अमेरिका के मिशिगन राज्य में डेमोक्रेटिक पार्टी की सीनेट प्राइमरी इस बार पूरे देश की सबसे अहम राजनीतिक लड़ाइयों में मानी जा रही है। इस चुनाव में प्रगतिशील नेता अब्दुल एल-सैयद और मध्यमार्गी सांसद हेली स्टीवंस आमने-सामने हैं। इस मुकाबले का नतीजा केवल मिशिगन की सीनेट सीट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि आने वाले समय में डेमोक्रेटिक पार्टी किस राजनीतिक दिशा में आगे बढ़ेगी।
प्राइमरी चुनाव जीतने वाला उम्मीदवार नवंबर में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार माइक रोजर्स का सामना करेगा। यह सीट मौजूदा डेमोक्रेटिक सीनेटर गैरी पीटर्स के सेवानिवृत्त होने के बाद खाली हो रही है। डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए मिशिगन की यह सीट बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि पार्टी अमेरिकी सीनेट में दोबारा बहुमत हासिल करने की कोशिश कर रही है।
अब्दुल एल-सैयद मिशिगन के पूर्व सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारी रह चुके हैं और पार्टी के प्रगतिशील चेहरे के रूप में जाने जाते हैं। उन्हें बर्नी सैंडर्स और अलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज जैसे नेताओं का समर्थन मिला है। उनका कहना है कि अमेरिका को इज़राइल को बिना शर्त दी जाने वाली सैन्य सहायता पर रोक लगानी चाहिए और सरकारी संसाधनों का अधिक उपयोग स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे जैसे घरेलू क्षेत्रों में होना चाहिए। इसके अलावा वे राजनीति में कॉर्पोरेट प्रभाव कम करने और सभी नागरिकों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की वकालत करते हैं।
दूसरी ओर हेली स्टीवंस चार बार चुनी जा चुकी सांसद हैं और उन्हें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का समर्थन प्राप्त है। उनका मानना है कि उनका संतुलित राजनीतिक रुख उन्हें आम चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार के खिलाफ अधिक मजबूत बनाता है। स्टीवंस इज़राइल के साथ अमेरिका के संबंधों का समर्थन करती हैं, हालांकि उन्होंने इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की कई नीतियों की आलोचना भी की है।
इस चुनाव में इज़राइल और गाजा युद्ध सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनकर उभरा है। एल-सैयद लगातार अमेरिकी सैन्य सहायता का विरोध कर रहे हैं, जबकि स्टीवंस अमेरिका और इज़राइल की साझेदारी को बनाए रखने की पक्षधर हैं। इसी कारण यह मुकाबला डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर विदेश नीति और मध्य पूर्व को लेकर अलग-अलग विचारधाराओं की परीक्षा भी माना जा रहा है।
चुनाव में बाहरी संगठनों की ओर से किए जा रहे भारी खर्च ने भी इस मुकाबले को चर्चा में ला दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ बाहरी समूहों ने हेली स्टीवंस के समर्थन में करोड़ों डॉलर खर्च किए हैं। वहीं एल-सैयद इसे बड़े धनबल और जमीनी राजनीति के बीच की लड़ाई बता रहे हैं। मिशिगन में बड़ी अरब-अमेरिकी आबादी होने की वजह से इज़राइल से जुड़ा मुद्दा यहां अन्य राज्यों की तुलना में अधिक प्रभाव डाल सकता है।
मिशिगन लंबे समय से अमेरिका का एक प्रमुख स्विंग स्टेट माना जाता है, जहां अलग-अलग चुनावों में दोनों प्रमुख पार्टियों को जीत मिलती रही है। इसलिए इस प्राइमरी के नतीजे को केवल एक राज्य का चुनाव नहीं, बल्कि 2028 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले डेमोक्रेटिक पार्टी की रणनीति और राजनीतिक संदेश की दिशा तय करने वाले संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। इसमें जीत हासिल करने वाला उम्मीदवार नवंबर में रिपब्लिकन नेता माइक रोजर्स के खिलाफ कड़ा मुकाबला करेगा, जिससे यह सीट पूरे देश की सबसे महत्वपूर्ण चुनावी लड़ाइयों में शामिल हो गई है।
