M&A फंडिंग: बैंकों की एंट्री से प्राइवेट क्रेडिट फंड्स पर दबाव

बैंकों को M&A फंडिंग की मंजूरी से प्राइवेट क्रेडिट फंड्स पर बढ़ेगा दबाव, Moody’s की चेतावनी भारत में बैंकों को अधिग्रहण (Merger & Acquisition) सौदों के लिए अधिक वित्तपोषण की अनुमति मिलने के बाद प्राइवेट क्रेडिट फंड्स के सामने नई चुनौती खड़ी हो सकती है।

M&A फंडिंग में बैंकों की बढ़ती भूमिका

रेटिंग एजेंसी Moody’s Ratings का कहना है कि इस फैसले से प्राइवेट क्रेडिट फंड्स के मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि अधिग्रहण वित्तपोषण उनके सबसे लाभदायक कारोबारों में से एक रहा है।

Moody’s की रिपोर्ट के अनुसार, नए नियमों से कंपनियों के लिए अधिग्रहण के लिए फंड जुटाना आसान होगा और उनकी उधारी लागत भी कम हो सकती है। हालांकि, इससे प्राइवेट क्रेडिट फंड्स को मिलने वाला प्रीमियम रिटर्न घट सकता है और उनके लिए नए सौदों के अवसर भी कम हो सकते हैं।

प्राइवेट क्रेडिट फंड्स पर बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा

अब तक अधिग्रहण से जुड़े कई बड़े सौदों में प्राइवेट क्रेडिट फंड्स महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। ये फंड विशेष परिस्थितियों (Special Situations) में उन कंपनियों को लचीला और जरूरत के मुताबिक वित्तपोषण उपलब्ध कराते थे, जिन्हें पारंपरिक बैंक ऋण आसानी से नहीं मिल पाता था। इस सुविधा के बदले उन्हें बैंक ऋण की तुलना में अधिक रिटर्न मिलता था। लेकिन अब स्थानीय बैंकों की बढ़ती भागीदारी से इस कारोबार में प्रतिस्पर्धा तेज होने की संभावना है।

हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों को कॉरपोरेट अधिग्रहण सौदों में कुल लेनदेन मूल्य का 75% तक वित्तपोषण करने की अनुमति दी है। माना जा रहा है कि इस फैसले से भारत के 40 अरब डॉलर से अधिक के M&A बाजार को नई गति मिलेगी।

इसी दिशा में देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक State Bank of India (SBI) ने जापान के Mitsubishi UFJ Financial Group (MUFG) के साथ विलय एवं अधिग्रहण सौदों के लिए साझेदारी की है। इसके अलावा, SBI के Sun Pharmaceutical Industries के प्रस्तावित 12 अरब डॉलर के विदेशी अधिग्रहण के लिए वैश्विक बैंकों के समूह में शामिल होने की भी संभावना जताई जा रही है।

भारतीय बैंकों की रणनीतिक साझेदारियां

वहीं, देश के दूसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक Bank of Baroda ने भी जापान के Mizuho Bank के साथ मिलकर M&A सौदों के वित्तपोषण के लिए समझौता किया है।

Moody’s के अनुसार, भारत का प्राइवेट क्रेडिट बाजार पिछले पांच वर्षों में दोगुना होकर 2025 के अंत तक लगभग 25 अरब डॉलर की एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) तक पहुंच गया है। वहीं, इस अवधि में वार्षिक लेनदेन का आकार 11 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है। हालांकि, यह अभी भी अमेरिका के 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक के प्राइवेट क्रेडिट बाजार की तुलना में काफी छोटा है।

रेटिंग एजेंसी का मानना है कि भारत में प्राइवेट क्रेडिट सेक्टर आगे भी बढ़ता रहेगा। इंफ्रास्ट्रक्चर, रियल एस्टेट और संस्थापक-नेतृत्व वाली कंपनियों की रीफाइनेंसिंग की मजबूत मांग इस बाजार को समर्थन देती रहेगी। वर्तमान में भारत के प्राइवेट क्रेडिट बाजार में सबसे बड़ा हिस्सा लगभग 40% रियल एस्टेट का है, जबकि इसके बाद इंफ्रास्ट्रक्चर और यूटिलिटीज का स्थान आता है।

भारत के प्राइवेट क्रेडिट बाजार की संभावनाएं

Moody’s ने यह भी कहा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत का प्राइवेट क्रेडिट बाजार मजबूत बना हुआ है। हालांकि, निवेशकों को बढ़ते जोखिमों के प्रति सतर्क रहने की जरूरत होगी। इनमें अधिक और कई बार छिपा हुआ कर्ज, जटिल निवेश संरचनाएं, परिसंपत्तियों के मूल्यांकन में पारदर्शिता की कमी और संभावित लिक्विडिटी संकट जैसे जोखिम शामिल हैं।

रिपोर्ट में 2025 के दौरान हुए कुछ बड़े प्राइवेट क्रेडिट सौदों का भी उल्लेख किया गया है। इनमें Shapoorji Pallonji Group का 286 अरब रुपये (करीब 3 अरब डॉलर) का वित्तपोषण सौदा और Mumbai International Airport Ltd. की Apollo के नेतृत्व वाले वैश्विक निवेशकों के साथ 750 मिलियन डॉलर की रीफाइनेंसिंग डील प्रमुख हैं।

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I’m Gourav Kumar Singh, a graduate by education and a blogger by passion. Since starting my blogging journey in 2020, I have worked in digital marketing and content creation. Read more about me.

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