भारत सरकार बुनियादी ढांचा क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने पर लगातार जोर दे रही है। इसी दिशा में सार्वजनिक पूंजी, जोखिम कम करने वाली योजनाओं और बेहतर निवेश व्यवस्था के जरिए निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
सरकारी पूंजी से निजी निवेश को बढ़ावा देने पर जोर
वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने बुधवार को कहा कि सरकार की सार्वजनिक पूंजी का इस्तेमाल निजी निवेश की जगह लेने के लिए नहीं, बल्कि उसे बढ़ावा देने के लिए होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को निजी निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनाने और उनके जोखिम को कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं।

सीतारमण ने जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि सरकार ने बुनियादी ढांचा क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई सुधार किए हैं। इनमें Viability gap funding, Hybrid Annuity Model, ऋण सुधार व्यवस्था, बुनियादी ढांचा निवेश ट्रस्ट, राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा पाइपलाइन और पीएम गति शक्ति जैसी योजनाएं शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि व्यवहार्यता अंतर वित्त पोषण का इस्तेमाल उन परियोजनाओं के लिए किया जाता है जो सामाजिक रूप से जरूरी हैं, लेकिन केवल अपने दम पर आर्थिक रूप से मजबूत नहीं हैं। वहीं हाइब्रिड वार्षिकी मॉडल के जरिए सड़क परियोजनाओं में सरकार और निजी क्षेत्र के बीच जोखिम को संतुलित करने की कोशिश की जाती है।
🏗️ Infrastructure Investment के लिए सरकारी कदम
- VGF: जरूरी लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर परियोजनाओं को मदद
- HAM: सड़क परियोजनाओं में सरकार और निजी क्षेत्र के जोखिम का संतुलन
- Infrastructure Investment Trust: पूंजी के दोबारा इस्तेमाल और संस्थागत निवेश को बढ़ावा
- National Infrastructure Pipeline: लंबे समय की परियोजनाओं और निवेश अवसरों की जानकारी
- PM Gati Shakti: परिवहन साधनों के बीच बेहतर तालमेल और तेज काम
बुनियादी ढांचे में लंबे समय के निवेश पर फोकस

सरकार बुनियादी ढांचा निवेश ट्रस्ट के माध्यम से पूंजी को दोबारा इस्तेमाल करने और लंबे समय के संस्थागत निवेशकों को आकर्षित करने पर भी जोर दे रही है। राष्ट्रीय infrastructure pipeline से निवेशकों को लंबे समय की परियोजनाओं और संभावित अवसरों की जानकारी मिलती है। पीएम गति शक्ति के जरिए अलग-अलग परिवहन साधनों के बीच बेहतर तालमेल और काम की गति बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
वित्त मंत्री ने कहा कि लगातार बढ़ रहे सरकारी पूंजी खर्च और आर्थिक सुधारों से देश के बुनियादी ढांचा क्षेत्र को मजबूती मिली है। पिछले करीब एक दशक में सार्वजनिक निवेश में काफी बढ़ोतरी हुई है। सरकार का ध्यान राजमार्ग, रेलवे, बंदरगाह, Logistics, डिजिटल ढांचे और ऊर्जा नेटवर्क जैसे क्षेत्रों में मजबूत संपत्तियां तैयार करने पर है।
वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में निजी क्षेत्र के निवेश को बढ़ाने के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं। इनमें नए माल ढुलाई गलियारे, नए तेज गति वाले रेल गलियारे, राष्ट्रीय जलमार्गों को शुरू करने से जुड़े उपाय और तटीय माल ढुलाई को बढ़ावा देने की योजना शामिल है।
12.22 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत खर्च पर जोर

