Maharashtra के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को कहा कि Delhi-Mumbai Expressway का वडोदरा-मुंबई खंड 31 अगस्त तक यातायात के लिए खोलने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि इस सेक्शन के शुरू होने के बाद दिल्ली और मुंबई के बीच सड़क यात्रा का समय मौजूदा लगभग आठ घंटे से घटकर करीब चार घंटे रह जाएगा।
Delhi-Mumbai Expressway Progress
करीब 1,400km लंबा, आठ-लेन और एक्सेस-कंट्रोल्ड दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे देश की सबसे महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक है। यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र को आपस में जोड़ेगा। इस परियोजना का निर्माण केंद्र सरकार लगभग 1 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से करा रही है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि Expressway के पूरा होने से प्रमुख औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार होगा। साथ ही, दिल्ली और मुंबई के बीच यातायात अधिक तेज, सुगम और सुरक्षित होगा, जिससे यात्रा समय के साथ-साथ Logistics लागत में भी कमी आने की उम्मीद है।
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने परियोजना के निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा की और अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता मानकों के साथ काम पूरा करने के निर्देश दिए।
JNPA कनेक्टिविटी से बड़ा लाभ
उन्होंने कहा कि इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (JNPA) से इसकी सीधी connectivity होगा। इससे उत्तर भारत से बंदरगाह तक माल ढुलाई तेज़, कम लागत वाली और अधिक कुशल बनेगी, जिससे देश के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूती मिलेगी और व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा।
Delhi-Mumbai Expressway के वडोदरा-मुंबई कॉरिडोर के तहत महाराष्ट्र में बनने वाले 157 किलोमीटर लंबे हिस्से के निर्माण पर करीब 24,000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस सेक्शन को सात निर्माण पैकेजों में विभाजित किया गया है, जिनमें से पांच का काम पूरा हो चुका है और वे यातायात के लिए तैयार हैं। शेष दो पैकेजों का निर्माण अगस्त 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि निर्धारित समयसीमा के अनुसार 31 अगस्त 2026 तक महाराष्ट्र में एक्सप्रेसवे का पूरा हिस्सा वाहनों के लिए खोल दिया जाएगा।
Massive Travel Time Reduction
Vadodara-Mumbai section के शुरू होने के बाद दोनों शहरों के बीच सड़क यात्रा का समय मौजूदा लगभग आठ घंटे से घटकर करीब चार घंटे रह जाएगा। आधिकारिक बयान के अनुसार, इस एक्सप्रेसवे से व्यापारिक परिवहन को गति मिलेगी, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क अधिक प्रभावी होगा और यात्रियों को तेज़, सुरक्षित तथा जाम-मुक्त सफर का अनुभव मिलेगा।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद ठाणे, भिवंडी और घोड़बंदर मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव काफी कम होगा। साथ ही, जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (JNPA) तक माल ढुलाई अधिक तेज़, सुगम और किफायती हो जाएगी। इससे परिवहन में समय और ईंधन की बचत होगी तथा कार्गो की आवाजाही के लिए अधिक भरोसेमंद और कुशल मार्ग उपलब्ध होगा।
उन्होंने कहा कि यह परियोजना केवल देश के बुनियादी ढांचे को ही मजबूत नहीं करेगी, बल्कि उत्तर और पश्चिम भारत के प्रमुख Industrial क्षेत्रों को मुंबई के पोर्ट नेटवर्क से बेहतर तरीके से जोड़ेगी। इससे निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, उद्योगों में निवेश बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे क्या है?
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे भारत का सबसे लंबा एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है, जिसकी लंबाई लगभग 1,386 किलोमीटर है।
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) द्वारा विकसित यह आठ-लेन एक्सप्रेसवे हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र से होकर दिल्ली को मुंबई से जोड़ता है।
करीब 1 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना का उद्देश्य यात्रा समय को कम करना, सड़क सुरक्षा को बढ़ाना और आर्थिक विकास को गति देना है। यह एक्सप्रेसवे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों, लॉजिस्टिक्स पार्कों और बंदरगाहों, जैसे कि JNPA, के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करता है। इससे परिवहन लागत घटती है, व्यापार को बढ़ावा मिलता है और माल की तेज आवाजाही संभव होती है, साथ ही रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं।
वडोदरा–मुंबई सेक्शन क्यों महत्वपूर्ण है?
वडोदरा–मुंबई सेक्शन इस पूरे एक्सप्रेसवे का एक अहम हिस्सा है क्योंकि यह गुजरात के औद्योगिक क्षेत्रों को सीधे मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन से जोड़ता है। इसके शुरू होने के बाद वडोदरा और मुंबई के बीच यात्रा समय लगभग 8 घंटे से घटकर 4 घंटे रह जाएगा।
यह सेक्शन JNPA (जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी) तक सीधी और तेज़ पहुंच सुनिश्चित करता है, जिससे एक्सपोर्ट-इंपोर्ट लॉजिस्टिक्स अधिक प्रभावी हो जाता है और ट्रांसपोर्ट लागत कम होती है। साथ ही यह ठाणे, भिवंडी और घोड़बंदर जैसे व्यस्त रूटों पर ट्रैफिक दबाव को भी कम करता है।
कुल मिलाकर, यह सेक्शन व्यापारिक दक्षता को बढ़ाता है, औद्योगिक कनेक्टिविटी को मजबूत करता है और पश्चिमी भारत के प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग और कमर्शियल कॉरिडोर में आर्थिक विकास को गति देता है।

