Income Plus Arbitrage Fund: Tax Benefit के साथ कैसा है रिटर्न?

इनकम प्लस आर्बिट्राज फंड ने बाजार में आने के बाद तेजी से अपनी जगह बनाई है। दो साल से भी कम समय में इस श्रेणी में 22 योजनाएं शामिल हो चुकी हैं। इस साल HDFC Mutual Fund और Sundaram Mutual Fund जैसे बड़े फंड हाउस भी इस क्षेत्र में आए हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य ऐसे निवेशकों को बेहतर कर-बाद रिटर्न देने की कोशिश करना है, जो अपेक्षाकृत स्थिर आय वाले विकल्प तलाश रहे हैं।

इनकम प्लस आर्बिट्राज फंड में निवेशकों की दिलचस्पी

हालांकि, हाल के आंकड़ों से पता चलता है कि निवेशकों की दिलचस्पी कुछ कम हुई है। वर्ष 2025 में इन फंडों में करीब 21,000 करोड़ रुपये आए थे, लेकिन 2026 के पहले सात महीनों में 31 जुलाई तक निवेशकों ने लगभग 2,000 करोड़ रुपये निकाल लिए। यह आंकड़ा Icra Analytics के फंड शोध मंच से सामने आया है।

इन फंडों में मुख्य रूप से डेट निवेश और आर्बिट्राज रणनीति का इस्तेमाल किया जाता है। डेट निवेश से ब्याज के रूप में आय हासिल करने की कोशिश होती है, जबकि आर्बिट्राज रणनीति में नकद और वायदा बाजार के बीच कीमतों के अंतर से फायदा उठाने का प्रयास किया जाता है। इसलिए इन योजनाओं को ऐसे निवेशकों के लिए तैयार किया गया है, जो डेट और आर्बिट्राज दोनों का मिश्रण चाहते हैं।

टैक्स व्यवस्था इस श्रेणी की खासियत

इन फंडों की सबसे बड़ी खासियतों में से एक इनका कर ढांचा है। ऐसी योजनाओं में कम से कम 35 प्रतिशत पैसा आर्बिट्राज फंड में लगाया जाता है। इस वजह से इन्हें इक्विटी आधारित कर व्यवस्था का लाभ मिल सकता है। खास तौर पर ज्यादा कर वाली श्रेणी में आने वाले निवेशकों के लिए इससे पारंपरिक डेट फंड की तुलना में कर कटने के बाद मिलने वाला रिटर्न बेहतर हो सकता है।

हालांकि, यह श्रेणी अभी नई है और इसके प्रदर्शन का लंबा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। हाल के प्रदर्शन को देखें तो तस्वीर पूरी तरह एक जैसी नहीं रही है। इन फंडों ने मनी मार्केट और आर्बिट्राज फंड की तुलना में कम रिटर्न दिया है, लेकिन कुछ पारंपरिक डेट श्रेणियों से इनका प्रदर्शन थोड़ा बेहतर रहा है।

💰 इनकम प्लस आर्बिट्राज फंड की मुख्य बातें

  • कुल योजनाएं: 22
  • 2025 में निवेश: करीब 21,000 करोड़ रुपये
  • 2026 के पहले सात महीने: करीब 2,000 करोड़ रुपये की निकासी
  • आर्बिट्राज निवेश: कम से कम 35 प्रतिशत
  • मुख्य निवेश: डेट और आर्बिट्राज रणनीति
  • मुख्य उद्देश्य: कर-बाद रिटर्न को बेहतर करने का प्रयास

रिटर्न के आंकड़े क्या बताते हैं?

Value Research के आंकड़ों के अनुसार, 11 अगस्त तक एक साल की अवधि में इनकम प्लस आर्बिट्राज फंड का औसत रिटर्न 5.7 प्रतिशत रहा। इसी अवधि में मनी मार्केट फंड ने औसतन 6.22 प्रतिशत और आर्बिट्राज फंड ने 5.73 प्रतिशत रिटर्न दिया। शॉर्ट अवधि वाले डेट फंड का औसत रिटर्न 5.33 प्रतिशत और कॉरपोरेट डेट फंड का 5.43 प्रतिशत रहा।

पारंपरिक डेट फंड के विपरीत इनकम प्लस आर्बिट्राज फंड किसी एक तय अवधि या क्रेडिट गुणवत्ता पर आधारित रणनीति का पालन नहीं करते। ये अलग-अलग तरह के डेट फंड में निवेश कर सकते हैं। निवेश एक ही फंड कंपनी के भीतर या अलग-अलग फंड कंपनियों की योजनाओं में भी किया जा सकता है। इसी वजह से इनकी सीधी तुलना शॉर्ट अवधि, लंबी अवधि या किसी खास क्रेडिट गुणवत्ता वाले डेट फंड से करना आसान नहीं है।

इस श्रेणी की शुरुआत कैसे हुई?

