दादा की याद और उनके सामाजिक कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए उनके नाम पर गैर-सरकारी संस्था यानी NGO शुरू की जा सकती है। इसके लिए भारत में आम तौर पर सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट, धारा 8 कंपनी या धर्मार्थ सोसायटी जैसे विकल्प मौजूद हैं। सही विकल्प चुनने से पहले संस्था के उद्देश्य, नियंत्रण, सदस्यों की संख्या, गोपनीयता, जिम्मेदारी और जिस राज्य में संस्था चलानी है, इन बातों पर ध्यान देना जरूरी है।
दादा के नाम पर NGO शुरू करने के विकल्प
सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट को ट्रस्ट डीड में बताए गए सामाजिक और जनहित के उद्देश्यों के लिए ट्रस्टी संचालित करते हैं। संस्था बनाने वाला व्यक्ति खुद भी ट्रस्टी बन सकता है, लेकिन कम से कम एक अन्य ट्रस्टी रखना उचित माना जाता है। कुछ राज्यों में ऐसे ट्रस्ट के लिए अलग नियम लागू होते हैं और संबंधित धर्मार्थ अधिकारी के तहत पंजीकरण तथा अन्य जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करनी पड़ सकती हैं। दूसरे राज्यों में सार्वजनिक ट्रस्ट सामान्य ट्रस्ट कानून के सिद्धांतों के अनुसार संचालित होते हैं।
दूसरा विकल्प धारा 8 कंपनी है। यह कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 के तहत धर्मार्थ कार्यों के लिए बनाई जाती है और इसके लिए रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज से अनुमति लेनी होती है। इस तरह की संस्था अपनी आय का इस्तेमाल केवल निर्धारित सामाजिक उद्देश्यों को पूरा करने में कर सकती है। इसके मुनाफे को सदस्यों के बीच लाभांश के रूप में बांटा नहीं जा सकता। इसमें आप सदस्य और निदेशक दोनों की भूमिका निभा सकती हैं, लेकिन कम से कम एक अन्य सदस्य और एक अन्य निदेशक की जरूरत होगी।
धर्मार्थ ट्रस्ट और धारा 8 कंपनी
तीसरा विकल्प धर्मार्थ सोसायटी का है। इसे साहित्यिक, वैज्ञानिक या सामाजिक कार्यों के लिए बनाया जा सकता है और संबंधित राज्य के सोसायटी रजिस्ट्रार के पास इसका पंजीकरण कराया जाता है। ऐसी संस्थाओं के नियम और अनुपालन राज्य के अनुसार अलग हो सकते हैं। सोसायटी बनाने के लिए कम से कम सात सदस्यों की आवश्यकता होती है। इसलिए अगर छह अन्य लोग संस्था से जुड़ने के लिए तैयार नहीं हैं, तो यह विकल्प आपके लिए उपयुक्त नहीं हो सकता।
🏛️ NGO शुरू करने के मुख्य विकल्प
- सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट: ट्रस्टी के माध्यम से सामाजिक और जनहित के उद्देश्यों के लिए संचालन
- धारा 8 कंपनी: कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 के तहत धर्मार्थ कार्यों के लिए गठन
- धर्मार्थ सोसायटी: साहित्यिक, वैज्ञानिक या सामाजिक कार्यों के लिए गठन
- ट्रस्ट: कम से कम एक अन्य ट्रस्टी रखना उचित माना जाता है
- धारा 8 कंपनी: कम से कम एक अन्य सदस्य और एक अन्य निदेशक की जरूरत
- सोसायटी: कम से कम सात सदस्यों की आवश्यकता
NGO के जरूरी दस्तावेज और पंजीकरण
संस्था का स्वरूप तय करने के बाद उसके जरूरी दस्तावेजों को सावधानी से तैयार करना चाहिए। दस्तावेजों में दादा के सामाजिक और शिक्षा से जुड़े उद्देश्य के साथ आपके दूसरे लक्ष्यों को भी स्पष्ट रूप से शामिल किया जा सकता है। संस्था बनने और जरूरी पंजीकरण पूरा होने के बाद आयकर कानून के तहत पंजीकरण के लिए आवेदन किया जा सकता है। इससे संस्था की आय पर उपलब्ध कर छूट का लाभ लेने का रास्ता खुल सकता है।
अगर संस्था को मिलने वाला पैसा विदेश से आना है या संस्था बनाने वाला व्यक्ति भारतीय नागरिक नहीं है, तो विदेशी योगदान से जुड़े नियमों को भी ध्यान में रखना होगा। विदेश से मिलने वाले दान पर विदेशी अंशदान विनियमन कानून, 2010 के नियम लागू हो सकते हैं। केवल ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया कार्ड होना इन नियमों से अपने आप छूट नहीं देता।
📋 NGO शुरू करने से पहले जरूरी बातें
- उद्देश्य: संस्था के सामाजिक और जनहित के लक्ष्य स्पष्ट रखें
- सदस्य: चुने गए ढांचे के अनुसार सदस्यों और ट्रस्टी की जरूरत समझें
- दस्तावेज: जरूरी दस्तावेज सावधानी से तैयार करें
- पंजीकरण: संस्था के अनुसार संबंधित पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करें
- कर छूट: आयकर कानून के तहत उपलब्ध पंजीकरण के लिए आवेदन किया जा सकता है
- विदेशी दान: विदेश से मिलने वाले पैसे पर लागू नियमों का ध्यान रखें
NGO चलाने के लिए लगातार व्यवस्था जरूरी
किसी के नाम पर NGO शुरू करना केवल संस्था का पंजीकरण कराने तक सीमित नहीं है। इसे चलाने के लिए लगातार समय, सही व्यवस्था, हिसाब-किताब और जरूरी विशेषज्ञ सहायता की जरूरत पड़ती है। इसलिए संस्था शुरू करने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उसके संचालन के लिए पर्याप्त समय, धन और उचित पेशेवर मदद उपलब्ध हो।
