हरदीप पुरी ने विपक्ष पर पेट्रोल की कीमतों को लेकर वोटरों को गुमराह करने का आरोप लगाया और कहा कि भारत ने कूटनीति और अलग-अलग स्रोतों से तेल मंगाकर ग्लोबल एनर्जी संकट का सामना किया।
सरकारी बचाव और विपक्ष पर आरोप
सोमवार को केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ईंधन की कीमतों पर सरकार के काम का बचाव किया। उन्होंने कहा कि ग्राहकों को कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बुरे असर से बचाया गया है और देश की राजधानी में पेट्रोल की कीमत चार साल पहले की तुलना में अब भी कम है, जबकि दुनिया में एनर्जी का बड़ा संकट आया था।
एनर्जी संकट पर सरकार का रुख
पुरी ने पेट्रोल की कीमतों पर विपक्ष की आलोचना का जवाब देते हुए कहा कि कई अंतरराष्ट्रीय संकटों के दौरान एनर्जी सेक्टर को संभालने के सरकार के तरीके ने भारतीय ग्राहकों की सुरक्षा करने की उसकी क्षमता को साबित किया है।
पुरी ने बताया कि संकट भारत के बाहर शुरू हुए थे। उन्होंने फरवरी 2022 (रूस-यूक्रेन संघर्ष की शुरुआत) और फरवरी 2026 (ईरान युद्ध की शुरुआत) में आई बड़ी रुकावटों का ज़िक्र किया।
“हमने आखिरी बार फरवरी 2022 में कीमतें बढ़ाई थीं। तब से हमने दरें कम की हैं,” पुरी ने कहा और बताया कि सरकार ने अंतरराष्ट्रीय एनर्जी मार्केट में आई रुकावटों का सामना कैसे किया।
ग्लोबल हालात और भारत की स्थिति
“ये चीजें हमने नहीं कीं। दुनिया ने ऐसा पहले कभी नहीं देखा,” उन्होंने कहा। उन्होंने कहा कि इन मुश्किलों के बावजूद भारत पर इस उथल-पुथल का बहुत बुरा असर नहीं पड़ा।
पुरी ने कहा, “भले ही ग्लोबल हालात चिंताजनक हों, लेकिन हमारी स्थिति बहुत खराब नहीं है,” क्योंकि अब भारत के पास काफी हद तक “एनर्जी ऑटोनॉमी” (ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता) और “संप्रभुता” है।
मंत्री ने विपक्षी दलों की आलोचना करते हुए राज्यों में टैक्स के अंतर की ओर इशारा किया और पेट्रोल-डीजल की कीमतों के बारे में उनके दावों को चुनौती दी। साथ ही, उन्होंने कहा कि केंद्र की आलोचना इसलिए कमज़ोर पड़ जाती है क्योंकि विपक्ष शासित कई राज्यों में पेट्रोल की कीमतें बीजेपी शासित राज्यों की तुलना में अब भी ज़्यादा हैं।
🇮🇳 भारत की ऊर्जा रणनीति
- नीति: कूटनीति और विविध तेल स्रोत
- लक्ष्य: ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ाना
- प्रभाव: वैश्विक संकट में स्थिरता
- फोकस: उपभोक्ता सुरक्षा
- परिणाम: कीमतों में नियंत्रण बनाए रखना
“बीजेपी शासित राज्यों की तुलना में दूसरे राज्यों में पेट्रोल और ईंधन महंगा क्यों है? इससे पता चलता है कि यह आरोप कितना बेतुका है,” उन्होंने कहा। पुरी की ये बातें पेट्रोल की कीमतों को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच आई हैं, जिसमें विपक्षी दल अक्सर सरकार पर ग्राहकों पर बोझ डालने का आरोप लगाते रहे हैं।
वैश्विक ऊर्जा संकट और भारत की प्रतिक्रिया
पुरी ने केंद्र के काम का बचाव करते हुए कहा कि सरकार घरेलू ग्राहकों पर वैश्विक घटनाओं के असर को कम करने में सफल रही है। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री ने दिखाया है कि इस मुद्दे को कम से कम असर के साथ कैसे संभाला जा सकता है।” मंत्री का दावा है कि ग्लोबल एनर्जी मार्केट में भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद पेट्रोल की रिटेल कीमतें काफी हद तक स्थिर रही हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि बहुत ज़्यादा जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता के समय में भी सरकार ने कंज्यूमर के भले को सबसे ऊपर रखा है।
⚠️ पेट्रोल कीमत और वैश्विक संकट
- कारण: रूस-यूक्रेन और अन्य वैश्विक संकट
- प्रभाव: तेल बाजार में उतार-चढ़ाव
- नीति: भारत की कूटनीतिक ऊर्जा रणनीति
- नतीजा: कीमतों में अपेक्षाकृत स्थिरता
- फोकस: उपभोक्ता हित की सुरक्षा
इसके अलावा, पुरी ने उन दावों को खारिज कर दिया कि पेट्रोल की कीमतें चुनावी चक्र से प्रभावित होती हैं। उन्होंने कहा, “2024 में आम चुनाव के साथ-साथ महाराष्ट्र, हरियाणा और अन्य राज्यों में भी चुनाव हुए, लेकिन कीमतें नहीं बढ़ीं।”
पुरी ने कहा कि पिछले कुछ साल दुनिया की एनर्जी इंडस्ट्री के लिए सबसे मुश्किल समय रहे हैं। उन्होंने कहा, “ये बारह साल अद्भुत रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि पीएम नरेंद्र मोदी ने तीसरी बार चुने जाने के लिए क्या-क्या किया है।”
पुरी ने सप्लाई में रुकावटों का सामना करने की भारत की क्षमता का श्रेय सरकार के एनर्जी सोर्स में विविधता लाने के लक्ष्य और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अंतरराष्ट्रीय नेताओं के साथ कूटनीतिक बातचीत को दिया।
उन्होंने कहा, “एक तो असाधारण राजनेता के तौर पर लोगों तक पहुंचना और शिखर सम्मेलन के स्तर पर समझौते करना है। प्रधानमंत्री अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों से बातचीत कर रहे हैं। हमारे पास कई तरह के सोर्स हैं।”
मंत्री ने कहा कि भारत अभी कई देशों के बहुत बड़े नेटवर्क से बिजली हासिल कर रहा है। उन्होंने कहा, “हम दुनिया भर के 41 देशों से बिजली खरीद रहे हैं।” पुरी ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में रुकावटों से होने वाली मुश्किलों पर भी ज़ोर दिया, जहां से भारत का बहुत सारा एनर्जी इंपोर्ट होता है।
उन्होंने कहा, “सभी मुश्किलों के बावजूद, जब होर्मुज जलडमरूमध्य जाम हो गया और बंद हो गया, तब भी हम कीमतों को कम बनाए रखने में कामयाब रहे। हम अपना 90% कच्चा तेल और लगभग 60% LPG यहीं से इंपोर्ट करते हैं।”
उन्होंने माना कि रुकावट के कारण दुनिया भर में तेल की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई और कहा, “हां, रुकावट आई थी।” पुरी ने कहा कि इन मुश्किलों के बावजूद कंज्यूमर की सुरक्षा सरकार की रणनीति का एक अहम हिस्सा बनी रही।
उन्होंने कहा कि सरकार के पेट्रोल की कीमतों के इतिहास से पता चलता है कि “कंज्यूमर की सुरक्षा करना पीएम मोदी के लिए सिर्फ़ भरोसे की बात नहीं है।”
Disclaimer: यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से तैयार किया गया है और किसी आधिकारिक नीति घोषणा का विकल्प नहीं है।
