व्हाइट हाउस बॉलरूम पर बवाल! $500M का नो-बिड ठेका, ट्रंप प्रशासन पर उठे सवाल

व्हाइट हाउस के नए बॉलरूम प्रोजेक्ट को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि परियोजना का निर्माण अनुबंध बिना प्रतिस्पर्धी निविदा के दिया गया, जिससे सरकारी पारदर्शिता और सार्वजनिक खर्च को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

व्हाइट हाउस बॉलरूम प्रोजेक्ट पर विवाद: ट्रंप प्रशासन ने 500 मिलियन डॉलर का नो-बिड ठेका दिया, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल से जुड़ा व्हाइट हाउस के नए बॉलरूम निर्माण का मामला एक बार फिर चर्चा में है।

व्हाइट हाउस बॉलरूम प्रोजेक्ट पर बढ़ा विवाद

एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस परियोजना के लिए करीब 500 मिलियन डॉलर (लगभग 4,300 करोड़ रुपये) का निर्माण अनुबंध बिना प्रतिस्पर्धी निविदा (No-Bid Contract) के एक निजी कंपनी को सौंपा गया। इस खुलासे के बाद सरकारी पारदर्शिता और सार्वजनिक धन के उपयोग को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस के ईस्ट विंग में प्रस्तावित नए बॉलरूम के निर्माण का अनुबंध Executive Residence कार्यालय के माध्यम से जारी किया गया। यह कार्यालय राष्ट्रपति कार्यालय (Executive Office of the President) का हिस्सा है और इसे सामान्य संघीय खरीद प्रक्रिया (Federal Procurement Rules) से कुछ कानूनी छूट प्राप्त है। इसी वजह से इस अनुबंध के लिए सामान्य प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया अपनाने की आवश्यकता नहीं पड़ी।

🏛️ व्हाइट हाउस बॉलरूम प्रोजेक्ट: प्रमुख तथ्य

  • परियोजना: व्हाइट हाउस नया बॉलरूम
  • अनुमानित अनुबंध: 500 मिलियन डॉलर
  • स्थान: व्हाइट हाउस ईस्ट विंग
  • विवाद: No-Bid Contract
  • निर्माण कंपनी: Clark Construction
  • मुख्य मुद्दा: पारदर्शिता और खरीद प्रक्रिया

नो-बिड कॉन्ट्रैक्ट पर क्यों उठे सवाल

बताया गया है कि यह परियोजना व्हाइट हाउस परिसर के बड़े पुनर्विकास कार्यक्रम का हिस्सा है। इसके तहत ईस्ट विंग के अलावा वॉशिंगटन डीसी के कुछ अन्य प्रमुख सार्वजनिक स्थलों के विकास और सौंदर्यीकरण की योजनाओं पर भी काम किया जा रहा है।

दस्तावेजों के आधार पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, निर्माण कंपनी Clark Construction को यह अनुबंध दिया गया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि परियोजना की लागत तय करने की प्रक्रिया में डोनाल्ड ट्रंप स्वयं भी शामिल थे। हालांकि व्हाइट हाउस की ओर से कहा गया है कि सभी प्रक्रियाएं कानून के दायरे में रहकर पूरी की गई हैं।

इस परियोजना की अनुमानित लागत समय के साथ काफी बढ़ गई है। शुरुआती अनुमान लगभग 200 मिलियन डॉलर का था, लेकिन बाद में यह बढ़कर 600 मिलियन डॉलर तक पहुंचने की बात सामने आई। इससे यह आशंका भी जताई जा रही है कि परियोजना की वास्तविक लागत का बड़ा हिस्सा अंततः अमेरिकी करदाताओं पर पड़ सकता है।

📋 परियोजना से जुड़े प्रमुख विवाद

  • शुरुआती अनुमान: 200 मिलियन डॉलर
  • बाद का अनुमान: 600 मिलियन डॉलर तक
  • लागत चिंता: करदाताओं पर संभावित बोझ
  • सब-कॉन्ट्रैक्ट: कुछ अनुबंध भी बिना प्रतिस्पर्धी निविदा
  • कानूनी मामला: संघीय अदालत में विवाद
  • प्रमुख मुद्दा: पारदर्शिता बनाम कानूनी प्रक्रिया

लागत और निजी दान को लेकर दावे

डोनाल्ड ट्रंप पहले कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि बॉलरूम का निर्माण मुख्य रूप से निजी दान (Private Donations) से कराया जाएगा। उन्होंने यह भी दावा किया था कि निर्माण कंपनी इस परियोजना को बिना किसी शुल्क के पूरा करने के लिए तैयार है। हालांकि रिपोर्ट में शामिल दस्तावेज इस दावे से अलग तस्वीर पेश करते हैं।

दस्तावेजों के अनुसार, निर्माण कंपनी को शुरुआती चरण में लगभग 3 प्रतिशत लाभ मार्जिन दिया गया है, जिसे विशेषज्ञ बड़े सरकारी निर्माण कार्यों के लिए सामान्य मानते हैं। वहीं एक आंतरिक अनुमान में कंपनी को पूरे प्रोजेक्ट से करीब 65 मिलियन डॉलर तक लाभ, ओवरहेड खर्च और अन्य शुल्क मिलने की संभावना जताई गई है।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि परियोजना से जुड़े कुछ सब-कॉन्ट्रैक्ट भी बिना प्रतिस्पर्धी निविदा के दिए गए, जिससे पारदर्शिता को लेकर और सवाल खड़े हुए हैं।

कानूनी विवाद और प्रशासन का पक्ष

इस बीच परियोजना कानूनी विवादों में भी घिर चुकी है। इसी वर्ष एक संघीय अदालत ने कहा था कि व्हाइट हाउस परिसर में बड़े संरचनात्मक बदलाव, जैसे ईस्ट विंग को हटाकर नया बॉलरूम बनाना, अतिरिक्त कानूनी मंजूरी के बिना नहीं किया जा सकता। हालांकि प्रशासन ने इस फैसले को चुनौती देते हुए अपील दायर कर दी है।

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने सफाई देते हुए कहा कि परियोजना का अनुबंध Executive Residence कार्यालय के माध्यम से इसलिए जारी किया गया क्योंकि भविष्य में इसी कार्यालय को नई सुविधा के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी निभानी होगी। अधिकारी का कहना है कि सभी अनुबंध लागू कानूनों के अनुरूप ही किए गए हैं।

इस खुलासे के बाद अमेरिका में सरकारी परियोजनाओं में पारदर्शिता, सार्वजनिक खर्च और खरीद प्रक्रिया को लेकर बहस तेज हो गई है। आने वाले समय में अदालत के फैसले और प्रशासन की आगे की कार्रवाई इस बहुचर्चित परियोजना की दिशा तय कर सकती है।

Disclaimer: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिपोर्टों और आधिकारिक बयानों पर आधारित है। मामले में आगे कानूनी और प्रशासनिक बदलाव संभव हैं।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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