भारत में खुदरा महंगाई जून 2026 में बढ़कर 4.38 प्रतिशत पर पहुंच गई है। यह जनवरी 2025 के बाद पहली बार है जब महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4 प्रतिशत के मध्य लक्ष्य से ऊपर गई है। यह जानकारी सोमवार को सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय की ओर से जारी शुरुआती आंकड़ों में दी गई। इससे पहले अर्थशास्त्रियों ने जून में महंगाई दर करीब 4.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था।
जून 2026 में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.38 प्रतिशत पहुंची
जनवरी 2026 से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) की नई श्रृंखला लागू की गई है, जिसका आधार वर्ष 2024 रखा गया है। इसलिए जून 2026 के आंकड़ों की सीधे पिछले साल के इसी महीने से तुलना नहीं की जा सकती। नई श्रृंखला के अनुसार जनवरी में महंगाई 2.74 प्रतिशत, फरवरी में 3.21 प्रतिशत, मार्च में 3.40 प्रतिशत, अप्रैल में 3.48 प्रतिशत और मई में 3.93 प्रतिशत दर्ज की गई थी। अब जून में यह बढ़कर 4.38 प्रतिशत हो गई है।
हालांकि महंगाई अभी भी आरबीआई की तय सीमा 2 से 6 प्रतिशत के भीतर है, लेकिन अगर आने वाले महीनों में इसमें और बढ़ोतरी होती है तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने पर विचार कर सकता है। इससे कर्ज महंगा हो सकता है और आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। जून में आरबीआई ने भी चालू वित्त वर्ष के लिए महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया था। इससे पहले यह अनुमान 4.6 प्रतिशत था। आरबीआई ने सामान्य से कमजोर मानसून, एल नीनो की संभावना और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी को इसके प्रमुख कारण बताया था।
📊 जून 2026 महंगाई के प्रमुख आंकड़े
- खुदरा महंगाई: 4.38 प्रतिशत
- आरबीआई लक्ष्य: 4 प्रतिशत
- महंगाई सीमा: 2 से 6 प्रतिशत
- मई 2026: 3.93 प्रतिशत
- जून अनुमान: 4.2 प्रतिशत के आसपास
- आधार वर्ष: 2024 (नई CPI श्रृंखला)
आरबीआई और महंगाई को लेकर बढ़ी चिंता
पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर भी भारतीय अर्थव्यवस्था पर देखने को मिला है। इससे रुपये पर दबाव बढ़ा है और महंगाई के साथ आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ने का खतरा बना हुआ है। हालांकि वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में देश की जीडीपी वृद्धि 7.8 प्रतिशत रही और पूरे वित्त वर्ष की विकास दर 7.7 प्रतिशत दर्ज की गई।
आरबीआई का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर घटकर 6.6 प्रतिशत रह सकती है। विश्व बैंक ने भी इसी वित्त वर्ष के लिए 6.6 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया है। वहीं एशियाई विकास बैंक ने भी पहले जारी 6.9 प्रतिशत के अनुमान को घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है।
🏦 आरबीआई और अर्थव्यवस्था पर असर
- संभावित असर: ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना
- रेपो रेट: 5.25 प्रतिशत
- आरबीआई महंगाई अनुमान: 5.1 प्रतिशत
- FY 2026-27 वृद्धि अनुमान: 6.6 प्रतिशत
- प्रमुख कारण: कमजोर मानसून, एल नीनो और ऊर्जा कीमतें
- वैश्विक असर: पश्चिम एशिया तनाव और कच्चे तेल की कीमतों पर नजर
नई सीपीआई श्रृंखला और आर्थिक वृद्धि का अनुमान
महंगाई की नई गणना 2023-24 के घरेलू उपभोग सर्वे के आधार पर तैयार की गई है। इसमें लोगों के खर्च के नए पैटर्न को शामिल किया गया है। नई व्यवस्था में आवास और अन्य जरूरी खर्चों को पहले की तुलना में अधिक महत्व दिया गया है, जबकि खाद्य वस्तुओं का हिस्सा कुछ कम किया गया है। इससे महंगाई के आंकड़े पहले के मुकाबले अलग तरीके से सामने आ सकते हैं और नीति बनाने में सरकार तथा आरबीआई को अधिक ताजा जानकारी मिल सकेगी।
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने 5 जून की बैठक में रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर ही बनाए रखने का फैसला किया था। समिति ने फिलहाल किसी बदलाव के बजाय स्थिति पर नजर रखने की रणनीति अपनाई है। केंद्रीय बैंक का कहना है कि वह कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है।
Disclaimer: यह जानकारी आधिकारिक आंकड़ों और सार्वजनिक रिपोर्टों पर आधारित है। आर्थिक परिस्थितियां समय के साथ बदल सकती हैं।
