भारत में बिजली ट्रांसमिशन से जुड़े काम बढ़ने के बावजूद बजाज समूह की कंपनी बजेल प्रोजेक्ट्स तेजी से विस्तार करने की बजाय सोच-समझकर आगे बढ़ने पर ध्यान दे रही है। कंपनी का मानना है कि सिर्फ बड़े ऑर्डर हासिल करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें समय पर और सही लागत के साथ पूरा करना ज्यादा जरूरी है। इसी वजह से कंपनी कम मुनाफे और ज्यादा जोखिम वाले प्रोजेक्ट लेने से बच रही है और अपने काम करने के तरीके को बेहतर बनाने पर जोर दे रही है।
बड़े ऑर्डर से ज्यादा जरूरी है सही तरीके से काम पूरा करना
कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक राजेश गणेश के अनुसार, किसी भी कंपनी के लिए बड़ा ऑर्डर बुक बनाना बहुत मुश्किल काम नहीं है। असली चुनौती उन प्रोजेक्ट को सही तरीके से पूरा करने की होती है। उनका कहना है कि कंपनी ऐसी व्यवस्था तैयार कर रही है, जिससे यह तय किया जा सके कि किन प्रोजेक्ट के लिए बोली लगानी चाहिए और किनसे दूरी बनानी चाहिए। उनका जोर ऐसी संस्था बनाने पर है जो लंबे समय तक स्थिर और टिकाऊ तरीके से काम कर सके।
बिजली ट्रांसमिशन क्षेत्र में बढ़ रही मांग
बजेल प्रोजेक्ट्स बिजली ट्रांसमिशन लाइन, टावर और सबस्टेशन बनाने का काम करती है। देश में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ने के साथ बिजली को अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क की जरूरत भी बढ़ रही है। इसके बावजूद कंपनी फिलहाल केवल तेजी से कारोबार बढ़ाने के बजाय अपने अंदर की प्रक्रियाओं को मजबूत करने में लगी है। प्रबंधन का मानना है कि मजबूत व्यवस्था तैयार होने के बाद विकास को ज्यादा सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाया जा सकेगा।
पुराने अनुभव से सीखा जोखिम कम करने का सबक
कंपनी के सतर्क रवैये के पीछे उसका पुराना अनुभव भी एक बड़ी वजह है। बजाज इलेक्ट्रिकल्स से अलग होने से पहले संयुक्त कारोबार को कई वर्षों तक वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ा था। ईपीसी कारोबार में कम मुनाफे वाले पुराने प्रोजेक्ट, देरी और लागत बढ़ने की समस्या के कारण कंपनी पर दबाव बढ़ा था। इसी अनुभव के बाद अलग कंपनी बनने के पश्चात बजेल प्रोजेक्ट्स अब प्रोजेक्ट चुनने और उन्हें पूरा करने में ज्यादा सावधानी बरत रही है।
बजेल प्रोजेक्ट्स की रणनीति
- कम मुनाफे और ज्यादा जोखिम वाले प्रोजेक्ट से दूरी बनाना।
- प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने पर जोर देना।
- कंपनी की आंतरिक प्रक्रियाओं को मजबूत करना।
- लंबे समय के लिए स्थिर और टिकाऊ कारोबार तैयार करना।
ऑर्डर बुक 4,055 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर
30 जून तक कंपनी के ईपीसी ऑर्डर बुक का मूल्य करीब 4,055 करोड़ रुपये था, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। हालांकि, यह आंकड़ा वित्त वर्ष 2024 के अंत में दर्ज करीब 3,598 करोड़ रुपये से बहुत ज्यादा आगे नहीं है। दूसरी बड़ी कंपनियों के मुकाबले इसका ऑर्डर बुक काफी छोटा है। कंपनी के मुनाफे की स्थिति भी कुछ बड़ी प्रतिस्पर्धी कंपनियों की तुलना में कमजोर रही है। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में इसका ईबीआईटीडीए मार्जिन 3.3 प्रतिशत रहा, जबकि कुछ प्रमुख प्रतिस्पर्धियों का मार्जिन इससे काफी अधिक था।
विदेशी बाजारों में बेहतर मार्जिन की तलाश
मुनाफा बढ़ाने और कारोबार का दायरा बढ़ाने के लिए कंपनी अब विदेशों में भी अवसर तलाश रही है। खास तौर पर मध्य पूर्व और उत्तर अफ्रीका के बाजार पर ध्यान दिया जा रहा है, क्योंकि इन क्षेत्रों में मिलने वाले कारोबार से बेहतर मार्जिन मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही कंपनी महाराष्ट्र के रांजणगांव में ट्रांसमिशन टावर बनाने की अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए करीब 170 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है। मौजूदा सालाना क्षमता 56,500 टन से बढ़ाकर अगले वित्त वर्ष तक 1.10 लाख टन करने की योजना है।
कंपनी के विस्तार की बड़ी योजनाएं
- मध्य पूर्व और उत्तर अफ्रीका में नए अवसर तलाशना।
- रांजणगांव में करीब 170 करोड़ रुपये का निवेश करना।
- ट्रांसमिशन टावर उत्पादन क्षमता बढ़ाना।
- सालाना क्षमता को 56,500 टन से बढ़ाकर 1.10 लाख टन करना।
अनुभवी कर्मचारियों को बनाए रखना बड़ी चुनौती
कंपनी के सामने कर्मचारियों को बनाए रखने की चुनौती भी है। तेजी से बढ़ते उद्योग में अनुभवी कर्मचारियों की मांग बढ़ने के कारण कंपनियों के बीच प्रतिभाओं को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। इससे बजेल के आंतरिक कामकाज को मजबूत करने की गति प्रभावित हुई है। इस समस्या से निपटने के लिए कंपनी अपने कर्मचारियों की नई टीम तैयार कर रही है और इस साल 100 नए इंजीनियर प्रशिक्षुओं की भर्ती की गई है।
शेयर में तेजी, लेकिन पुराने उच्च स्तर से अभी नीचे
निवेशकों की ओर से फिलहाल कंपनी के इस सावधान रवैये को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। पिछले छह महीनों में इसके शेयर में करीब 25 प्रतिशत की बढ़त देखी गई है। हालांकि, दिसंबर 2023 में बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद से कुल बढ़त करीब 10 प्रतिशत ही रही है और शेयर अभी भी 2024 के 320 रुपये के ऊंचे स्तर से काफी नीचे है। कंपनी के प्रबंधन का कहना है कि उसका मुख्य लक्ष्य शेयर बाजार की गतिविधियों पर ध्यान देना नहीं, बल्कि बेहतर व्यवस्था बनाना, अच्छे कर्मचारियों को जोड़ना और ग्राहकों से किए वादों को पूरा करना है।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार और निवेश से जुड़े फैसले लेने से पहले कंपनी के वित्तीय आंकड़ों और जोखिमों का स्वतंत्र रूप से अध्ययन करें तथा जरूरत पड़ने पर योग्य वित्तीय सलाहकार से सलाह लें।
