देश में डिजिटल भुगतान को आसान बनाने में UPI की बड़ी भूमिका रही है। शुरुआत में इसे लोगों के बीच तेजी से अपनाने के लिए बिना किसी शुल्क के उपलब्ध कराया गया था। आज यह देश के सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले भुगतान माध्यमों में शामिल हो चुका है। ऐसे में अब इस व्यवस्था के खर्च और भविष्य को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।
UPI के भविष्य और संचालन लागत पर बढ़ी चर्चा
डिजिटल भुगतान की प्रमुख बातें
- मुख्य माध्यम: UPI
- मुख्य मुद्दा: संचालन की लागत
- उद्देश्य: टिकाऊ भुगतान व्यवस्था
- सहयोग: बैंक और भुगतान कंपनियां
- चर्चा: भविष्य के वित्तीय मॉडल पर
- फोकस: डिजिटल भुगतान का विस्तार
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े सार्वजनिक ढांचे को लंबे समय तक सफल बनाए रखने के लिए उसके संचालन का खर्च भी पूरा होना चाहिए। डिजिटल भुगतान प्रणाली को चलाने में तकनीकी व्यवस्था, बैंकिंग नेटवर्क और भुगतान सेवा देने वाली कंपनियों पर लगातार खर्च आता है। इसलिए सवाल उठ रहा है कि इस लागत को आखिर कौन वहन करेगा।
हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ने भी कहा कि किसी भी सेवा की लागत किसी न किसी रूप में चुकानी ही पड़ती है। कई बार इसका बोझ सीधे उपयोगकर्ता पर नहीं दिखता, लेकिन उसका असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। उनका मानना है कि किसी भी व्यवस्था को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने के लिए उसके खर्च का टिकाऊ समाधान जरूरी है।
टिकाऊ मॉडल पर बढ़ रहा विचार
अर्थशास्त्र से जुड़े कई विशेषज्ञ भी मानते हैं कि लंबे समय तक पूरी तरह मुफ्त सेवाएं चलाना आसान नहीं होता। यदि किसी सेवा से जुड़े खर्च की भरपाई नहीं होती, तो भविष्य में उसमें निवेश और सुधार करना कठिन हो सकता है। यही कारण है कि अब डिजिटल भुगतान व्यवस्था के लिए भी स्थायी मॉडल पर चर्चा हो रही है।
फिलहाल सरकार छोटे कारोबारियों के लिए कम राशि वाले डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रोत्साहन देती है। इससे बैंक, भुगतान सेवा देने वाली कंपनियों और अन्य संस्थाओं को कुछ आर्थिक सहायता मिलती है। हालांकि उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि यह सहायता कुल खर्च का केवल एक हिस्सा ही पूरा कर पाती है।
आगे की संभावित दिशा
- e-Rupee: उपयोग बढ़ने की संभावना
- RBI: टिकाऊ व्यवस्था पर फोकस
- RuPay: डिजिटल भुगतान का विस्तार
- Merchant: शुल्क मॉडल पर चर्चा
- सरकारी सहायता: छोटे कारोबारियों को समर्थन
- लक्ष्य: मजबूत और संतुलित भुगतान प्रणाली
डिजिटल भुगतान का दायरा लगातार बढ़ रहा है
कुछ जानकारों का सुझाव है कि बड़े कारोबारियों से बहुत कम दर पर भुगतान शुल्क लिया जा सकता है, जबकि छोटे लेनदेन को पहले की तरह बिना शुल्क रखा जाए। उनका मानना है कि इससे आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा और पूरी व्यवस्था के संचालन के लिए जरूरी संसाधन भी मिल सकेंगे।
आने वाले समय में यदि e-Rupee का इस्तेमाल बढ़ता है, तो डिजिटल भुगतान व्यवस्था का स्वरूप और भी बदल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंक की डिजिटल मुद्रा के व्यापक उपयोग के बाद भुगतान सेवाओं के लिए अलग मॉडल अपनाना आसान हो सकता है।
फिलहाल इस विषय पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन यह स्पष्ट है कि देश में डिजिटल भुगतान का दायरा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में RBI, RuPay और Merchant से जुड़े सभी पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए ऐसा समाधान तलाशने की कोशिश होगी, जिससे आम उपभोक्ता पर कम असर पड़े और डिजिटल भुगतान व्यवस्था भी मजबूत बनी रहे।