केंद्र सरकार ने Renewable energy परियोजनाओं से जुड़ी कंपनियों को निविदा जीतने के बाद अपनी बिजली दर स्वेच्छा से कम करने की अनुमति दी है।
इस फैसले से करीब 40 गीगावाट की ऐसी रिन्यूएबल एनर्जी परियोजनाओं के लंबित बिजली खरीद समझौतों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है, जिन पर अभी तक हस्ताक्षर नहीं हुए हैं।
Renewable energy परियोजनाओं के लिए टैरिफ घटाने की अनुमति
नवीन और रिन्यूएबल एनर्जी मंत्रालय ने 31 जुलाई को जारी एक सूचना में स्थिति स्पष्ट की। इसके अनुसार, सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, एनटीपीसी, एसजेवीएन और एनएचपीसी जैसी Renewable Energy Implementation एजेंसियां सफल बोली लगाने वाली कंपनी की ओर से खुद पेश की गई कम दर को स्वीकार कर सकती हैं। हालांकि, यह कटौती पूरी तरह कंपनी की अपनी इच्छा से होनी चाहिए। किसी सरकारी संस्था या बिजली खरीदार की ओर से उस पर दबाव या बातचीत नहीं होनी चाहिए।
सरल शब्दों में, निविदा जीतने के बाद कोई कंपनी खुद बिजली की कीमत कम करने का प्रस्ताव दे सकती है, लेकिन संबंधित एजेंसी या बिजली खरीदने वाली संस्था उससे कम कीमत की मांग नहीं कर सकती। इस अंतर को मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से बताया है।
इस फैसले से उन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है जिनके बिजली खरीद समझौते लंबे समय से अटके हुए हैं। power distribution कंपनियों के लिए कम दर पर बिजली खरीदना अधिक आकर्षक हो सकता है। इससे मूल निविदा को दोबारा खोलने या परियोजना की शर्तों में बड़े बदलाव की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।
🌱 Renewable Energy परियोजनाओं पर बड़ा फैसला
- लंबित परियोजनाएं: करीब 40 गीगावाट की परियोजनाओं को मदद मिल सकती है
- टैरिफ कटौती: कंपनी अपनी इच्छा से बिजली दर घटा सकती है
- कोई दबाव नहीं: सरकारी संस्था कम दर की मांग नहीं कर सकती
- मुख्य एजेंसियां: SECI, NTPC, SJVN और NHPC
- संभावित फायदा: लंबित बिजली खरीद समझौतों को आगे बढ़ाने में मदद
लंबित बिजली खरीद समझौतों को मिल सकती है गति
यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब अकेले renewable electricity परियोजनाओं से जुड़े बड़ी संख्या में समझौते लंबित हैं। दूसरी ओर, बिजली वितरण कंपनियां महंगी ताप बिजली खरीदने के लिए नए समझौते कर रही हैं। भारत में गैर-जीवाश्म बिजली उत्पादन क्षमता 300 गीगावाट तक पहुंच चुकी है और इसमें सौर ऊर्जा की बड़ी भूमिका है।
मंत्रालय ने अप्रैल में Renewable Energy Implementation एजेंसियों को निविदा के बाद कंपनियों या बिजली खरीदने वाली संस्थाओं के साथ दर बदलने को लेकर बातचीत से बचने की सलाह दी थी। 31 जुलाई की नई सूचना में स्पष्ट किया गया कि अगर सफल बोली लगाने वाली कंपनी खुद बिना किसी मांग, बातचीत या दबाव के दर कम करने का प्रस्ताव देती है, तो उसे स्वीकार किया जा सकता है।
इससे पहले Central Electricity Regulatory आयोग ने भी 2022 में कहा था कि अगर सफल बोली लगाने वाली कंपनी अपनी इच्छा से तय दर को कम करती है, तो इसे नियमों का उल्लंघन नहीं माना जाएगा। अब मंत्रालय की नई स्पष्टता से इस व्यवस्था को लेकर स्थिति और साफ हो गई है।
⚡ कम टैरिफ से क्या बदल सकता है?
