ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर नया विवाद सामने आया है। ईरान की ओर से संकेत दिया गया है कि जलमार्ग को दोबारा खोलने के लिए होने वाली बातचीत में वह अमेरिकी युद्धपोतों के गुजरने पर रोक लगाने की मांग कर सकता है। इससे फारस की खाड़ी में लंबे समय से मौजूद अमेरिकी सैन्य भूमिका को लेकर फिर से सवाल उठने लगे हैं।
होर्मुज को लेकर ईरान की नई मांग
ईरान के कट्टरपंथी नेताओं का मानना है कि मौजूदा स्थिति का इस्तेमाल करके खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी को कम किया जा सकता है। हालांकि सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिका अपने युद्धपोतों को होर्मुज से भेजने का फैसला करता है तो ईरान के लिए उन्हें रोक पाना आसान नहीं होगा।
इस मामले में ओमान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। ईरान और ओमान के बीच जलमार्ग को दोबारा खोलने को लेकर बातचीत चल रही है। दूसरी ओर, अमेरिकी अधिकारियों ने साफ किया है कि वह ऐसे किसी समझौते को स्वीकार नहीं करेगा जिसमें ईरान जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाए या उनसे कोई शुल्क वसूले।
🌊 होर्मुज पर बातचीत की मुख्य बातें
- मध्यस्थ: ओमान बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है
- ईरान की मांग: अमेरिकी युद्धपोतों की आवाजाही पर रोक की मांग संभव
- अमेरिका का रुख: जहाजों की आवाजाही पर रोक या शुल्क स्वीकार नहीं
- प्रस्ताव: जहाजों के लिए अलग-अलग रास्ते तय करने की बात
- स्थिति: प्रस्ताव को ईरान के शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी अभी बाकी
प्रस्तावित समझौते में कुछ समय के लिए जहाजों के आने-जाने के लिए अलग-अलग रास्ते तय करने की बात सामने आई है। एक रास्ता ईरान की ओर और दूसरा ओमान की ओर रखा जा सकता है। हालांकि इस व्यवस्था को अभी ईरान के शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी मिलना बाकी है।
इजरायल से जुड़े जहाजों पर भी रोक की मांग
ईरान की ओर से यह भी मांग उठी है कि केवल अमेरिकी युद्धपोत ही नहीं, बल्कि इजरायल से जुड़े जहाजों को भी होर्मुज से गुजरने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। ईरान से जुड़े कुछ अधिकारियों की मांग है कि जिन देशों ने उसके खिलाफ कार्रवाई की है, उन्हें पहले नुकसान की भरपाई करनी होगी।
हालांकि मध्यस्थों का कहना है कि ईरान और ओमान के बीच प्रस्तावित समझौते में ऐसी सभी शर्तें शामिल नहीं हैं। इसके बावजूद इन मांगों को गंभीरता से लिया जा रहा है, क्योंकि इससे बातचीत में आगे बढ़ने में मुश्किल पैदा हुई है।
दुनिया के लिए क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज
स्ट्रेट ऑफ Hormuz दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। दुनिया के कुल तेल कारोबार का करीब पांचवां हिस्सा सामान्य तौर पर इसी रास्ते से गुजरता है। इसके अलावा कतर से बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस भी इसी जलमार्ग के जरिए दुनिया के बाजारों तक पहुंचती है। इसलिए यहां लंबे समय तक रुकावट आने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर पड़ सकता है।
⛽ होर्मुज बंद होने का संभावित असर
- तेल आपूर्ति: वैश्विक तेल कारोबार पर बड़ा असर पड़ सकता है
- प्राकृतिक गैस: कतर की गैस आपूर्ति प्रभावित हो सकती है
- खाड़ी देश: ऊर्जा निर्यात और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है
- कीमतें: तेल और गैस की कीमतों में तेजी संभव
- महंगाई: ऊर्जा आपूर्ति में रुकावट से महंगाई का दबाव बढ़ सकता है
खाड़ी देशों के लिए भी यह जलमार्ग आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। संयुक्त अरब अमीरात, कतर और दूसरे तेल एवं गैस निर्यातक देशों की अर्थव्यवस्था समुद्री रास्तों से होने वाले ऊर्जा कारोबार पर काफी निर्भर है। इसी वजह से वे युद्ध से परेशान होने के बावजूद ऐसा समझौता चाहते हैं जिससे ऊर्जा की आवाजाही दोबारा शुरू हो सके।
खाड़ी में अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी
दूसरी ओर, अमेरिका की Navy की खाड़ी क्षेत्र में मौजूदगी कई दशकों पुरानी है। बहरीन में अमेरिकी नौसेना का महत्वपूर्ण ठिकाना है और यहां से क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। हाल के संघर्ष के कारण अमेरिका ने अपनी कुछ सैन्य गतिविधियों और तैनाती में बदलाव भी किया है।
ईरान पहले ही होर्मुज पर अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर चुका है। उसने जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए एक अलग सरकारी संस्था भी बनाई है और कुछ जहाज मालिकों से पंजीकरण कराने की मांग की है। अमेरिका ने इस संस्था पर प्रतिबंध भी लगाए हैं।
होर्मुज पर नियंत्रण बढ़ने से क्या असर होगा
अगर ईरान को जलमार्ग पर लंबे समय तक अधिक नियंत्रण मिलता है तो इसका असर तेल, गैस और समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है। दुनिया के कई देशों के लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि ऊर्जा की कीमतों में तेजी और आपूर्ति में रुकावट से महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।
खाड़ी देशों ने अब होर्मुज के विकल्प तलाशने भी शुरू कर दिए हैं। कुछ देश लाल सागर और ओमान की खाड़ी तक जाने वाली पाइपलाइनों को बढ़ाने तथा विदेशों में तेल भंडारण की क्षमता बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि स्थायी समाधान के लिए क्षेत्र में मजबूत और भरोसेमंद शांति समझौता जरूरी होगा।
बातचीत से तय होगी आगे की दिशा
मौजूदा स्थिति में ईरान अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, जबकि US और खाड़ी देश जलमार्ग को बिना रुकावट खुला रखने पर जोर दे रहे हैं। आने वाले समय में दोनों पक्षों के बीच होने वाली बातचीत यह तय करेगी कि होर्मुज से समुद्री आवाजाही किस व्यवस्था के तहत फिर से सामान्य हो पाती है।