MCX Crude Oil Case: बॉम्बे हाई कोर्ट ने ₹1 सेटलमेंट को सही माना

कोविड-19 लॉकडाउन के शुरुआती दौर में वैश्विक तेल बाजार में अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई थी। खरीदारों के कच्चे तेल की डिलीवरी लेने में असमर्थ या अनिच्छुक होने के कारण समुद्र में मौजूद बड़ी मात्रा में तेल को NYMEX से जुड़े स्टोरेज केंद्रों की ओर मोड़ दिया गया। इससे तेल की सप्लाई अत्यधिक बढ़ गई और मांग में भारी गिरावट के चलते पहली बार क्रूड ऑयल फ्यूचर्स की कीमतें शून्य से नीचे चली गईं।

MCX क्रूड ऑयल नेगेटिव प्राइस विवाद और बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला

करीब छह साल बाद इस ऐतिहासिक घटना ने फिर सुर्खियां बटोरी हैं। बॉम्बे हाई कोर्ट ने महामारी के दौरान मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (MCX) द्वारा क्रूड ऑयल फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स की अंतिम सेटलमेंट कीमत ₹1 तय करने के खिलाफ दायर कई ट्रेडर्स की याचिकाओं को खारिज कर दिया।

24 जून को सुनाए गए फैसले में अदालत ने MCX की सेटलमेंट प्रक्रिया को वैध ठहराया। कोर्ट ने माना कि उस समय एक्सचेंज के नियमों में नेगेटिव कीमत पर सेटलमेंट का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं था, इसलिए उपलब्ध नियमों के तहत लिया गया फैसला उचित था।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने क्या कहा?

यह मामला उन ट्रेडर्स से जुड़ा था जिन्होंने क्रूड ऑयल फ्यूचर्स में लॉन्ग पोजीशन ली थी और कीमतों में आई अभूतपूर्व गिरावट के कारण भारी नुकसान उठाने का दावा करते हुए संबंधित ट्रेड्स को रद्द करने की मांग की थी। हालांकि, हाई कोर्ट ने उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया और एक्सचेंज के फैसले को बरकरार रखा।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर कारोबार होने वाले क्रूड ऑयल फ्यूचर्स का मूल्य निर्धारण अमेरिका के न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज (NYMEX) पर ट्रेड होने वाले वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड कॉन्ट्रैक्ट की अंतिम सेटलमेंट कीमत के आधार पर किया जाता है। यानी कॉन्ट्रैक्ट की एक्सपायरी के समय MCX पर सेटलमेंट, NYMEX के संबंधित मूल्य के अनुरूप होता है।

कोविड-19 महामारी के दौरान लागू वैश्विक लॉकडाउन ने तेल बाजार को अभूतपूर्व संकट में डाल दिया। मांग में भारी गिरावट और खरीदारों द्वारा डिलीवरी लेने में असमर्थता के कारण स्टोरेज क्षमता लगभग भर गई। बड़ी मात्रा में कच्चा तेल समुद्र में ही रुका रहा, जिससे सप्लाई का दबाव बढ़ा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें ऐतिहासिक रूप से गिर गईं।

कैसे पहुंची क्रूड ऑयल की कीमत नेगेटिव में?

इसी दौरान 20 अप्रैल 2020 को NYMEX पर WTI क्रूड ऑयल फ्यूचर्स की कीमत इतिहास में पहली बार गिरकर -37.63 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। यह वही समय था जब शाम 5 बजे MCX का संबंधित क्रूड ऑयल कॉन्ट्रैक्ट भी एक्सपायर हो रहा था। हालांकि, उस समय MCX के सेटलमेंट सिस्टम में नेगेटिव कीमत पर कॉन्ट्रैक्ट का निपटान करने का कोई प्रावधान नहीं था। इसलिए एक्सचेंज ने कॉन्ट्रैक्ट का अंतिम सेटलमेंट ₹1 प्रति बैरल पर किया, जबकि डॉलर के हिसाब से इसकी समकक्ष कीमत लगभग -₹2,884 प्रति बैरल बैठती थी।