- बिजली खरीदार: कम दर पर बिजली खरीदना अधिक आकर्षक हो सकता है
- परियोजनाएं: लंबे समय से अटके समझौतों को आगे बढ़ाने में मदद
- निविदा: मूल बोली को दोबारा खोलने की जरूरत कम हो सकती है
- उपभोक्ता: कम कीमत वाली बिजली का फायदा आगे मिल सकता है
- निवेश: Renewable energy क्षेत्र में नई परियोजनाओं को गति मिल सकती है
परियोजनाओं की मूल संरचना में बदलाव की जरूरत कम
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, इस कदम से लंबित परियोजनाओं को आगे बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है। पहले ऐसी परियोजनाओं को बिजली खरीदारों के लिए अधिक आकर्षक बनाने के लिए बोली की मूल शर्तों में बदलाव, पवन ऊर्जा या storage जैसी सुविधाएं जोड़ने पर विचार किया जा रहा था। लेकिन ऐसा करने के लिए नियामकीय मंजूरी की जरूरत पड़ सकती थी और अन्य कंपनियां भी इस प्रक्रिया पर सवाल उठा सकती थीं।
अब कंपनियों को केवल बिजली की दर कम करने का विकल्प दिया गया है। इससे परियोजना की मूल संरचना में बदलाव नहीं होगा और कम कीमत का फायदा अंतिम बिजली उपभोक्ताओं को भी मिल सकता है। सरकार लंबे समय से लंबित बिजली खरीद समझौतों को कम करने और बिजली वितरण कंपनियों की मांग बढ़ाने के विकल्पों पर काम कर रही है।
सरकार ने कुछ परियोजनाओं में कंपनियों को बैंक गारंटी जब्त किए बिना बाहर निकलने की अनुमति देने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया है। इसके अलावा पारेषण शुल्क में छूट, सौर परियोजनाओं में बैटरी भंडारण व्यवस्था जोड़ने और नियमों तथा ग्रिड कनेक्शन से जुड़ी शर्तों में राहत देने पर भी चर्चा हुई है।
Frequently asked questions
1. Renewable energy कंपनियां टैरिफ कब घटा सकती हैं?
नवीकरणीय ऊर्जा कंपनी निविदा जीतने के बाद अपनी इच्छा से बिजली की दर घटाने की पेशकश कर सकती है। इसके लिए किसी सरकारी एजेंसी या बिजली खरीदार की मांग, दबाव या बातचीत नहीं होनी चाहिए।
2. इस फैसले से कितनी परियोजनाओं को फायदा हो सकता है?
सरकार के इस कदम से करीब 40 गीगावाट की उन नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है, जिनके बिजली खरीद समझौते अभी तक पूरे नहीं हुए हैं और लंबे समय से लंबित हैं।
3. क्या बिजली खरीदने वाली कंपनी कम कीमत मांग सकती है?
नहीं, बिजली खरीदने वाली संस्था या नवीकरणीय ऊर्जा कार्यान्वयन एजेंसी सफल बोली लगाने वाली कंपनी से कम दर की मांग नहीं कर सकती। कीमत घटाने का प्रस्ताव केवल परियोजना डेवलपर की ओर से स्वेच्छा से आना चाहिए।
4. टैरिफ कम करने से बिजली खरीदारों को क्या फायदा होगा?
कम टैरिफ से बिजली खरीदने वाली वितरण कंपनियों के लिए परियोजनाएं अधिक आकर्षक हो सकती हैं। इससे लंबित समझौते पूरे होने की संभावना बढ़ेगी और कम कीमत वाली बिजली का लाभ आगे चलकर उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है।
5. सरकार ने नवीकरणीय परियोजनाओं के लिए पहले क्या कदम उठाए हैं?
सरकार ने लंबित परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए कई विकल्पों पर विचार किया है। इनमें पारेषण शुल्क में छूट, बैटरी भंडारण जोड़ना, ग्रिड कनेक्शन नियमों में राहत और कुछ परियोजनाओं से बाहर निकलने की सुविधा शामिल है।
निष्कर्ष
Tender के बाद स्वेच्छा से टैरिफ घटाने की अनुमति से अटकी नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इससे बिजली खरीदारों को बेहतर दर मिल सकती है और देश में स्वच्छ ऊर्जा निवेश को गति मिलने की उम्मीद है।
Disclaimer: यह जानकारी सामान्य समाचार उद्देश्य के लिए है, इसे निवेश सलाह या वित्तीय निर्णय का आधार न बनाएं।