सरकार सोने की हॉलमार्क वाली ज्वेलरी की बिक्री को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए नई व्यवस्था पर काम कर रही है।
इसके तहत हर हॉलमार्क वाले सोने के सामान के छह अंकों वाले विशिष्ट पहचान नंबर को बिक्री के बाद ‘Sold’ के रूप में दर्ज किया जा सकता है। इसका उद्देश्य चोरी की ज्वेलरी को दोबारा बेचने और एक ही पहचान नंबर का किसी दूसरी Jewellery पर इस्तेमाल रोकना है।
हॉलमार्क ज्वेलरी के लिए ‘Sold’ टैग की तैयारी
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, जब कोई ग्राहक हॉलमार्क वाली ज्वेलरी खरीदेगा तो उसके पहचान नंबर को बिक्री के बाद सिस्टम में दर्ज किया जाएगा। अगर बाद में वही नंबर किसी दूसरी ज्वेलरी के साथ इस्तेमाल किया जाता है, तो व्यवस्था यह संकेत दे सकती है कि यह नंबर पहले ही किसी सामान की बिक्री के लिए इस्तेमाल हो चुका है। इससे दुकानदार को ज्वेलरी के स्रोत की जांच करने का संकेत मिलेगा।
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोने के jewelry markets में शामिल है और देश में सोने की ज्वेलरी की चोरी की घटनाएं भी होती रहती हैं। जनवरी 2026 में भारत के रत्न और ज्वेलरी बाजार का मूल्य करीब 85 अरब डॉलर बताया गया था। इसके 2030 तक बढ़कर 130 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
प्रस्ताव के अनुसार शुरुआत में इस व्यवस्था को शहरी क्षेत्रों के बड़े और संगठित ज्वेलरी कारोबारियों के लिए अनिवार्य किया जा सकता है। बाद में इसे ग्रामीण क्षेत्रों और unorganized traders तक बढ़ाया जा सकता है। मौजूदा समय में भारत के सोने के ज्वेलरी कारोबार का बड़ा हिस्सा असंगठित दुकानदारों के पास है।
💍 Hallmark Jewellery की नई पहचान व्यवस्था
- पहचान नंबर: हर हॉलमार्क वाली ज्वेलरी का छह अंकों वाला विशिष्ट नंबर
- बिक्री के बाद: पहचान नंबर को ‘Sold’ के रूप में दर्ज किया जा सकता है
- मुख्य उद्देश्य: चोरी की ज्वेलरी की दोबारा बिक्री रोकने में मदद
- जांच: पहले इस्तेमाल हुए नंबर से ज्वेलरी के स्रोत की जांच हो सकती है
- पहला चरण: बड़े और संगठित शहरी ज्वेलरी कारोबारियों पर लागू करने का प्रस्ताव
ज्वेलरी के पहचान नंबर और रिकॉर्ड की जांच
फिलहाल Hallmark वाली प्रत्येक ज्वेलरी पर पहचान नंबर और उसका वजन दर्ज किया जाता है। उदाहरण के लिए, दो ग्राम की सोने की अंगूठी का अपना अलग पहचान नंबर होता है। ग्राहक के खरीदने पर दुकानदार बिल देता है, जिसमें संबंधित जानकारी दर्ज रहती है। इससे सामान की पहचान और जानकारी को रिकॉर्ड में रखा जा सकता है।
ग्राहक भी हॉलमार्क की वास्तविकता जांचने के लिए बीआईएस केयर ऐप पर पहचान नंबर डाल सकता है। हॉलमार्क के गलत इस्तेमाल पर भारतीय मानक ब्यूरो के कानून के तहत कार्रवाई का प्रावधान है। नियमों का उल्लंघन करने पर एक साल तक की सजा या कम से कम एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। जुर्माना सामान की कीमत का पांच गुना तक भी हो सकता है।
नई व्यवस्था से चोरी या बिना अनुमति के बेची जा रही सोने की ज्वेलरी को दोबारा बाजार में लाने पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है। अगर कोई दुकानदार पुरानी Gold की ज्वेलरी खरीदता है, तो वह उसके पहचान नंबर और खरीद से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर सकेगा। यदि पहचान नंबर पहले ही किसी ग्राहक को बेची गई ज्वेलरी से जुड़ा हुआ पाया जाता है, तो यह जांच का संकेत बन सकता है।
