कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) के अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकार को उनके पद से निलंबित कर दिया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपनी दोनों बेटियों की इंडस्ट्रियल एक्सटेंशन ऑफिसर के पद पर भर्ती में नियमों का गलत फायदा पहुंचाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्यपाल ने राष्ट्रपति से संविधान के अनुच्छेद 317(1) के तहत इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट से कराने की सिफारिश भी की है। जांच पूरी होने तक आयोग के सबसे वरिष्ठ सदस्य को अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने का निर्देश दिया गया है।
केपीएससी अध्यक्ष पर बेटियों की भर्ती में नियमों के उल्लंघन का आरोप
राज्यपाल सचिवालय के अनुसार, उन्हें इस भर्ती प्रक्रिया को लेकर कई शिकायतें मिली थीं। आरोप है कि जिस भर्ती प्रक्रिया की जिम्मेदारी खुद शिवशंकरप्पा साहूकार के पास थी, उसी में उनकी दोनों बेटियां उम्मीदवार थीं। इसके बावजूद उन्होंने खुद को इस प्रक्रिया से अलग नहीं किया और न ही हितों के टकराव की जानकारी दी।
शिकायतों में यह भी कहा गया है कि उनकी एक बेटी ने परिवार की सालाना आय केवल 40 हजार रुपये बताकर आय और जाति प्रमाण पत्र बनवाया। आरोप है कि उसने ओबीसी आरक्षण और क्रीमी लेयर से छूट का लाभ लेने के लिए यह जानकारी छिपाई कि उसके पिता उस समय केपीएससी के अध्यक्ष थे।
आरक्षण लाभ लेने को लेकर उठे सवाल
रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक सरकार की 30 मार्च 2002 की अधिसूचना में साफ कहा गया है कि लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के बच्चों को राज्य के पिछड़ा वर्ग आरक्षण का लाभ नहीं मिल सकता। आरोप है कि इस नियम को छिपाकर भर्ती प्रक्रिया में अनुचित लाभ लेने की कोशिश की गई।
प्रारंभिक जांच के दौरान आय, संपत्ति और अन्य दस्तावेजों की जांच में भी ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनके आधार पर राज्यपाल ने माना कि मामले की गहराई से जांच जरूरी है। इसी कारण उन्होंने राष्ट्रपति को सुप्रीम कोर्ट से जांच कराने की सिफारिश भेजी है।
सुप्रीम कोर्ट जांच तक निलंबित रहेंगे केपीएससी अध्यक्ष
आदेश में कहा गया है कि राष्ट्रपति की ओर से अगला फैसला आने तक शिवशंकरप्पा साहूकार निलंबित रहेंगे। इसका उद्देश्य केपीएससी की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखना है, ताकि जांच किसी भी तरह के दबाव या प्रभाव के बिना पूरी हो सके।
Disclaimer: यह जानकारी उपलब्ध रिपोर्टों और आधिकारिक बयानों पर आधारित है।
