ITR भरते समय न करें गलती! शेयर और म्यूचुअल फंड के कैपिटल गेन के नए नियम जानें

शेयर, म्यूचुअल फंड और अन्य निवेश से होने वाले कैपिटल गेन (पूंजीगत लाभ) को इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में दिखाना अब पहले से ज्यादा ध्यान देने वाला काम हो गया है। बदलते टैक्स नियमों के कारण निवेशकों को अपनी खरीद और बिक्री से जुड़ी जानकारी सही तरीके से दर्ज करनी पड़ती है।

कैपिटल गेन रिपोर्टिंग में हुए बड़े बदलाव

शेयर, म्यूचुअल फंड और अन्य निवेश से होने वाले कैपिटल गेन (पूंजीगत लाभ) को इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में दिखाना अब पहले से ज्यादा ध्यान देने वाला काम हो गया है। पिछले कुछ वर्षों में कैपिटल गेन टैक्स के नियमों में कई बदलाव हुए हैं, जिसके कारण निवेशकों को अपनी खरीद और बिक्री की जानकारी सही तरीके से दर्ज करनी पड़ती है।

डेट फंड यानी डेट म्यूचुअल फंड के मामले में नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। 31 मार्च 2023 तक अगर डेट म्यूचुअल फंड को तीन साल से ज्यादा समय तक रखा जाता था तो उसे लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन माना जाता था और 20 प्रतिशत टैक्स लगता था। लेकिन 1 अप्रैल 2023 के बाद खरीदे गए सभी डेट फंड को शॉर्ट टर्म माना जाता है, चाहे उन्हें कितने भी समय तक रखा गया हो। इन पर निवेशक के टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है।

कैपिटल गेन टैक्स के जरूरी नियम

  • डेट फंड: 1 अप्रैल 2023 के बाद खरीदे गए फंड शॉर्ट टर्म माने जाएंगे
  • इक्विटी निवेश: 12 महीने से ज्यादा अवधि पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन
  • ITR रिपोर्टिंग: सही दस्तावेजों के साथ जानकारी भरना जरूरी
  • जरूरी दस्तावेज: कैपिटल गेन स्टेटमेंट और खरीद-बिक्री रिकॉर्ड
  • लॉस रिपोर्टिंग: कैपिटल लॉस को भी ITR में दिखाना चाहिए

इक्विटी शेयर और म्यूचुअल फंड के लिए नए नियम

इक्विटी शेयर और इक्विटी म्यूचुअल फंड में इस साल रिपोर्टिंग थोड़ी आसान हुई है। पिछले साल 23 जुलाई 2024 से पहले और बाद में बेचे गए शेयरों के लिए अलग-अलग जानकारी देनी पड़ती थी, क्योंकि टैक्स नियमों में बदलाव हुआ था। अब यह अलग-अलग रिपोर्टिंग नहीं करनी होगी। हालांकि, 31 जनवरी 2018 से पहले खरीदे गए शेयरों के लिए पुराने नियमों के अनुसार जानकारी देना जरूरी है।

कैपिटल गेन की जानकारी ITR में भरने से पहले निवेशकों को अपने सभी जरूरी दस्तावेज तैयार रखने चाहिए। शेयर और म्यूचुअल फंड के लिए ब्रोकर या रजिस्ट्रार से मिलने वाला कैपिटल गेन स्टेटमेंट सबसे जरूरी दस्तावेज होता है। इसमें खरीद कीमत, बिक्री राशि और निवेश रखने की अवधि की जानकारी होती है।

ITR भरते समय निवेशकों की सावधानियां

  • कैपिटल गेन स्टेटमेंट: खरीद और बिक्री की सही जानकारी रखें
  • पुराने शेयर: 31 जनवरी 2018 से पहले खरीदे गए शेयरों की जानकारी जरूरी
  • खर्च: ब्रोकरेज और स्टांप ड्यूटी लागत में शामिल हो सकते हैं
  • SIP निवेश: अलग-अलग यूनिट्स पर अलग नियम लागू हो सकते हैं
  • FIFO नियम: पहले खरीदी गई यूनिट पहले बेची जाती है

लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स

अगर किसी ने 31 जनवरी 2018 से पहले शेयर खरीदे हैं तो कुछ मामलों में उस तारीख की फेयर मार्केट वैल्यू (FMV) की जरूरत पड़ सकती है। इसके अलावा शेयर खरीदने या बेचने में हुए खर्च जैसे ब्रोकरेज और स्टांप ड्यूटी को भी लागत में शामिल किया जा सकता है।

शेयर और इक्विटी म्यूचुअल फंड में 12 महीने से ज्यादा समय तक रखे गए निवेश को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन माना जाता है। ऐसे निवेश पर 1.25 लाख रुपये तक की सालाना छूट के बाद 12.5 प्रतिशत टैक्स लगता है। वहीं, 12 महीने से कम समय के निवेश पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स 20 प्रतिशत की दर से लगाया जाता है।

डेट फंड और SIP निवेश में ध्यान रखने वाली बातें

डेट फंड में टैक्स नियमों को समझना थोड़ा मुश्किल हो गया है। 1 अप्रैल 2023 से पहले खरीदे गए डेट फंड को अगर तीन साल से ज्यादा समय तक रखा गया है तो उस पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन का लाभ मिल सकता है और इंडेक्सेशन की सुविधा भी जारी रह सकती है। वहीं, 1 अप्रैल 2023 के बाद खरीदे गए डेट फंड हमेशा शॉर्ट टर्म माने जाएंगे।

डेट फंड में SIP करने वाले निवेशकों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए, क्योंकि अलग-अलग तारीखों में खरीदी गई यूनिट्स पर अलग नियम लागू हो सकते हैं। इसमें आमतौर पर FIFO यानी पहले खरीदी गई यूनिट पहले बेचने के नियम का इस्तेमाल किया जाता है।

ITR में कैपिटल गेन की जानकारी कैसे दर्ज करें

ITR में इक्विटी शेयर और इक्विटी म्यूचुअल फंड की जानकारी Schedule 112A में दर्ज करनी होती है। इसके बाद यह जानकारी Schedule CG यानी Capital Gains में दिखाई जाती है। वहीं, डेट फंड से होने वाले लाभ को Schedule CG में अलग से दर्ज करना पड़ता है।

अगर किसी निवेशक को कैपिटल लॉस हुआ है तो उसे भी ITR में जरूर दिखाना चाहिए। समय पर रिटर्न दाखिल करने पर ऐसे नुकसान को अगले आठ साल तक आगे ले जाकर भविष्य के कैपिटल गेन के साथ एडजस्ट किया जा सकता है।

टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार, कैपिटल गेन की सही गणना और रिपोर्टिंग करना बेहद जरूरी है। निवेशकों को अपनी खरीद-बिक्री की सभी जानकारी मिलाकर देखनी चाहिए, ताकि ITR भरते समय गलती न हो और भविष्य में टैक्स से जुड़ी परेशानियों से बचा जा सके।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य कर नियमों पर आधारित है। टैक्स निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञ सलाह जरूर लें।

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