🔎 नई व्यवस्था का ग्राहकों और दुकानदारों पर असर
- ग्राहक: ज्वेलरी की पहचान और बिक्री का रिकॉर्ड अधिक स्पष्ट हो सकता है
- दुकानदार: पुरानी Gold ज्वेलरी खरीदते समय पहचान नंबर की जांच कर सकेगा
- चोरी की ज्वेलरी: दोबारा बाजार में लाने पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है
- रिकॉर्ड: हर ज्वेलरी का अलग रिकॉर्ड रखना पड़ सकता है
- संभावित चुनौती: कारोबारियों की परिचालन लागत बढ़ सकती है
दुकानदारों के लिए बढ़ सकती है रिकॉर्ड रखने की जिम्मेदारी
ज्वेलरी कारोबार से जुड़े लोगों की इस प्रस्ताव पर अलग-अलग राय है। कुछ कारोबारियों का मानना है कि इससे गलत तरीके से होने वाले कामों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी, जबकि कुछ का कहना है कि नई व्यवस्था से दुकानदारों की परिचालन लागत बढ़ सकती है। खासकर तब परेशानी हो सकती है जब ग्राहक खरीदने के बाद ज्वेलरी में बदलाव करवाता है और उसका वजन या अन्य विवरण बदल जाता है।
नई व्यवस्था लागू होने पर दुकानदारों को हर ज्वेलरी का अलग रिकॉर्ड रखना पड़ सकता है। अभी कुछ कारोबारी एक साथ कई सामानों का रिकॉर्ड रखते हैं। प्रस्तावित नियम के तहत हर सामान के पहचान नंबर को दुकान की व्यवस्था से जोड़ना होगा और बिक्री के समय या दिन खत्म होने पर उसके नंबर को ‘Sold’ के रूप में दर्ज करना होगा।
भारत में सोने की हॉलमार्किंग की शुरुआत वर्ष 2000 में हुई थी और 2021 से इसे चरणबद्ध तरीके से अनिवार्य बनाया गया। अब देश के 800 जिलों में से करीब आधे जिलों में हॉलमार्किंग की सुविधा लागू है। इसके बाद से 58 करोड़ से अधिक सोने की वस्तुओं पर हॉलमार्क लगाया जा चुका है। नई व्यवस्था लागू होने पर सोने की ज्वेलरी की खरीद-बिक्री में पहचान और रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया और मजबूत हो सकती है।
Frequently Asked Questions
1. हॉलमार्क ज्वेलरी का ‘Sold’ टैग क्या है?
प्रस्तावित व्यवस्था में हॉलमार्क वाली ज्वेलरी के छह अंकों वाले विशिष्ट पहचान नंबर को बिक्री के बाद ‘Sold’ के रूप में दर्ज किया जा सकता है।
2. इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य चोरी की ज्वेलरी को दोबारा बेचने और एक ही पहचान नंबर का किसी दूसरी Jewellery पर इस्तेमाल रोकने में मदद करना है।
3. ग्राहक हॉलमार्क ज्वेलरी की पहचान कैसे जांच सकता है?
ग्राहक हॉलमार्क की वास्तविकता जांचने के लिए बीआईएस केयर ऐप पर ज्वेलरी का पहचान नंबर डाल सकता है।
4. नई व्यवस्था से दुकानदारों को क्या फायदा होगा?
दुकानदार पुरानी Gold ज्वेलरी खरीदते समय उसके पहचान नंबर और खरीद से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर सकेगा। इससे संदिग्ध ज्वेलरी के स्रोत की जांच करने में मदद मिल सकती है।
5. नई व्यवस्था से दुकानदारों के सामने क्या चुनौती आ सकती है?
दुकानदारों को हर ज्वेलरी का अलग रिकॉर्ड रखना पड़ सकता है। इसके अलावा ग्राहक द्वारा ज्वेलरी में बदलाव करवाने पर वजन या अन्य विवरण बदलने की स्थिति में परिचालन संबंधी परेशानी हो सकती है।
निष्कर्ष
प्रस्तावित ‘Sold’ व्यवस्था से हॉलमार्क वाली सोने की ज्वेलरी की पहचान और बिक्री का रिकॉर्ड मजबूत हो सकता है। इससे चोरी की ज्वेलरी की दोबारा बिक्री रोकने और ग्राहकों तथा कारोबारियों के बीच अधिक पारदर्शिता लाने में मदद मिल सकती है।
Disclaimer: यह जानकारी समाचार उद्देश्य के लिए है और इसे निवेश या वित्तीय सलाह नहीं माना जाना चाहिए।