खरीफ बुआई ने पकड़ी रफ्तार, फिर भी चिंता बरकरार

देश में खरीफ फसलों की बुआई ने मानसून की बारिश में सुधार के बाद रफ्तार पकड़ी है, लेकिन अभी भी पिछले साल के मुकाबले खेती का कुल क्षेत्र कम है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 7 अगस्त तक किसानों ने करीब 9.68 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुआई की है। पिछले साल इसी समय तक 9.86 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई हो चुकी थी। यानी इस साल करीब 18 लाख हेक्टेयर क्षेत्र पीछे है। सामान्य तौर पर 2020-21 से 2024-25 के बीच खरीफ फसलों का औसत क्षेत्र करीब 11.04 करोड़ हेक्टेयर रहा है।

खरीफ फसलों की बुआई अभी पिछले साल से पीछे

मुख्य खरीफ फसलों में चावल, दलहन, मोटे अनाज, गन्ना और कपास की बुआई अभी पिछले साल के स्तर से पीछे चल रही है। हालांकि हाल के सप्ताहों में बारिश बेहतर होने के कारण यह अंतर कम हुआ है। दूसरी ओर तिलहन की खेती में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने इस सप्ताह देश के कई प्रमुख कृषि क्षेत्रों में अच्छी बारिश का अनुमान जताया है। इससे आने वाले दिनों में बुआई का क्षेत्र और बढ़ सकता है।

🌾 खरीफ बुआई की मौजूदा स्थिति

  • कुल बुआई: करीब 9.68 करोड़ हेक्टेयर
  • पिछले साल: करीब 9.86 करोड़ हेक्टेयर
  • अंतर: करीब 18 लाख हेक्टेयर कम
  • तिलहन: बुआई में मामूली बढ़ोतरी
  • बारिश: आने वाले दिनों में अच्छी बारिश का अनुमान

चावल की बुआई करीब 3.44 करोड़ हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक यह आंकड़ा 3.60 करोड़ हेक्टेयर था। यानी चावल की खेती का क्षेत्र करीब 16 लाख हेक्टेयर कम है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, झारखंड, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, बिहार और आंध्र प्रदेश में चावल की बुआई पिछले साल से कम रही है। वहीं तेलंगाना, असम, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और पंजाब में इसमें बढ़ोतरी हुई है।

दलहन की बुआई में कमी, उड़द का क्षेत्र बढ़ा

दलहन की बुआई करीब 1.03 करोड़ हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले साल की तुलना में करीब 1.95 लाख हेक्टेयर कम है। अरहर और मूंग की बुआई में कमी आई है। अरहर का क्षेत्र करीब 2.61 लाख हेक्टेयर और मूंग का क्षेत्र करीब 1.84 लाख हेक्टेयर घटा है। इसके उलट उड़द की खेती में करीब 2.57 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है और इसका कुल क्षेत्र करीब 23 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है।

मोटे अनाज की बुआई भी पिछले साल के मुकाबले कम हुई है। इस साल करीब 1.68 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी बुआई हुई, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 1.73 करोड़ हेक्टेयर था। मक्का और बाजरा की कम बुआई इसका मुख्य कारण रही है। हालांकि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और उत्तराखंड जैसे कुछ राज्यों में बुआई बढ़ी है।

तिलहन के मामले में तस्वीर बेहतर है। इस साल करीब 1.80 करोड़ हेक्टेयर में तिलहन की बुआई हुई है, जबकि पिछले साल यह क्षेत्र करीब 1.75 करोड़ हेक्टेयर था। मूंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी और तिल की खेती बढ़ने से इसमें सुधार हुआ है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, असम, झारखंड, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और उत्तराखंड में तिलहन की बुआई बढ़ी है।

📊 प्रमुख फसलों की बुआई का हाल

  • चावल: करीब 3.44 करोड़ हेक्टेयर
  • दलहन: करीब 1.03 करोड़ हेक्टेयर
  • मोटे अनाज: करीब 1.68 करोड़ हेक्टेयर
  • तिलहन: करीब 1.80 करोड़ हेक्टेयर
  • कपास: करीब 1.06 करोड़ हेक्टेयर
  • गन्ना: करीब 58 लाख हेक्टेयर

कपास की बुआई करीब 1.06 करोड़ हेक्टेयर रही है, जो पिछले साल के करीब 1.064 करोड़ हेक्टेयर से थोड़ी कम है। गन्ने की बुआई भी करीब 31 हजार हेक्टेयर घटकर 58 लाख हेक्टेयर रह गई है।

जुलाई में बारिश से खरीफ बुआई को मिली राहत

मानसून में जुलाई के दौरान अच्छी वापसी हुई है। जुलाई में देश में सामान्य से करीब 1 प्रतिशत अधिक बारिश हुई, जबकि जून में बारिश 35 प्रतिशत कम रही थी। जुलाई में 28.33 करोड़ मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि लंबे समय का औसत 28.05 करोड़ मिलीमीटर है। इससे जून और जुलाई की कुल बारिश की कमी घटकर करीब 12.6 प्रतिशत रह गई।

मौसम विभाग ने 11 से 16 अगस्त के बीच हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और उत्तराखंड में कई स्थानों पर बारिश का अनुमान जताया है। पूर्वी राजस्थान, मध्य प्रदेश, विदर्भ और छत्तीसगढ़ में भी अच्छी बारिश हो सकती है। इससे मिट्टी में नमी बढ़ेगी और खरीफ फसलों की बुआई को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। हालांकि पूरे मौसम की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि आने वाले हफ्तों में बारिश किस तरह रहती है।

अस्वीकरण: यह जानकारी उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित है, मौसम और बुआई के आंकड़े आगे बदल सकते हैं।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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