इस श्रेणी को पहले डेट एडवांटेज फंड के नाम से जाना जाता था और यह 2024 में सामने आई थी। इसे ऐसे निवेशकों के लिए कर बचत वाले विकल्प के रूप में पेश किया गया था, जो सीधे इक्विटी जोखिम लिए बिना डेट जैसे रिटर्न की तलाश में थे। वर्तमान में मौजूद 22 योजनाओं में कुछ ऐसी योजनाएं भी हैं, जिन्हें पहले से चल रही डेट रणनीतियों को नए ढांचे के तहत पेश करके बनाया गया है।

आमतौर पर इन योजनाओं में कम से कम 35 प्रतिशत पैसा आर्बिट्राज फंड में और बाकी हिस्सा डेट फंड में लगाया जाता है। आर्बिट्राज फंड आम तौर पर नकद बाजार में शेयर खरीदते हैं और साथ ही वायदा या अन्य डेरिवेटिव के जरिए जोखिम को संतुलित करने की कोशिश करते हैं। 35 प्रतिशत निवेश की यह सीमा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पूरी योजना को इक्विटी आधारित कर व्यवस्था के लिए पात्र होने में मदद मिल सकती है।

⚠️ निवेश से पहले इन बातों पर दें ध्यान

  • निवेश अवधि: कम से कम दो से तीन साल का नजरिया
  • कर श्रेणी: 25 प्रतिशत या उससे अधिक कर श्रेणी वाले निवेशकों के लिए उपयोगी हो सकता है
  • जोखिम: निवेश में जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं होता
  • लागत: योजना की लागत को समझना जरूरी है
  • संरचना: डेट और आर्बिट्राज में निवेश का अनुपात देखें
  • फैसला: केवल कर लाभ देखकर निवेश न करें

दो साल से ज्यादा निवेश पर टैक्स का असर

अगर निवेश को दो साल या उससे ज्यादा समय तक रखा जाता है, तो लाभ पर 12.5 प्रतिशत की दर से कर लग सकता है। इसके मुकाबले पारंपरिक डेट फंड से मिलने वाले रिटर्न पर आम तौर पर निवेशक की आयकर श्रेणी के अनुसार कर लगता है। ज्यादा आय वाली श्रेणी में यह दर 30 प्रतिशत से भी अधिक हो सकती है। हालांकि, वास्तविक कर देनदारी निवेश की स्थिति और लागू कर नियमों पर निर्भर करेगी।

वित्तीय जानकारों के अनुसार, ये फंड उन निवेशकों के लिए ज्यादा उपयुक्त हो सकते हैं जो 25 प्रतिशत या उससे अधिक कर श्रेणी में आते हैं और कम से कम दो से तीन साल के लिए पैसा निवेश कर सकते हैं। फिर भी केवल कर लाभ देखकर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए। योजना की लागत, जोखिम, निवेश की संरचना और पिछले प्रदर्शन जैसे पहलुओं को भी समझना जरूरी है।

Kotak और ICICI Prudential की योजनाओं में कितना निवेश?

इस श्रेणी की दो बड़ी योजनाओं में Kotak Income Plus Arbitrage Omni Fund of Funds और ICICI Prudential Income Plus Arbitrage Omni Fund शामिल हैं। जुलाई के अंत में इनके पास क्रमशः करीब 7,900 करोड़ रुपये और 3,200 करोड़ रुपये की संपत्ति थी। दोनों योजनाओं में अच्छी गुणवत्ता वाले डेट साधनों में काफी निवेश किया गया है।

Kotak की योजना में करीब 30 से 32 प्रतिशत हिस्सा कॉरपोरेट डेट फंड में, 8 से 10 प्रतिशत राज्य विकास ऋण से जुड़े फंड में और लगभग 20 प्रतिशत शॉर्ट अवधि वाले डेट फंड में लगाया गया है। वहीं ICICI Prudential की योजना में भी करीब 30 से 32 प्रतिशत निवेश कॉरपोरेट डेट फंड में और 8 से 10 प्रतिशत राज्य विकास ऋण में है। इसके अलावा करीब 13 प्रतिशत हिस्सा सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले गिल्ट फंड में लगाया गया है।

निवेश में जोखिम को समझना जरूरी

दोनों योजनाओं में डेट निवेश का बड़ा हिस्सा AAA रेटिंग वाली प्रतिभूतियों में है। ऐसी प्रतिभूतियों को आम तौर पर डिफॉल्ट का अपेक्षाकृत कम जोखिम वाला माना जाता है। फिर भी किसी भी निवेश में जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं होता। इसलिए निवेशक को अपनी जोखिम क्षमता, निवेश अवधि और कर स्थिति को ध्यान में रखकर ही इन फंडों पर विचार करना चाहिए।

Disclaimer: यह जानकारी केवल समाचार उद्देश्य के लिए है। निवेश से पहले जोखिम, कर नियम और योजना की शर्तों को समझें।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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