सरकार ने पूंजीगत खर्च में भी बढ़ोतरी की है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पूंजीगत खर्च का लक्ष्य 12.22 लाख करोड़ रुपये रखा गया है। यह वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान 10.96 लाख करोड़ रुपये से 11.5 प्रतिशत अधिक है। सरकार बुनियादी ढांचे के जरिए आर्थिक विकास को गति देने पर लगातार जोर दे रही है।
📈 Capital Expenditure और Private Investment
- FY 2026-27: पूंजीगत खर्च का लक्ष्य 12.22 लाख करोड़ रुपये
- FY 2025-26: संशोधित अनुमान 10.96 लाख करोड़ रुपये
- बढ़ोतरी: पूंजीगत खर्च में 11.5 प्रतिशत वृद्धि
- मुख्य क्षेत्र: राजमार्ग, रेलवे, बंदरगाह, डिजिटल ढांचा और ऊर्जा नेटवर्क
- निवेश लक्ष्य: सार्वजनिक पूंजी के जरिए निजी निवेश को आकर्षित करना
निजी निवेश के लिए भरोसेमंद माहौल जरूरी
सीतारमण ने कहा कि निजी निवेश को बड़े स्तर पर आकर्षित करने के लिए केवल पैसा उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है। विकास से जुड़े multilateral financial institutions की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। ये संस्थाएं परियोजनाओं का जोखिम कम करने, उन्हें निवेश के लिहाज से मजबूत बनाने और निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में मदद कर सकती हैं।
उन्होंने कहा कि BRICS देशों के सामने निजी पूंजी को बड़े स्तर पर आकर्षित करने में कई समान चुनौतियां हैं। समस्या केवल पूंजी की उपलब्धता की नहीं है, बल्कि ऐसा माहौल बनाने की है जिसमें निवेशकों को स्थिरता, भरोसा, स्पष्टता और लंबे समय तक चलने वाली नीतियों का विश्वास मिले।
Finance Minister ने कहा कि आने वाले समय में विकास के लिए सरकार, बहुपक्षीय संस्थाओं और निजी क्षेत्र के बीच साझेदारी जरूरी होगी। इन सभी की अपनी अलग ताकत है और मिलकर काम करने से बड़े स्तर पर निवेश जुटाया जा सकता है। आर्थिक मामलों की सचिव अनुराधा ठाकुर ने भी कहा कि विकास के लिए केवल अनुकूल परिस्थितियों पर निर्भर रहने के बजाय मजबूत और लंबे समय तक टिकने वाली व्यवस्था जरूरी है।
Frequently Asked Questions
1. सार्वजनिक पूंजी और निजी निवेश में क्या अंतर है?
public capital सरकार द्वारा विकास कार्यों में लगाया गया पैसा है, जबकि निजी निवेश कंपनियों और निवेशकों से आता है। सरकार चाहती है कि उसका पैसा निजी निवेश को आकर्षित करे और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद करे।
2. सरकार निजी कंपनियों को Infrastructure में क्यों बढ़ावा दे रही है?
बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट के लिए बहुत अधिक धन की जरूरत होती है। सरकार अकेले सभी परियोजनाओं का खर्च नहीं उठा सकती। निजी कंपनियों की भागीदारी से निवेश बढ़ सकता है और सड़क, रेलवे, बंदरगाह जैसी परियोजनाएं तेजी से पूरी हो सकती हैं।
3. VGF और HAM का इस्तेमाल किस काम में होता है?
VGF ऐसी परियोजनाओं को आर्थिक मदद देता है जो समाज के लिए जरूरी हैं, लेकिन उनसे पर्याप्त कमाई नहीं होती। HAM में सड़क परियोजनाओं से जुड़े खर्च और जोखिम को सरकार तथा निजी क्षेत्र के बीच बांटने की व्यवस्था होती है।
4. वित्त वर्ष 2026-27 में सरकार का capital expenditure कितना है?
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने 12.22 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च तय किया है। यह पिछले वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान 10.96 लाख करोड़ रुपये से 11.5 प्रतिशत अधिक है, जिससे बुनियादी ढांचे पर जोर साफ दिखाई देता है।
5. निजी निवेश बढ़ाने में multilateral institutions की क्या भूमिका है?
बहुपक्षीय विकास संस्थाएं परियोजनाओं से जुड़े जोखिम को कम करने और निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में मदद कर सकती हैं। इससे बड़ी परियोजनाओं में निजी पूंजी जुटाना आसान हो सकता है और लंबे समय के निवेश के लिए बेहतर माहौल तैयार होता है।
निष्कर्ष
सरकार का लक्ष्य सार्वजनिक धन को निजी निवेश का विकल्प बनाना नहीं, बल्कि उसे आकर्षित करने का माध्यम बनाना है। मजबूत नीतियां, बेहतर infrastructure और जोखिम कम करने वाली योजनाएं भारत में लंबे समय के निजी invest को बढ़ावा दे सकती हैं।
Disclaimer: यह खबर उपलब्ध जानकारी पर आधारित है और इसे निवेश सलाह या वित्तीय निर्णय का आधार नहीं माना जाना चाहिए।