विदेशी बाजारों में निवेश करने वाले भारतीय म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए एक नई परेशानी सामने आई है। अब तक कुल 28 अंतरराष्ट्रीय फंड योजनाओं ने पहले से चल रहे SIP की किस्तें लेना बंद कर दिया है।
इसका मुख्य कारण विदेश में निवेश को लेकर तय नियामकीय सीमा बताई जा रही है। इससे उन निवेशकों के विकल्प कम हो सकते हैं जो अपने निवेश को दूसरे देशों के बाजारों तक फैलाना चाहते हैं।
28 अंतरराष्ट्रीय फंड योजनाओं ने SIP किस्तें रोकीं
म्यूचुअल फंड से जुड़े आंकड़ों के अनुसार पीजीआईएम इंडिया ने 8 अगस्त से अपनी तीन अंतरराष्ट्रीय योजनाओं में पहले से चल रही SIP किस्तों को रोक दिया है। वहीं एडेलवाइस म्यूचुअल फंड 12 अगस्त से अपनी छह योजनाओं में ऐसी किस्तें स्वीकार करना बंद करेगा। इन बदलावों का असर केवल भविष्य में जमा होने वाली किस्तों पर पड़ेगा।
पीजीआईएम इंडिया की प्रभावित योजनाओं में ग्लोबल इक्विटी अपॉर्च्युनिटीज फंड, इमर्जिंग मार्केट्स इक्विटी फंड और ग्लोबल सेलेक्ट रियल एस्टेट सिक्योरिटीज फंड शामिल हैं। एडेलवाइस की प्रभावित योजनाओं में आसियान इक्विटी ऑफशोर फंड, ग्रेटर चाइना इक्विटी ऑफशोर फंड, यूएस टेक्नोलॉजी इक्विटी फंड ऑफ फंड, इमर्जिंग मार्केट्स अपॉर्च्युनिटीज इक्विटी ऑफशोर फंड, यूरोप डायनेमिक इक्विटी ऑफशोर फंड और यूएस वैल्यू इक्विटी ऑफशोर फंड शामिल हैं।
जिन निवेशकों का पैसा इन योजनाओं में पहले से लगा हुआ है, उन्हें अपनी मौजूदा इकाइयों को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। अब तक खरीदी गई इकाइयां निवेशित रहेंगी। निवेशक उन्हें अपने पास रख सकते हैं, जरूरत के अनुसार बेच सकते हैं या किसी दूसरी योजना में स्थानांतरित कर सकते हैं। रोक केवल आगे जमा होने वाली SIP किस्तों पर लगाई गई है।
विदेशी फंड में SIP रोकने की बड़ी जानकारी
- 28 अंतरराष्ट्रीय फंड योजनाओं ने मौजूदा SIP किस्तें रोकीं
- रोक का असर आगे जमा होने वाली किस्तों पर है
- पहले से खरीदी गई इकाइयां निवेशित रहेंगी
- पीजीआईएम इंडिया ने तीन योजनाओं में SIP रोकी
- एडेलवाइस छह योजनाओं में SIP रोक रहा है
पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय योजनाओं ने SIP रोकी
पीजीआईएम इंडिया और एडेलवाइस ऐसे कदम उठाने वाले पहले फंड प्रबंधक नहीं हैं। इससे पहले 19 अन्य अंतरराष्ट्रीय योजनाओं ने भी मौजूदा SIP किस्तों को स्वीकार करना बंद कर दिया था। इनमें इनवेस्को, मोतीलाल ओसवाल, एक्सिस म्यूचुअल फंड, कोटक म्यूचुअल फंड, एचडीएफसी म्यूचुअल फंड और मिराए एसेट म्यूचुअल फंड जैसे नाम शामिल हैं। नई नौ योजनाओं के जुड़ने के बाद यह संख्या 28 हो गई है।
हालांकि करीब 40 अंतरराष्ट्रीय योजनाओं में अभी भी पहले से चल रही SIP जारी है। लेकिन नई SIP शुरू करने के विकल्प काफी कम हो गए हैं। मौजूदा जानकारी के अनुसार बड़ौदा बीएनपी पारिबा एक्वा फंड ऑफ फंड ऐसी एकमात्र अंतरराष्ट्रीय योजना है, जिसमें नए निवेशकों के लिए नई SIP शुरू करने की सुविधा उपलब्ध है।
