इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि निजी संपत्ति से जुड़े दीवानी विवादों का समाधान करना पुलिस का काम नहीं है। अदालत ने कहा कि पुलिस केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने और शांति भंग होने से रोकने के लिए हस्तक्षेप कर सकती है। किसी जमीन या मकान के मालिकाना हक, कब्जे या सीमा से जुड़े विवाद का फैसला केवल सक्षम Court ही कर सकती है।
संपत्ति विवाद में पुलिस की भूमिका पर हाई कोर्ट की टिप्पणी
फैसले की प्रमुख बातें
- मुख्य मुद्दा: निजी संपत्ति विवाद
- हाई कोर्ट की टिप्पणी: फैसला केवल Court करेगी
- पुलिस की भूमिका: कानून-व्यवस्था बनाए रखना
- विवाद: मालिकाना हक और कब्जा
- निर्देश: किसी पक्ष का समर्थन नहीं
- फोकस: कानूनी प्रक्रिया का पालन
यह टिप्पणी एक 85 वर्षीय महिला की याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई। महिला ने आरोप लगाया था कि पारिवारिक संपत्ति विवाद में पुलिस उन्हें परेशान कर रही है और दूसरे पक्ष का साथ दे रही है। उन्होंने हाई कोर्ट से अपने कब्जे की सुरक्षा के लिए आदेश जारी करने की मांग की थी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि इसी संपत्ति को लेकर पहले से ही एक दीवानी मामला संबंधित अदालत में लंबित है। ऐसे में मालिकाना हक और कब्जे जैसे मुद्दों का फैसला रिट याचिका के जरिए नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि इन मामलों का निपटारा केवल दीवानी अदालत में ही होना चाहिए।
दीवानी मामलों में पुलिस नहीं कर सकती फैसला
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि मामला पूरी तरह दीवानी प्रकृति का है, फिर भी पुलिस एक पक्ष का समर्थन कर रही है और निर्माण कार्य में बाधा पहुंचा रही है। इस पर अदालत ने दोहराया कि पुलिस या प्रशासनिक अधिकारी किसी एक पक्ष की मदद करके दूसरे पक्ष को संपत्ति से बेदखल नहीं कर सकते, जब तक किसी सक्षम अदालत का स्पष्ट आदेश न हो।
अदालत ने यह भी कहा कि संपत्ति के स्वामित्व, कब्जे, बंटवारे या सीमा से जुड़े विवाद निजी पक्षों के बीच के मामले होते हैं और इनका निर्णय केवल दीवानी अदालत ही कर सकती है। पुलिस की भूमिका केवल शांति बनाए रखने तक सीमित है ताकि कोई भी पक्ष कानून अपने हाथ में न ले।
अदालत के प्रमुख निर्देश
- Civil: विवाद का निपटारा दीवानी अदालत करेगी
- Police: केवल शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखे
- Property: कब्जे और स्वामित्व का फैसला अदालत करेगी
- BNSS: लागू कानूनी प्रावधानों का पालन
- प्रशासन: किसी पक्ष का समर्थन नहीं
- कार्रवाई: अधिकार सीमा से बाहर हस्तक्षेप पर जवाबदेही
कानूनी प्रक्रिया अपनाने की सलाह
फैसले में यह भी कहा गया कि यदि कोई पुलिस अधिकारी या प्रशासनिक अधिकारी अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर ऐसे मामलों में हस्तक्षेप करता है, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई या अवमानना की कार्यवाही भी हो सकती है। इसलिए सभी अधिकारियों को तय कानूनी सीमा के भीतर रहकर ही काम करना चाहिए।
हाई कोर्ट ने अंत में संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे विवाद के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखें, लेकिन किसी भी पक्ष का पक्षपात न करें। साथ ही याचिकाकर्ता को उचित राहत के लिए संबंधित Civil, Police, Property और BNSS से जुड़े प्रावधानों के अनुसार सक्षम दीवानी अदालत का दरवाजा खटखटाने की स्वतंत्रता भी दी गई।