म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले कई लोग सही स्कीम चुनने में काफी समय लगाते हैं, लेकिन कई बार उनके अपने फैसले ही लंबे समय में मिलने वाले रिटर्न को कम कर देते हैं।
वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि निवेश के दौरान भावनाओं में आकर लिए गए फैसले अक्सर नुकसान पहुंचाते हैं। जब बाजार तेजी से ऊपर जाता है तो लोग निवेश करने लगते हैं और जब बाजार गिरता है तो घबराकर पैसा निकाल लेते हैं। इसी वजह से अच्छे फंड में निवेश करने के बाद भी कई निवेशकों को उम्मीद के मुताबिक फायदा नहीं मिल पाता।
भावनाओं में लिया गया फैसला क्यों पड़ता है भारी
📊 निवेशकों की आम गलतियां
- सबसे बड़ी गलती: बाजार बढ़ने पर निवेश और गिरने पर निकासी
- मुख्य कारण: भावनाओं में आकर फैसला लेना
- जोखिम: लंबे समय का रिटर्न कम हो सकता है
- विशेषज्ञों की सलाह: अनुशासन बनाए रखें
- बेहतर तरीका: तय लक्ष्य के अनुसार निवेश जारी रखें
- फोकस: लंबी अवधि का निवेश
विशेषज्ञों के अनुसार सबसे बड़ी गलती यह होती है कि लोग हाल की तेजी को देखकर मान लेते हैं कि आगे भी बाजार उसी तरह बढ़ता रहेगा। इसी सोच के कारण निवेशक तब पैसा लगाते हैं, जब कीमतें पहले ही काफी ऊपर जा चुकी होती हैं। उदाहरण के तौर पर पिछले कुछ वर्षों में सोने की कीमतों में बड़ी तेजी देखने को मिली, लेकिन ज्यादातर निवेशकों ने निवेश तब किया जब कीमतें काफी बढ़ चुकी थीं। नतीजा यह रहा कि सोने में बड़ी बढ़त के बावजूद अधिकांश लोगों को अपेक्षा से काफी कम लाभ मिला।
जानकारों का कहना है कि केवल हाल का प्रदर्शन देखकर निवेश करना सही रणनीति नहीं है। कई निवेशक दूसरों को देखकर भी निवेश करते हैं या फिर यह सोचते हैं कि कहीं अच्छा मौका हाथ से न निकल जाए। इसी कारण वे बार-बार अपनी स्कीम बदलते रहते हैं या बाजार का सही समय पकड़ने की कोशिश करते हैं। ऐसी आदतें लंबे समय में निवेश के प्रदर्शन पर नकारात्मक असर डालती हैं।
बाजार में गिरावट के समय क्या करें
मार्च 2020 में बाजार में आई बड़ी गिरावट इसका अच्छा उदाहरण मानी जाती है। उस समय कई निवेशकों ने अपना पैसा निकाल लिया या नई किस्तें बंद कर दीं, क्योंकि उन्हें आगे और गिरावट का डर था। लेकिन बाद के महीनों में बाजार ने मजबूत वापसी की और जिन्होंने निवेश जारी रखा, उन्हें बेहतर रिटर्न मिला। इससे यह समझ आता है कि हर गिरावट लंबे समय के निवेशकों के लिए नुकसान का संकेत नहीं होती।
वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि निवेश के दौरान अनुशासन बनाए रखना सबसे जरूरी है। नियमित SIP जारी रखना, पहले से तय वित्तीय लक्ष्य पर ध्यान देना और रोजाना बाजार की चाल देखकर फैसला न लेना बेहतर तरीका माना जाता है। समय-समय पर अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करना ठीक है, लेकिन हर छोटी हलचल पर प्रतिक्रिया देना नुकसान पहुंचा सकता है।
💡 बेहतर निवेश रणनीति
- SIP: नियमित निवेश जारी रखें
- Mutual Fund: घबराकर तुरंत निकासी न करें
- लक्ष्य: पहले से तय वित्तीय उद्देश्य पर टिके रहें
- समीक्षा: समय-समय पर पोर्टफोलियो जांचें
- धैर्य: बाजार के उतार-चढ़ाव में जल्दबाजी से बचें
- फोकस: लंबी अवधि का रिटर्न
धैर्य और अनुशासन से मिल सकता है बेहतर रिटर्न
विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि यदि किसी Mutual Fund से पैसा निकालने का मन बने तो तुरंत फैसला न लें। पहले यह लिखें कि पैसा निकालने की वजह क्या है और फिर कम से कम 24 घंटे इंतजार करें। यदि अगले दिन भी वही कारण सही लगे, तभी निर्णय लें। अगर फैसला केवल बाजार की गिरावट या डर की वजह से लिया जा रहा है, तो दोबारा सोचने की जरूरत है।
निवेश करने से पहले अपने उद्देश्य को लिखकर रखना भी एक अच्छी आदत मानी जाती है। जब कभी निवेश निकालने का विचार आए तो पहले उसी उद्देश्य को दोबारा पढ़ें। इससे भावनाओं के बजाय सोच-समझकर फैसला लेने में मदद मिलती है। साथ ही रोजाना NAV देखने के बजाय लंबे समय के वित्तीय लक्ष्य पर ध्यान देना अधिक फायदेमंद माना जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सबसे अधिक संपत्ति वही निवेशक बना पाते हैं, जो बाजार के उतार-चढ़ाव के दौरान धैर्य बनाए रखते हैं। लंबी अवधि की योजना, नियमित निवेश और बिना घबराहट के लिए गए फैसले समय के साथ बेहतर परिणाम देने की संभावना बढ़ाते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।
