यह रिपोर्ट पश्चिम एशिया संकट के बावजूद भारत की ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति की स्थिति को स्पष्ट करती है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, पश्चिम एशिया में मौजूदा संकट के बावजूद, देश की प्राकृतिक गैस, एलपीजी और कच्चे तेल की आपूर्ति स्थिर है।
ऊर्जा आपूर्ति पर सरकार का बयान
मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण खनूजा ने आज दोपहर नई दिल्ली में एक अंतर-मंत्रालयी बैठक में कहा कि देश भर में गैसोलीन, डीजल और एलपीजी की पर्याप्त आपूर्ति उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने और निरंतर ईंधन आपूर्ति की गारंटी के लिए प्रशासन ने कई कदम उठाए हैं।
श्री खनूजा के अनुसार, घरेलू रिफाइनरियों और गैस प्रसंस्करण सुविधाओं ने कल लगभग 53,000 मीट्रिक टन का उत्पादन किया, जो संकट से पहले की तुलना में लगभग 60% अधिक है। अतिरिक्त सचिव के अनुसार, देश में ईंधन का पर्याप्त भंडार होने के कारण पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति को लेकर चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।
उत्पादन और भंडारण की स्थिति
⛽ भारत की ऊर्जा आपूर्ति स्थिति
- स्थिति: कच्चा तेल, गैस और एलपीजी आपूर्ति स्थिर
- उत्पादन: 53,000 मीट्रिक टन दैनिक उत्पादन
- सुरक्षा: ऊर्जा सुरक्षा के लिए सरकारी कदम
- भंडार: पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध
- निष्कर्ष: कोई आपूर्ति संकट नहीं
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव अपर्णा शर्मा ने मीडिया को बताया कि देश के कुल उर्वरक भंडार की स्थिति आरामदायक है। उनके अनुसार, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने इस वर्ष के खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों की आवश्यकता का पुनर्मूल्यांकन किया है, जिसका अनुमान है कि यह 380 लाख मीट्रिक टन से अधिक होगी।
उर्वरक आपूर्ति और कृषि तैयारी
सचिव के मुताबिक, किसानों ने करीब 86 लाख मीट्रिक टन खाद खरीदी है, जो जरूरत का 23 फीसदी से ज्यादा है. उनके मुताबिक, फिलहाल देशभर में उर्वरक आपूर्ति को लेकर कोई खास समस्या नहीं है।
🌾 उर्वरक और कृषि स्थिति
- भंडार: देश में पर्याप्त उर्वरक स्टॉक
- आवश्यकता: 380 लाख मीट्रिक टन अनुमान
- खरीद: 86 लाख मीट्रिक टन पहले ही खरीदा गया
- स्थिति: कोई गंभीर कमी नहीं
- तैयारी: खरीफ सीजन के लिए योजना मजबूत
Disclaimer: यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से तैयार किया गया है और सरकारी नीति का आधिकारिक विकल्प नहीं है अनौपचारिक जानकारी स्रोत।