इस फैसले से कई ट्रेडर्स को भारी नुकसान हुआ, जिसके बाद उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया। उनका तर्क था कि एक्सचेंज को कॉन्ट्रैक्ट का सेटलमेंट वास्तविक नेगेटिव कीमत के आधार पर करना चाहिए था।

📌 MCX क्रूड ऑयल केस की मुख्य बातें

  • घटना: कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान क्रूड ऑयल कीमतें नेगेटिव हुईं
  • NYMEX कीमत: -37.63 डॉलर प्रति बैरल
  • MCX सेटलमेंट: ₹1 प्रति बैरल
  • विवाद: ट्रेडर्स ने नेगेटिव कीमत पर सेटलमेंट की मांग की
  • फैसला: बॉम्बे हाई कोर्ट ने MCX के निर्णय को सही माना

अदालत ने MCX के फैसले को क्यों सही माना?

हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस आर.आई. चागला और जस्टिस अद्वैत एम. सेठना शामिल थे, ने अपने फैसले में कहा कि केवल ट्रेडर्स को नुकसान होने के आधार पर बाजार में हुए अंतिम सेटलमेंट में न्यायिक हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। अदालत ने अप्रैल 2020 में जारी MCX के उस सर्कुलर को भी वैध माना, जिसके तहत एक्सपायर हो चुके क्रूड ऑयल फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स के सेटलमेंट से जुड़े निर्णय लिए गए थे।

अप्रैल 2020 में वैश्विक तेल बाजार ने एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व घटना देखी, जब NYMEX पर WTI क्रूड ऑयल फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट की कीमत गिरकर -37.63 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। इसका अर्थ यह था कि विक्रेता (Seller) डिलीवरी की जिम्मेदारी से मुक्त होने के लिए खरीदारों (Buyer) को भुगतान करने के लिए भी तैयार थे। इसी असाधारण स्थिति का असर MCX पर कारोबार होने वाले क्रूड ऑयल फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स पर भी पड़ा, जहां कीमतें नेगेटिव स्तर तक पहुंच गईं।

हालांकि, उस समय MCX के सेटलमेंट सिस्टम में नेगेटिव कीमतों पर निपटान का कोई प्रावधान नहीं था। ऐसे में एक्सचेंज ने एक सर्कुलर जारी कर क्रूड ऑयल कॉन्ट्रैक्ट की अंतिम सेटलमेंट कीमत ₹1 प्रति बैरल निर्धारित की। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि MCX की प्रणाली इस धारणा पर आधारित थी कि कीमत शून्य से नीचे नहीं जाएगी और सामान्य परिस्थितियों में विक्रेता को कम से कम ₹1 प्रति बैरल का मूल्य प्राप्त होगा।

⚖️ हाई कोर्ट के फैसले की मुख्य वजह

  • नियम: MCX में नेगेटिव सेटलमेंट का प्रावधान नहीं था
  • कोर्ट की राय: केवल नुकसान के आधार पर हस्तक्षेप संभव नहीं
  • सर्कुलर: अप्रैल 2020 का MCX सर्कुलर वैध माना गया
  • जोखिम: फ्यूचर्स ट्रेडिंग में जोखिम की जानकारी निवेशकों को होनी चाहिए
  • निष्कर्ष: एक्सचेंज का ₹1 सेटलमेंट बरकरार रखा गया

ट्रेडर्स के दावे और अदालत की टिप्पणी

बॉम्बे हाई Court ने अपने निर्णय में यह भी स्पष्ट किया कि फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स अत्यंत जटिल वित्तीय साधन (Financial Instruments) हैं और इनमें निवेश करने वाले ट्रेडर्स को इनके जोखिमों और संभावित उतार-चढ़ाव की पूरी जानकारी होनी चाहिए। अदालत ने कहा कि केवल नुकसान होने के आधार पर एक्सचेंज के सेटलमेंट में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।

