यूरोप में पर्यावरण संगठन **Transport & Environment (T&E)** ने यूरोपीय संघ (EU) से अंतरराष्ट्रीय ट्रेन टिकटों पर लगने वाले वैट (VAT) को पूरी तरह खत्म करने की मांग की है। संगठन का मानना है कि इससे सीमा पार रेल यात्रा सस्ती होगी, यात्रियों की संख्या बढ़ेगी और लोग छोटी दूरी की हवाई यात्रा के बजाय ट्रेन को प्राथमिकता देंगे।
जुलाई 2026 में जारी अपनी रिपोर्ट में संगठन ने कहा कि यूरोपीय संघ को यात्रा और पर्यटन से जुड़े वैट नियमों की समीक्षा करते समय अंतरराष्ट्रीय यात्री रेल सेवाओं को टैक्स से छूट देनी चाहिए। साथ ही उसने सुझाव दिया कि विमान और यात्री जहाजों को मिलने वाली मौजूदा कर छूट पर भी दोबारा विचार किया जाए।
संगठन के अनुमान के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय ट्रेन टिकटों पर वैट हटाने से यूरोपीय देशों के सरकारी खजाने पर हर साल लगभग 106 से 117 मिलियन यूरो का असर पड़ सकता है। वर्तमान में क्रोएशिया, जर्मनी, स्पेन, बेल्जियम और नीदरलैंड जैसे कुछ देशों में अंतरराष्ट्रीय रेल टिकटों पर वैट लगाया जाता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि केवल टैक्स में राहत देने से रेल यात्रा को बढ़ावा नहीं मिलेगा। इसके लिए नई ट्रेनों की उपलब्धता बढ़ाना, उत्पादन क्षमता में सुधार करना और रेलवे उद्योग को मजबूत करने के लिए व्यापक औद्योगिक नीति अपनाना भी जरूरी है। कई रेल ऑपरेटरों को नई ट्रेनें समय पर नहीं मिल पातीं, जिससे नई सेवाएं शुरू करने में देरी होती है।
T&E ने यह भी चेतावनी दी कि अगर छोटी दूरी की उड़ानों की जगह ट्रेनें शुरू की जाती हैं, लेकिन खाली हुए एयरपोर्ट स्लॉट लंबी दूरी की उड़ानों को दे दिए जाते हैं, तो कार्बन उत्सर्जन में अपेक्षित कमी नहीं आएगी। इसलिए एयरपोर्ट विस्तार और स्लॉट आवंटन के नियमों में भी पर्यावरण से जुड़ी शर्तें शामिल करने की मांग की गई है।
संगठन चाहता है कि सीमा पार रेल सेवाओं को बढ़ावा देने वाला यूरोपीय संघ का पायलट कार्यक्रम वर्ष 2035 तक जारी रखा जाए। इससे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय रेल मार्गों पर नई सेवाएं शुरू करने में मदद मिलेगी, जबकि कई परियोजनाएं अभी ट्रेनों की कमी और अन्य चुनौतियों के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।
रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि सीमा पार रेलवे परियोजनाओं के लिए यूरोपीय संघ की वित्तीय सहायता के साथ सदस्य देशों को भी घरेलू रेल नेटवर्क में पर्याप्त निवेश करना चाहिए। इससे नई अंतरराष्ट्रीय रेल सेवाओं को बेहतर और तेज़ घरेलू रेल नेटवर्क का सहयोग मिल सकेगा।