही है, बल्कि पूरे मध्य पूर्व में स्थिति बिगड़ने की आशंका बढ़ गई है।

महंगा तेल बढ़ा सकता है महंगाई का दबाव

तेल की कीमतों में तेजी का असर दुनियाभर के बाजारों पर पड़ सकता है। कच्चा तेल महंगा होने से परिवहन, उत्पादन और कई अन्य क्षेत्रों की लागत बढ़ सकती है। इससे कंपनियों के मुनाफे पर दबाव आ सकता है और महंगाई बढ़ने का खतरा भी पैदा हो सकता है। ऐसी स्थिति में केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है।

अमेरिकी बाजार के लिए फिलहाल कंपनियों के मजबूत नतीजे सकारात्मक संकेत दे रहे हैं, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। निवेशक एक तरफ कंपनियों की कमाई और ब्याज दरों की दिशा पर नजर रख रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ तेल की कीमतों और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर भी लगातार निगरानी रख रहे हैं।

आने वाले दिनों में बाजार की दिशा

आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में कोई प्रगति होती है या नहीं, इसका असर बाजार पर पड़ सकता है। अगर तनाव कम होता है और तेल की आपूर्ति सामान्य रहती है, तो शेयर बाजार को राहत मिल सकती है। इसके विपरीत संघर्ष बढ़ने, समुद्री मार्ग में लंबे समय तक रुकावट रहने या तेल की कीमतों में और तेजी आने पर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।

निवेशकों के लिए मौजूदा स्थिति में सावधानी जरूरी है। केवल बाजार की हाल की तेजी देखकर निवेश का फैसला करना उचित नहीं होगा। ब्याज दरों, कंपनियों के नतीजों, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक घटनाओं को ध्यान में रखना जरूरी है। किसी भी निवेश से पहले अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार प्रमाणित वित्तीय विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहेगा।

Disclaimer: यह जानकारी केवल समाचार उद्देश्य के लिए है। इसे निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए और निवेश से पहले विशेषज्ञ की राय लें।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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