इस मामले के प्रमुख याचिकाकर्ताओं में शामिल धनेरा डायमंड्स ने दावा किया कि नेगेटिव कीमतों के कारण उसे भारी वित्तीय नुकसान हुआ। कंपनी अपने ब्रोकर मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के माध्यम से MCX पर क्रूड ऑयल फ्यूचर्स में ट्रेडिंग कर रही थी। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, 20 अप्रैल 2020 को कॉन्ट्रैक्ट की एक्सपायरी के समय याचिकाकर्ताओं के पास कुल 2,965 बैरल के नोशनल क्रूड ऑयल फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स मौजूद थे।

ट्रेडिंग समय को लेकर याचिकाकर्ताओं की दलील

याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी कि कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान MCX ने ट्रेडिंग का समय घटाकर शाम 5 बजे तक कर दिया था। उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें इसके बाद तेजी से गिरकर नेगेटिव स्तर पर पहुंचीं, इसलिए ₹1 प्रति बैरल पर किए गए सेटलमेंट को रद्द किया जाना चाहिए।

हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने माना कि महामारी के दौरान लागू प्रतिबंधों को देखते हुए MCX द्वारा ट्रेडिंग समय में कटौती करना एक उचित और आवश्यक प्रशासनिक निर्णय था। कोर्ट ने यह भी कहा कि क्रूड ऑयल की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट देर रात दर्ज हुई, जब MCX पर संबंधित कॉन्ट्रैक्ट की ट्रेडिंग पहले ही समाप्त हो चुकी थी। ऐसे में एक्सचेंज के फैसले को अवैध नहीं ठहराया जा सकता।

SEBI का पक्ष और अदालत की टिप्पणी

मामले में प्रतिवादी के रूप में शामिल भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने भी अदालत को बताया कि MCX पर कारोबार होने वाले क्रूड ऑयल फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट सामान्य वस्तु खरीद-बिक्री (Sale of Goods) का लेनदेन नहीं हैं। SEBI के अनुसार, यह एक डेरिवेटिव (Derivative) वित्तीय अनुबंध है, जिसकी प्रकृति और नियामकीय व्यवस्था पारंपरिक वस्तु व्यापार से अलग है। इसी आधार पर नियामक ने याचिकाकर्ताओं की मांगों का विरोध किया।

बॉम्बे हाई कोर्ट के इस फैसले को बाजार नियामक SEBI के रुख के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि नियामक की भूमिका हर निवेशक को जोखिमपूर्ण ट्रेडिंग फैसलों से हुए नुकसान से बचाने की नहीं है। यदि कोई निवेशक अपनी इच्छा से उच्च जोखिम वाले डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स में कारोबार करता है, तो केवल नुकसान होने के आधार पर नियामक या एक्सचेंज को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता केवल इसलिए NYMEX के मूल्य निर्धारण (प्राइसिंग मैकेनिज्म) पर सवाल नहीं उठा सकते क्योंकि बाजार की दिशा उनके अनुमान के विपरीत चली गई। उन्होंने संबंधित कॉन्ट्रैक्ट्स और उनके नियमों को अपनी इच्छा से स्वीकार किया था, इसलिए बाद में बाजार के परिणामों को चुनौती देना उचित नहीं है।

⚖️ कोर्ट और SEBI की प्रमुख दलीलें

  • ट्रेडिंग समय: शाम 5 बजे तक सीमित करना उचित प्रशासनिक निर्णय
  • SEBI का पक्ष: क्रूड ऑयल फ्यूचर्स एक डेरिवेटिव अनुबंध हैं
  • कोर्ट की राय: नुकसान होने मात्र से सेटलमेंट रद्द नहीं किया जा सकता
  • निष्कर्ष: MCX और SEBI की कार्रवाई वैध मानी गई

डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स और निवेशकों की जिम्मेदारी

अदालत ने अपने फैसले में डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की प्रकृति पर भी टिप्पणी की। कोर्ट के अनुसार, ऐसे अनुबंध भविष्य में तय कीमत पर किसी वस्तु की खरीद या बिक्री का जोखिम प्रबंधित करने का माध्यम होते हैं। इनका उपयोग मुख्य रूप से हेजर्स कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचाव के लिए करते हैं, जबकि दूसरी ओर सट्टेबाज (Speculators) संभावित लाभ की उम्मीद में इन सौदों में हिस्सा लेते हैं और बाजार जोखिम स्वीकार करते हैं।

हाई कोर्ट ने उस दलील को भी खारिज कर दिया कि भारतीय कमोडिटी फ्यूचर्स का सेटलमेंट नेगेटिव कीमत पर नहीं हो सकता। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता ऐसा कोई कानून, नियम या एक्सचेंज का प्रावधान पेश नहीं कर सके, जो कमोडिटी डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स के शून्य या नेगेटिव मूल्य पर सेटलमेंट को प्रतिबंधित करता हो।

फैसले में यह भी कहा गया कि MCX पर NYMEX से जुड़े क्रूड ऑयल कॉन्ट्रैक्ट्स में ट्रेड करने वाले प्रतिभागियों को पहले से जानकारी थी कि भारत में ट्रेडिंग केवल शाम 5 बजे (IST) तक होती है। साथ ही, यह भी सार्वजनिक रूप से ज्ञात था कि NYMEX ने नेगेटिव कीमतों की संभावना पर पहले ही चर्चा की थी। ऐसे में यदि निवेशकों को संभावित जोखिम का अंदेशा था, तो उन्हें भारतीय बाजार बंद होने से पहले अपनी लॉन्ग पोजीशन समाप्त कर देनी चाहिए थी, न कि बाद में बाजार के परिणामों को चुनौती देनी चाहिए थी।

📊 निवेशकों के लिए अहम सीख

  • फ्यूचर्स ट्रेडिंग: इसमें लाभ और हानि दोनों की संभावना रहती है
  • जोखिम: लॉन्ग पोजीशन लेने से पहले सभी नियम समझना जरूरी
  • कोर्ट की सलाह: जोखिम का आकलन निवेशक की जिम्मेदारी है
  • संदेश: प्रतिकूल परिणाम आने पर ही नियमों को चुनौती नहीं दी जा सकती

चिराग शाह की प्रतिक्रिया

इस मामले पर टिप्पणी करते हुए वरिष्ठ प्रतिभूति कानून विशेषज्ञ चिराग शाह ने कहा कि लॉन्ग पोजीशन लेने वाले निवेशकों को पहले से ही यह जानकारी थी कि MCX पर क्रूड ऑयल फ्यूचर्स की अंतिम सेटलमेंट कीमत, NYMEX की क्लोजिंग कीमत और डॉलर-रुपया (USD-INR) विनिमय दर के आधार पर तय की जाएगी।

शाह ने कहा कि जिन निवेशकों ने अदालत का रुख किया, वे वास्तव में बाजार में हुए नुकसान को स्वीकार नहीं कर पा रहे थे। उनके अनुसार, यदि बाजार की चाल उलटी होती और कीमतें अचानक 50 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ जातीं, तो वही निवेशक इस लाभ का स्वागत कर रहे होते और सेटलमेंट प्रक्रिया पर कोई सवाल नहीं उठाते।

उनका मानना है कि डेरिवेटिव बाजार में लाभ और हानि दोनों संभावनाएं पहले से मौजूद रहती हैं। ऐसे में केवल प्रतिकूल परिणाम आने पर एक्सचेंज की सेटलमेंट प्रणाली को चुनौती देना उचित नहीं माना जा सकता।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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