एडेलवाइस म्यूचुअल फंड की प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी राधिका गुप्ता ने कहा कि मौजूदा SIP को रोकना कंपनी की पसंद नहीं थी। उन्होंने बताया कि विदेश में निवेश को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक की मौजूदा सीमा के कारण ऐसा करना पड़ा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि SIP को बंद नहीं किया गया है, बल्कि फिलहाल रोका गया है। अगर भविष्य में निवेश की सीमा बढ़ती है या अतिरिक्त जगह उपलब्ध होती है तो इसे फिर से शुरू किया जा सकता है।
विदेशी निवेश की सीमा बनी बड़ी वजह
अंतरराष्ट्रीय फंडों पर बढ़ती पाबंदियों के पीछे विदेश में निवेश की कुल सीमा एक बड़ी वजह है। भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग के लिए विदेश में निवेश की सामूहिक सीमा करीब 7 अरब डॉलर है। यह सीमा 2022 की शुरुआत से नहीं बदली है। इस दौरान विदेशी बाजारों में निवेश का आकार बढ़ा है, इसलिए कई फंड कंपनियों के पास विदेश में नया पैसा लगाने की गुंजाइश कम हो गई है।
इसके अलावा हर फंड कंपनी के लिए भी अलग सीमा तय है। प्रत्येक कंपनी को विदेश में करीब एक अरब डॉलर तक निवेश करने की अनुमति है। इसलिए किसी एक कंपनी की अपनी सीमा पूरी हो जाने पर उसकी कई योजनाओं में नए निवेश या मौजूदा SIP पर रोक लग सकती है, भले ही पूरे उद्योग की सीमा में कुछ जगह बची हो।
विदेशी निवेश की सीमा का असर
- सामूहिक विदेशी निवेश सीमा करीब 7 अरब डॉलर
- यह सीमा 2022 की शुरुआत से नहीं बदली है
- हर फंड कंपनी के लिए करीब एक अरब डॉलर की अलग सीमा
- नई SIP शुरू करने के विकल्प सीमित हो रहे हैं
- विदेशी बाजारों में निवेश करने वाले निवेशकों पर असर
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है
इन नियमों का असर उन भारतीय निवेशकों पर पड़ रहा है जो अपने पोर्टफोलियो में विदेशी कंपनियों और बाजारों को शामिल करना चाहते हैं। विदेशी बाजारों में निवेश करने का उद्देश्य अक्सर अलग-अलग देशों और क्षेत्रों में पैसा फैलाकर जोखिम को संतुलित करना होता है। लेकिन निवेश सीमा के कारण फिलहाल ऐसे विकल्प सीमित होते जा रहे हैं।
निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि SIP रुकने का मतलब यह नहीं है कि पहले से निवेश किया गया पैसा वापस लिया जा रहा है। मौजूदा निवेश सामान्य रूप से योजना में बना रह सकता है। हालांकि भविष्य की किस्तों के रुकने से निवेश की नियमित प्रक्रिया प्रभावित होगी। किसी भी योजना में बदलाव करने से पहले निवेशक को संबंधित फंड की नई जानकारी और नियमों को ध्यान से देखना चाहिए।
यह जानकारी केवल सामान्य समझ के लिए है। किसी भी निवेश का फैसला लेने से पहले निवेशक को अपनी आर्थिक स्थिति, जोखिम क्षमता और लक्ष्य को ध्यान में रखना चाहिए तथा जरूरत पड़ने पर पंजीकृत वित्तीय सलाहकार से सलाह लेनी चाहिए।
अस्वीकरण: निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है, इसलिए निर्णय लेने से पहले संबंधित दस्तावेज और नियमों की जानकारी जरूर जांचें।
