AI से रोजगार चिंता पर Rajiv Kumar ने युवाओं को दी सलाह

नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल से भारतीय युवाओं के बीच रोजगार को लेकर चिंता बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि युवाओं और नीति बनाने वालों के बीच लगातार बातचीत की जरूरत है, ताकि भविष्य की नौकरियों को लेकर भरोसा बनाया जा सके।

AI से रोजगार को लेकर युवाओं की चिंता बढ़ी: राजीव कुमार

राजीव कुमार ने एक इंटरव्यू में कहा कि देश के युवा आज भविष्य के रोजगार और अपनी क्षमता को लेकर स्पष्ट नहीं हैं। AI के कारण नौकरी मिलने और रोजगार के नए अवसरों को लेकर डर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि युवाओं की परेशानियों को समझने के लिए सरकार और युवाओं के बीच संवाद जरूरी है।

उन्होंने बताया कि हालिया पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में 15 से 29 वर्ष के युवाओं की बेरोजगारी दर करीब 20 प्रतिशत रही है। जून 2026 के आंकड़ों में 15-29 आयु वर्ग की महिलाओं में बेरोजगारी दर 20.7 प्रतिशत और पुरुषों में 14.6 प्रतिशत दर्ज की गई।

युवाओं को भविष्य के रोजगार को लेकर भरोसा देने की जरूरत

राजीव कुमार ने कहा कि युवाओं की चिंताओं को दूर करने के लिए इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि जैसे विशेषज्ञों को भी युवाओं से बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं को यह भरोसा दिलाना जरूरी है कि उनका भविष्य बेहतर हो सकता है।

उन्होंने भारत को 2047 तक ऊपरी-मध्यम आय वाला देश बनाने के लक्ष्य पर भी बात की। राजीव कुमार के अनुसार, भारत को अपनी अर्थव्यवस्था को तेजी से बढ़ाने के लिए 8 प्रतिशत से अधिक की विकास दर हासिल करनी होगी। उन्होंने कहा कि लक्ष्य दोहरे अंक की विकास दर का होना चाहिए।

🤖 AI और रोजगार से जुड़ी मुख्य बातें

  • मुख्य चिंता: AI के कारण नौकरियों को लेकर बढ़ता डर
  • युवा बेरोजगारी: 15-29 आयु वर्ग में करीब 20 प्रतिशत
  • महिला बेरोजगारी: 20.7 प्रतिशत
  • पुरुष बेरोजगारी: 14.6 प्रतिशत
  • जरूरत: सरकार और युवाओं के बीच संवाद

उन्होंने बताया कि कई राज्यों ने पिछले कुछ वर्षों में तेज आर्थिक विकास दिखाया है और इसी मॉडल को दूसरे राज्यों में भी लागू करने की जरूरत है। उनके अनुसार, भारत को हर राज्य की जरूरत और क्षमता के हिसाब से अलग विकास रणनीति बनानी चाहिए।

राजीव कुमार ने कहा कि भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करना ही देश की सबसे अच्छी विदेश नीति साबित हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को अपनी manufacturing क्षमता बढ़ाने और दुनिया के बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने पर ध्यान देना होगा।

भारत को manufacturing और export बढ़ाने पर देना होगा ध्यान

उन्होंने बताया कि पिछले कई वर्षों से भारत का वैश्विक निर्यात में हिस्सा 2 प्रतिशत से भी कम रहा है। इसका एक कारण यह है कि देश का manufacturing sector अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पाया। उन्होंने कहा कि भारत को केवल घरेलू बाजार पर निर्भर रहने के बजाय वैश्विक बाजार को ध्यान में रखकर उत्पादन बढ़ाना चाहिए।

उन्होंने राज्य आधारित export policy की जरूरत पर जोर दिया। राजीव कुमार ने कहा कि पूरे देश के लिए एक जैसी नीति प्रभावी नहीं हो सकती, क्योंकि हर राज्य की क्षमता और संसाधन अलग-अलग हैं। इसलिए राज्यों को अपनी जरूरत के अनुसार निर्यात बढ़ाने की योजना बनानी चाहिए।

📈 भारत की आर्थिक विकास रणनीति

  • लक्ष्य: 2047 तक ऊपरी-मध्यम आय वाला देश बनना
  • विकास दर: 8 प्रतिशत से अधिक वृद्धि की जरूरत
  • फोकस: Manufacturing और Export बढ़ाना
  • नीति: राज्य आधारित Export Policy
  • रोजगार: उत्पादन क्षमता बढ़ाकर नए अवसर तैयार करना

उनके अनुसार, रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए उत्पादन क्षमता बढ़ाना जरूरी है। अगर भारत अपनी manufacturing क्षमता को मजबूत करता है तो इससे युवाओं के लिए अधिक रोजगार के अवसर तैयार हो सकते हैं।

Disclaimer: यह जानकारी समाचार रिपोर्टों पर आधारित है, आधिकारिक आंकड़ों के लिए संबंधित स्रोत देखें।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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