ऑस्ट्रेलिया अमेरिका की बेहद गोपनीय नई हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल AIM-260 हासिल करने वाला अमेरिका के बाहर पहला देश बनने जा रहा है। ऑस्ट्रेलियाई सरकार इस मिसाइल की खरीद के लिए करीब 736 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर यानी लगभग 480 मिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च करेगी। यह खरीद अमेरिकी विदेशी सैन्य बिक्री कार्यक्रम के तहत की जाएगी।
ऑस्ट्रेलिया खरीदेगा AIM-260 मिसाइल
इस मिसाइल को ऑस्ट्रेलिया की वायुसेना की लंबी दूरी की हवाई युद्ध क्षमता को मजबूत करने के लिए शामिल किया जा रहा है। इसकी खरीद ऐसे समय में हो रही है, जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में कई देशों की वायुसेनाएं अपनी लंबी दूरी की हथियार प्रणालियों को तेजी से आधुनिक बना रही हैं।
ऑस्ट्रेलिया में इस मिसाइल को पहले F/A-18F लड़ाकू विमानों में शामिल किया जाएगा। इसके बाद इसे F-35A लड़ाकू विमानों और EA-18G इलेक्ट्रॉनिक युद्धक विमानों के साथ भी इस्तेमाल करने की योजना है। इससे ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख लड़ाकू विमानों को ज्यादा दूरी से हवाई लक्ष्यों पर हमला करने की क्षमता मिलने की उम्मीद है।
🚀 AIM-260 को लेकर ऑस्ट्रेलिया की योजना
- खरीद की कीमत: करीब 736 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर
- पहला उपयोग: F/A-18F लड़ाकू विमान
- बाद में उपयोग: F-35A और EA-18G विमान
- संभावित भविष्य: MQ-28 घोस्ट बैट मानवरहित लड़ाकू विमान
- मुख्य उद्देश्य: लंबी दूरी की हवाई युद्ध क्षमता मजबूत करना
MQ-28 घोस्ट बैट में भी इस्तेमाल की संभावना
भविष्य में ऑस्ट्रेलिया अपने देश में विकसित MQ-28 घोस्ट बैट मानवरहित लड़ाकू विमान में भी इस मिसाइल को शामिल कर सकता है। यह विमान आधुनिक हवाई हथियारों के इस्तेमाल की क्षमता पहले ही प्रदर्शित कर चुका है। इसलिए आने वाले समय में इसे भी इस नई हथियार प्रणाली का हिस्सा बनाए जाने की संभावना है।
AIM-260 को अमेरिका की मौजूदा AIM-120 मिसाइल की जगह लेने के लिए विकसित किया जा रहा है। नई मिसाइल का आकार लगभग पुरानी मिसाइल के समान रखा गया है, जिससे लड़ाकू विमान अपने हथियार रखने की क्षमता में बड़ी कमी किए बिना इसे इस्तेमाल कर सकेंगे।
इस मिसाइल की वास्तविक क्षमता से जुड़ी ज्यादातर जानकारी अभी गोपनीय रखी गई है। हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पुरानी मिसाइल की तुलना में ज्यादा दूरी, अधिक गति और आधुनिक हवाई खतरों से निपटने की बेहतर क्षमता दे सकती है।
चीन की लंबी दूरी की मिसाइलों से बढ़ी चुनौती
AIM-260 के विकास के पीछे चीन की तेजी से बढ़ती लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को भी एक महत्वपूर्ण कारण माना जाता है। चीन की PL-15 जैसी मिसाइलों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में लंबी दूरी के हवाई युद्ध की रणनीति को बदल दिया है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया के लिए अपनी मिसाइल क्षमता को मजबूत करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
🛡️ ऑस्ट्रेलिया की रक्षा क्षमता पर असर
- हवाई क्षमता: लंबी दूरी से हवाई लक्ष्यों पर हमला करने की क्षमता
- तकनीकी बढ़त: आधुनिक हवाई खतरों से निपटने की बेहतर क्षमता
- अमेरिका से सहयोग: दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग और मजबूत होगा
- आधुनिकीकरण: लंबी दूरी के हमले और सटीक हथियारों पर जोर
- क्षेत्रीय असर: Indo-Pacific में ऑस्ट्रेलिया की हवाई युद्ध क्षमता मजबूत होने की संभावना
अमेरिका के साथ सैन्य सहयोग भी होगा मजबूत
ऑस्ट्रेलिया की यह खरीद केवल हथियारों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य अपनी वायुसेना को अधिक आधुनिक तकनीक से लैस करना और अमेरिका के साथ सैन्य सहयोग को मजबूत करना भी है। दोनों देशों की सेनाएं भविष्य में संयुक्त अभियानों के दौरान समान पीढ़ी की हथियार प्रणालियों का इस्तेमाल कर सकेंगी।
यह खरीद ऑस्ट्रेलिया की व्यापक रक्षा आधुनिकीकरण योजना का हिस्सा है। इस योजना में लंबी दूरी के हमले की क्षमता, हवाई रक्षा, सटीक निशाना लगाने वाले हथियार और मानवरहित लड़ाकू प्रणालियों को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
कितनी मिसाइलें खरीदी जाएंगी, अभी जानकारी नहीं
ऑस्ट्रेलियाई सरकार का मानना है कि नई मिसाइल उसकी वायुसेना को दुश्मन के विमानों का पता लगाने, उन्हें निशाना बनाने और उन्हें रोकने की क्षमता को मजबूत करेगी। हालांकि सरकार ने अभी यह नहीं बताया है कि कितनी मिसाइलें खरीदी जाएंगी और उनकी आपूर्ति कब शुरू होगी।
आपूर्ति शुरू होने के बाद ऑस्ट्रेलिया इस अत्याधुनिक मिसाइल का अमेरिका के बाहर पहला इस्तेमाल करने वाला देश बन जाएगा। यह कदम Indo-Pacific क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया की हवाई युद्ध क्षमता और अमेरिका के साथ उसके रक्षा सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।