कोटा में डिलीवरी के बाद महिलाओं की मौत से जुड़े कथित नकली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। पंजाब ड्रग डिपार्टमेंट ने अमृतसर स्थित कंपनी ‘जैक्सन लेबोरेटरीज प्राइवेट लिमिटेड’ का दवा निर्माण लाइसेंस रद्द कर दिया है। जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं, जिससे दवा निर्माण और गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।
ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन मामले में बड़ा एक्शन
राजस्थान के कोटा में, डिलीवरी के बाद महिलाओं की मौत से जुड़े नकली इंजेक्शन की सप्लाई के मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है। अमृतसर की कंपनी ‘जैक्सन लेबोरेटरीज प्राइवेट लिमिटेड’ के ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन को लेकर चिंताएं सामने आने के बाद पंजाब ड्रग डिपार्टमेंट ने दवा बनाने का उसका लाइसेंस रद्द कर दिया है。
यही वह कंपनी है जिसने कोटा में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन सप्लाई किया था; जांच में पता चला कि इंजेक्शन में कोई भी एक्टिव इंग्रीडिएंट (सक्रिय तत्व) नहीं था, यानी इसमें कोई भी असरदार दवा वाला तत्व नहीं था। *आज तक* पर खबरें आने के बाद केंद्र सरकार और पंजाब ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट ने अमृतसर स्थित इस कंपनी पर छापा मारा, जिसमें चौंकाने वाले खुलासे हुए। दवा का टेस्ट रिजल्ट आने से पहले ही, इंजेक्शन चार राज्यों के बाजारों में भेज दिए गए थे।
⚠️ ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन जांच में बड़े खुलासे
- कंपनी: जैक्सन लेबोरेटरीज प्राइवेट लिमिटेड
- स्थान: अमृतसर, पंजाब
- दवा: ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन
- मुख्य आरोप: इंजेक्शन में एक्टिव इंग्रीडिएंट नहीं मिला
- कार्रवाई: पंजाब ड्रग डिपार्टमेंट ने लाइसेंस रद्द किया
- प्रभाव: दवा चार राज्यों में सप्लाई की गई थी
लाइसेंस रद्द करने तक कैसे पहुंची जांच
राजस्थान ड्रग डिपार्टमेंट से चेतावनी मिलने के बाद पंजाब ड्रग डिपार्टमेंट ने कंपनी की फैक्ट्री और दस्तावेजों की बारीकी से जांच की। जांच के नतीजों ने पूरी प्रोडक्शन प्रोसेस को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दीं। इसके चलते, पंजाब के असिस्टेंट कमिश्नर (ड्रग्स) ने 3 जून को कंपनी का लाइसेंस रद्द करने का आदेश जारी किया।
जांच टीम ने विवादित बैच से जुड़े टेस्टिंग दस्तावेजों की मांग की, जिसके जवाब में कंपनी ने “सर्टिफिकेट ऑफ एनालिसिस” दिया। हालांकि, कागजातों की समीक्षा में एक चौंकाने वाला अंतर सामने आया: रिपोर्ट में बैच रिलीज की तारीख 8 दिसंबर, 2025 बताई गई थी, जबकि सैंपल मिलने की तारीख 23 नवंबर, 2025 थी। हालांकि, दस्तावेजों और रॉ डेटा की जांच से पता चला कि कंपनी ने 8 दिसंबर को ही बैच बाजार में उतार दिया था।
क्वालिटी कंट्रोल रिकॉर्ड में मिली बड़ी गड़बड़ी
क्वालिटी कंट्रोल (QC) लैब में सैंपल रिसीविंग रिकॉर्ड की जांच से सबसे अहम खुलासा हुआ। रिकॉर्ड के मुताबिक, QC लैब को इस खास बैच का सैंपल 17 दिसंबर, 2025 को मिला था, जिसका मतलब है कि बैच के बाजार में भेजे जाने के नौ दिन बाद टेस्टिंग के लिए सैंपल पहुंचा। इस बड़ी गड़बड़ी ने कंपनी के क्वालिटी कंट्रोल तौर-तरीकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
📋 जांच में सामने आए प्रमुख तथ्य
- बैच रिलीज: 8 दिसंबर 2025
- QC सैंपल प्राप्त: 17 दिसंबर 2025
- मुख्य विसंगति: बाजार में भेजने के बाद सैंपल टेस्टिंग
- जांच एजेंसी: पंजाब ड्रग डिपार्टमेंट
- संदेह: रिकॉर्ड में छेड़छाड़ और QC लापरवाही
- परिणाम: लाइसेंस रद्द, विस्तृत जांच जारी
महिलाओं की मौत के मामले से जुड़ा बड़ा नेटवर्क?
प्लांट परिसर की जांच में कई और अहम गड़बड़ियां सामने आईं। अधिकारियों का मानना है कि क्वालिटी कंट्रोल में लापरवाही और रिकॉर्ड में छेड़छाड़ के कारण मरीजों की जान खतरे में है। कोटा में डिलीवरी के बाद महिलाओं की मौत के मामले में शुरू हुई जांच अब नकली और घटिया दवाओं के कारोबार से जुड़े एक नेटवर्क तक पहुंचती दिख रही है।
नतीजतन, इस मुक़दमे को सिर्फ़ किसी एक कंपनी के ख़िलाफ़ कार्रवाई के तौर पर नहीं, बल्कि दवा बनाने के सिस्टम में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़े कदम के तौर पर देखा जा रहा है। गौरतलब है कि कोटा सरकारी मेडिकल कॉलेज से जुड़े दो अस्पतालों में इस कंपनी की ऑक्सीटोसिन दवा लेने के बाद पाँच महिलाओं की मौत हो गई थी।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध रिपोर्टों और जांच संबंधी जानकारी पर आधारित है। अंतिम निष्कर्ष संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक जांच रिपोर्ट के अधीन हैं।

