Prop Trading Margin: शेयरों से बड़े Derivatives सौदों की तैयारी

भारतीय रिजर्व बैंक के कड़े नियमों के बाद कुछ प्रॉप ट्रेडर बड़े डेरिवेटिव सौदों के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाश रहे हैं। कुछ मामलों में ये ट्रेडर अपने नेटवर्क में मौजूद संपन्न निवेशकों के पास रखे अतिरिक्त शेयरों को जमानत के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके बदले शेयर रखने वाले निवेशक को ट्रेडिंग से होने वाली कमाई में एक हिस्सा देने की व्यवस्था की जा रही है। इस तरीके से ट्रेडर को अपनी पूंजी लगाए बिना बड़े सौदों के लिए जरूरी मार्जिन जुटाने में मदद मिल सकती है।

अतिरिक्त शेयरों से मार्जिन जुटाने की कोशिश

इस व्यवस्था में ऐसे निवेशकों के बेकार पड़े शेयरों का इस्तेमाल किया जाता है, जिनके पास बड़ी मात्रा में प्रतिभूतियां मौजूद हैं। निवेशक के लिए इसका आकर्षण यह है कि बिना शेयर बेचे भी उनसे अतिरिक्त कमाई हो सकती है। हालांकि, इसमें जोखिम भी है। अगर ट्रेडिंग में नुकसान होता है तो शेयरों को जमानत के तौर पर देने वाले निवेशक पर भी असर पड़ सकता है। इसी वजह से विशेषज्ञों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि कहीं यह तरीका उन वित्तीय सीमाओं को दोबारा बनाने का प्रयास तो नहीं है, जिन्हें आरबीआई ने कम करने के लिए नियम कड़े किए हैं।

10 करोड़ रुपये के शेयरों से कमाई का उदाहरण

एक उदाहरण के तौर पर, कोई प्रॉप ट्रेडर किसी परिचित व्यक्ति से संपर्क कर सकता है जिसके पास करीब 10 करोड़ रुपये के मजबूत कंपनियों के शेयर हैं। ट्रेडर इन शेयरों से अतिरिक्त कमाई कराने का प्रस्ताव दे सकता है और पुराने आंकड़ों के आधार पर सालाना 7 से 8 प्रतिशत तक रिटर्न की संभावना बता सकता है। सहमति बनने के बाद शेयरों को ब्रोकर के पास जमानत के रूप में रखा जा सकता है और उनके आधार पर मार्जिन जुटाकर सौदे किए जा सकते हैं। मार्जिन वह राशि होती है जिसे किसी बड़े सौदे के मुकाबले सुरक्षा के रूप में रखना जरूरी होता है।

इस व्यवस्था की मुख्य बातें

  • अतिरिक्त शेयरों को जमानत के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • ट्रेडर को अपनी पूंजी लगाए बिना मार्जिन जुटाने में मदद मिल सकती है।
  • शेयर मालिक को ट्रेडिंग कमाई में हिस्सा मिल सकता है।
  • ट्रेडिंग में नुकसान होने पर शेयर मालिक पर भी असर पड़ सकता है।

1 करोड़ रुपये के शेयर से 5 करोड़ रुपये की स्थिति

उदाहरण के लिए, अगर किसी ट्रेडर के पास 1 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर मार्जिन के रूप में हैं और जरूरी मार्जिन 20 प्रतिशत है, तो वह करीब 5 करोड़ रुपये तक की डेरिवेटिव स्थिति संभाल सकता है। यही वजह है कि शेयरों का इस्तेमाल करके अधिक पूंजी वाले सौदे करने की संभावना ट्रेडरों के लिए आकर्षक बनती है।

आरबीआई के नए नियमों के बाद बढ़ी चर्चा

यह तरीका इसलिए भी चर्चा में आया है क्योंकि आरबीआई ने इस साल फरवरी में पूंजी बाजार से जुड़े संस्थानों के लिए बैंक वित्तपोषण के नियमों को सख्त किया था। पहले कुछ परिस्थितियों में प्रॉप ट्रेडर 1 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी के लिए 50 लाख रुपये की जमानत देकर बड़ा ट्रेडिंग लिमिट हासिल कर सकता था। नए नियमों के तहत अब पूरी जमानत उपलब्ध कराना जरूरी है, जिसमें आधी राशि नकद और बाकी गैर-नकद रूप में हो सकती है। ये बदले हुए नियम 1 जुलाई से लागू हुए हैं। हालांकि, पहले जारी की गई कुछ बैंक गारंटी अपनी अवधि पूरी होने तक चल सकती हैं और ऐसी कुछ गारंटी जुलाई 2027 तक वैध रह सकती हैं।

निवेशकों के लिए जोखिम

  • ट्रेडिंग में नुकसान होने पर जमानत रखे शेयरों पर असर पड़ सकता है।
  • निजी समझौते की कानूनी स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।
  • शेयर मालिक की स्पष्ट अनुमति महत्वपूर्ण है।
  • अनुमति में शेयरों के जमानत के रूप में इस्तेमाल की शर्त शामिल है या नहीं, यह जांचना जरूरी है।

निजी समझौते की कानूनी स्थिति पर सवाल

इस नए तरीके को लेकर कानूनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि शेयर उधार देने और लेने के लिए पहले से मौजूद औपचारिक व्यवस्था के बावजूद अगर निजी समझौते के जरिए प्रतिभूतियों का इस्तेमाल केवल ट्रेडिंग के लिए किया जाता है, तो उसकी कानूनी जांच जरूरी हो सकती है। यदि शेयर मालिक ने स्पष्ट अनुमति नहीं दी है कि उसके शेयरों को जमानत के रूप में रखा जा सकता है, तो ऐसी स्थिति में गंभीर समस्या पैदा हो सकती है। वहीं, अनुमति होने की स्थिति में भी यह देखना जरूरी होगा कि दी गई अनुमति वास्तव में शेयरों के इस तरह इस्तेमाल को कवर करती है या नहीं। इसलिए इस तरह की व्यवस्था में निवेशकों को संभावित नुकसान और कानूनी जोखिम दोनों को समझकर ही कोई निर्णय लेना चाहिए।

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। निवेश या ट्रेडिंग से पहले संबंधित नियमों, जोखिमों और कानूनी प्रावधानों की उचित जांच करें तथा आवश्यकता होने पर योग्य वित्तीय और कानूनी सलाह लें।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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