पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत बड़ी संख्या में लोगों को बिना पैसे दिए इलाज की सुविधा मिली है। राज्य सरकार की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, योजना के तहत सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली 10 प्रमुख चिकित्सा प्रक्रियाओं में कुल 2,44,468 मुफ्त इलाज किए गए हैं। इन उपचारों पर 316.50 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुआ है। इस योजना का उद्देश्य पात्र लोगों को महंगे इलाज के खर्च से राहत देना और जरूरत के समय इलाज उपलब्ध कराना है।
मुख्यमंत्री सेहत योजना में 2.44 लाख से ज्यादा मुफ्त इलाज
जारी आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा इलाज लंबे समय तक डायलिसिस की जरूरत वाले मरीजों का हुआ। योजना के तहत ऐसे मरीजों के लिए 1,87,656 डायलिसिस सत्र कराए गए। इन पर 30.65 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुआ। किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे कई मरीजों को नियमित अंतराल पर डायलिसिस की जरूरत होती है, इसलिए इस सुविधा से ऐसे परिवारों को आर्थिक राहत मिल सकती है।
दूसरे स्थान पर पित्त की थैली से जुड़ी दूरबीन वाली सर्जरी रही। इसके तहत 17,698 मरीजों का इलाज किया गया। वहीं घुटना बदलने की 10,751 सर्जरी हुईं। इसके अलावा 9,317 महिलाओं को बिना शुल्क के सिजेरियन प्रसव की सुविधा मिली। इससे पता चलता है कि योजना में गंभीर बीमारी के इलाज के साथ मातृत्व से जुड़ी जरूरी चिकित्सा सेवाओं को भी शामिल किया गया है।
🏥 योजना में मुफ्त इलाज की बड़ी संख्या
- कुल मुफ्त इलाज: 2,44,468
- कुल खर्च: 316.50 करोड़ रुपये से अधिक
- डायलिसिस: 1,87,656 सत्र
- घुटना बदलने की सर्जरी: 10,751
- सिजेरियन प्रसव: 9,317
दिल से जुड़ी बीमारियों के इलाज में भी योजना का इस्तेमाल हुआ है। आंकड़ों के अनुसार 8,734 मरीजों की हृदय की नसों से जुड़ी जांच और उपचार प्रक्रिया की गई। इसके अलावा 554 मरीजों की हृदय की बाईपास सर्जरी हुई। किडनी में पथरी के इलाज के लिए 5,770 प्रक्रियाएं की गईं। निचली मूत्र नली से जुड़ी 2,247 सर्जरी भी योजना के तहत हुई हैं।
हृदय, किडनी और हड्डियों के इलाज को भी मिली सुविधा
इसके अलावा 911 मरीजों के कूल्हे की विशेष सर्जरी की गई, जबकि 830 गंभीर रोगों से जुड़ी बड़ी सर्जरी योजना के तहत कराई गईं। सरकार के अनुसार इन 10 प्रमुख प्रक्रियाओं को मिलाकर कुल 2,44,468 उपचार हुए हैं। इन सभी उपचारों पर खर्च की गई राशि 316.50 करोड़ रुपये से अधिक रही है।
पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि किसी भी स्वास्थ्य योजना की सफलता केवल लाभार्थियों की संख्या से नहीं, बल्कि इस बात से तय होती है कि जरूरतमंद परिवारों को समय पर इलाज मिला या नहीं। उन्होंने कहा कि योजना के तहत लंबे समय तक चलने वाले इलाज और महंगी सर्जरी दोनों तरह की चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
❤️ प्रमुख इलाज और सर्जरी
- हृदय उपचार: 8,734 प्रक्रियाएं
- हृदय की बाईपास सर्जरी: 554
- किडनी की पथरी: 5,770 प्रक्रियाएं
- निचली मूत्र नली: 2,247 सर्जरी
- कूल्हे की विशेष सर्जरी: 911
- बड़ी सर्जरी: 830
सरकार के अनुसार योजना में किडनी उपचार, हृदय रोग, हड्डियों से जुड़ी चिकित्सा, सामान्य सर्जरी और मातृत्व उपचार जैसे कई क्षेत्रों को शामिल किया गया है। खासकर डायलिसिस जैसे इलाज में मरीज को बार-बार अस्पताल जाना पड़ सकता है, इसलिए ऐसी सुविधा परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को कम कर सकती है।
हालांकि राज्य सरकार की ओर से जारी जानकारी में योजना के तहत अब तक इलाज पाने वाले कुल लोगों की संख्या नहीं बताई गई है। साथ ही 316.50 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च पूरी योजना का कुल खर्च नहीं है। यह राशि केवल उन 10 सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली चिकित्सा प्रक्रियाओं से जुड़ी है, जिनका आंकड़ा सरकार ने जारी किया है।
योजना के आंकड़ों में अभी कुछ जानकारी स्पष्ट नहीं
सरकार ने इन आंकड़ों के लिए किसी निश्चित समय अवधि की जानकारी भी नहीं दी है। इसलिए उपलब्ध आंकड़ों से केवल इतना स्पष्ट होता है कि मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत इन प्रमुख उपचारों का बड़े स्तर पर इस्तेमाल हुआ है। योजना के तहत डायलिसिस, सर्जरी, हृदय उपचार और मातृत्व सेवाओं की मांग सबसे ज्यादा दिखाई दे रही है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि राज्य में महंगे और लंबे समय तक चलने वाले इलाज के लिए सरकारी सहायता की जरूरत बनी हुई है।
अस्वीकरण: यह जानकारी सरकारी आंकड़ों पर आधारित है और उपचार संबंधी निर्णय के लिए चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।
