Logicap की 2,000 करोड़ की डील, कारोबार में बड़ा विस्तार

अल्टा कैपिटल से जुड़ी लॉजिस्टिक्स कंपनी लॉजिकैप भारत में अपने कारोबार का तेजी से विस्तार कर रही है। कंपनी ने सिंगापुर की एक्सेंडर इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट से तीन बड़े शहरों में मौजूद गोदाम और औद्योगिक संपत्तियां खरीदने की प्रक्रिया शुरू की है। इन सौदों की कुल कीमत करीब 2,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इस खरीद के बाद लॉजिकैप देश की बड़ी वेयरहाउसिंग और औद्योगिक रियल एस्टेट कंपनियों में तीसरे स्थान पर पहुंचने की स्थिति में है।

लॉजिकैप की 2,000 करोड़ रुपये की बड़ी खरीद

लॉजिकैप ने चेन्नई और कोलकाता में करीब 26 लाख वर्ग फुट की संपत्तियां लगभग 1,500 करोड़ रुपये में खरीद ली हैं। इसके अलावा मुंबई के पास भिवंडी में करीब 10 लाख वर्ग फुट की एक और संपत्ति को दूसरे चरण में खरीदने की योजना है। कंपनी के मुख्य निवेश अधिकारी अभय गोयल ने बताया कि यह सौदा कंपनी की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें नई परियोजनाएं विकसित करने के साथ संस्थागत निवेशकों से मौजूदा संपत्तियां भी खरीदी जाती हैं।

करीब चार साल पहले शुरू हुई लॉजिकैप ने कम समय में अपना कारोबार काफी बढ़ाया है। कंपनी ने खुद नई परियोजनाएं तैयार करने के साथ खुदरा और विनिर्माण क्षेत्रों वाले प्रमुख इलाकों में चुनिंदा संपत्तियों की खरीद की है। ताजा खरीदारी के बाद कंपनी के पोर्टफोलियो का आकार करीब 2.5 करोड़ वर्ग फुट हो जाएगा। हालांकि, यह अब भी ब्लैकस्टोन समर्थित Horizon Industrial Parks और IndoSpace से पीछे है, जिनके पास क्रमशः करीब 6.05 करोड़ और 5.8 करोड़ वर्ग फुट की संपत्तियां हैं।

लॉजिकैप की बड़ी संपत्ति खरीद

  • कुल सौदों की कीमत: करीब 2,000 करोड़ रुपये
  • चेन्नई और कोलकाता: करीब 26 लाख वर्ग फुट
  • पहले चरण की खरीद: लगभग 1,500 करोड़ रुपये
  • भिवंडी की संपत्ति: करीब 10 लाख वर्ग फुट
  • खरीद के बाद पोर्टफोलियो: करीब 2.5 करोड़ वर्ग फुट

चेन्नई और कोलकाता की संपत्तियां पूरी तरह किराए पर

चेन्नई में खरीदी गई संपत्तियों में करीब 19 लाख वर्ग फुट का एक लॉजिस्टिक्स पार्क शामिल है। यह चेन्नई के मुक्त व्यापार क्षेत्र में स्थित है, जहां किरायेदारों को कुछ शुल्क और कर संबंधी सुविधाएं मिलती हैं। कोलकाता के पास बगनान में मौजूद दूसरी संपत्ति पूर्वी भारत के बढ़ते उपभोक्ता बाजारों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। दोनों संपत्तियां पहले से चालू हैं और पूरी तरह किराए पर दी जा चुकी हैं। इनमें DHL Supply Chain, DB Schenker और Flipkart जैसी बड़ी कंपनियां किरायेदार हैं।

भिवंडी की संपत्ति की बिक्री पूरी होने के बाद एक्सेंडर का भारत के वेयरहाउस कारोबार से बाहर निकलना लगभग पूरा हो जाएगा। सिंगापुर की इस कंपनी ने 2019 में करीब 250 मिलियन डॉलर के औद्योगिक निवेश के साथ भारत के वेयरहाउस क्षेत्र में प्रवेश किया था। हालांकि, भारत में उसके कार्यालय और खुदरा क्षेत्र से जुड़े कुछ निवेश अब भी मौजूद हैं।

अल्टा कैपिटल की स्थापना 2021 में ब्लैकस्टोन के पूर्व अधिकारी सिद्धार्थ गुप्ता ने की थी। कंपनी का निवेश लचीले कार्यालय, छात्र आवास, उच्च स्तर के आवासीय प्रोजेक्ट, डेटा सेंटर और लॉजिकैप जैसे कई क्षेत्रों में है। पिछले साल भी ऐसी खबरें सामने आई थीं कि अल्टा कैपिटल एक्सेंडर के लॉजिस्टिक्स पोर्टफोलियो को खरीदने की दौड़ में शामिल अंतरराष्ट्रीय निवेशकों में से एक थी।

पहले भी बड़ी संपत्तियां खरीद चुकी है लॉजिकैप

लॉजिकैप ने इससे पहले भी बड़ी खरीदारी के जरिए अपने कारोबार को बढ़ाया है। 2024 में कंपनी ने इंडोस्पेस से 2.5 करोड़ वर्ग फुट की संपत्तियां 850 करोड़ रुपये से अधिक में खरीदी थीं। कंपनी का संचालन Pragati Warehousing और EcoBox Industrial Parks जैसी इकाइयों के जरिए भी होता है।

भारत के वेयरहाउसिंग बाजार में बढ़ते अवसर

  • लॉजिस्टिक्स क्षेत्र का अनुमान: 2030 तक करीब 540 अरब डॉलर
  • 2025 में आधुनिक वेयरहाउसिंग: 61 करोड़ वर्ग फुट से अधिक
  • Grade A संपत्तियों की हिस्सेदारी: करीब 38 प्रतिशत
  • 2030 का अनुमानित आकार: करीब 85 करोड़ वर्ग फुट
  • मांग के प्रमुख कारण: ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स और आपूर्ति श्रृंखला

भारत में लॉजिस्टिक्स क्षेत्र का विस्तार

भारत के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में संस्थागत निवेश लगातार बढ़ रहा है। ई-कॉमर्स, तीसरे पक्ष की लॉजिस्टिक्स सेवाओं, क्विक कॉमर्स और कंपनियों द्वारा आपूर्ति श्रृंखला को बाजारों के करीब लाने की बढ़ती जरूरत से इस क्षेत्र को फायदा मिल रहा है। सरकार की National Logistics Policy जैसी पहलों से भी परिवहन और भंडारण से जुड़े बुनियादी ढांचे को बढ़ावा मिल रहा है।

उद्योग के अनुमान के अनुसार भारत का लॉजिस्टिक्स क्षेत्र 2030 तक करीब 540 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। 2025 में देश में आधुनिक वेयरहाउसिंग का कुल भंडार 61 करोड़ वर्ग फुट से अधिक हो गया था। रियल एस्टेट सलाहकार JLL India के अनुसार, इसमें संस्थागत Grade A संपत्तियों की हिस्सेदारी करीब 38 प्रतिशत थी। वर्ष 2030 तक देश में आधुनिक वेयरहाउसिंग का कुल आकार करीब 85 करोड़ वर्ग फुट तक पहुंचने का अनुमान है। इससे लॉजिकैप जैसी कंपनियों के लिए आगे विस्तार के नए अवसर बन सकते हैं।

अस्वीकरण: यह जानकारी सामान्य सूचना के लिए है और निवेश संबंधी निर्णय से पहले स्वतंत्र सलाह लेना उचित है।

Gourav Kumar Singh

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