NRI Women Investment: एक साल में 70% बढ़ी भारतीय महिलाओं की भागीदारी

विदेशों में रहने वाली भारतीय (NRI) महिलाओं की निवेश गतिविधियों में पिछले एक वर्ष के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच NRI महिलाओं की निवेश भागीदारी करीब 70% बढ़ी है।

NRI महिलाओं की निवेश भागीदारी में 70% की बढ़ोतरी

यह बदलाव दर्शाता है कि अब विदेशों में रहने वाली भारतीय महिलाएं भी धन प्रबंधन और निवेश से जुड़े फैसलों में पहले की तुलना में अधिक सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

क्रॉस-बॉर्डर वेल्थ प्लेटफॉर्म Belong द्वारा 34 देशों के निवेश आंकड़ों के विश्लेषण में पाया गया कि पश्चिमी देशों में रहने वाली भारतीय महिलाओं की निवेश भागीदारी खाड़ी देशों की तुलना में काफी अधिक है। अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप जैसे देशों में कुल NRI निवेशकों में महिलाओं की हिस्सेदारी 11.4% रही, जबकि संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, कतर, ओमान, बहरीन और कुवैत जैसे खाड़ी देशों में यह आंकड़ा 6.8% दर्ज किया गया।

📊 NRI महिलाओं के निवेश की प्रमुख बातें

  • रिपोर्ट अवधि: जुलाई 2025 – जून 2026
  • निवेश भागीदारी: करीब 70% बढ़ी
  • विश्लेषण: 34 देशों के निवेश आंकड़े
  • पश्चिमी देशों में हिस्सेदारी: 11.4%
  • खाड़ी देशों में हिस्सेदारी: 6.8%
  • मुख्य संकेत: महिलाओं की वित्तीय भागीदारी में वृद्धि

पश्चिमी देशों और खाड़ी देशों के बीच बड़ा अंतर

रिपोर्ट के अनुसार, अलग-अलग देशों में रहने वाले भारतीयों की निवेश आदतें उनके रोजगार, पारिवारिक संरचना और आर्थिक भागीदारी पर काफी हद तक निर्भर करती हैं। पश्चिमी देशों में अधिकांश भारतीय परिवार दोहरी आय (Dual Income) वाले होते हैं, जहां महिलाएं भी पेशेवर रूप से कार्यरत रहती हैं और लंबी अवधि की वित्तीय योजना में सक्रिय योगदान देती हैं। इसके विपरीत, खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय अनुबंध आधारित नौकरियों या एकल आय वाले परिवारों में रहते हैं, जिससे निवेश संबंधी निर्णयों में महिलाओं की भागीदारी अपेक्षाकृत कम रहती है।

Belong के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) अंकुर चौधरी ने कहा कि NRI निवेशकों के बीच महिलाओं की बढ़ती भागीदारी सबसे सकारात्मक रुझानों में से एक है। उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों में महिलाओं की निवेश भागीदारी का स्तर अलग-अलग है और यह स्थानीय रोजगार, परिवार की संरचना तथा आर्थिक अवसरों से प्रभावित होता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विदेशों में रहने वाले भारतीय परिवारों में अब निवेश संबंधी फैसले केवल एक कमाने वाले सदस्य तक सीमित नहीं रह गए हैं। डिजिटल निवेश प्लेटफॉर्म, आसान ऑनलाइन सेवाओं और वित्तीय जागरूकता में वृद्धि के कारण अधिक महिलाएं स्वयं निवेश करना शुरू कर रही हैं।

💼 निवेश बढ़ने की प्रमुख वजहें

  • डिजिटल प्लेटफॉर्म: निवेश प्रक्रिया हुई आसान
  • वित्तीय जागरूकता: महिलाओं की भागीदारी बढ़ी
  • दोहरी आय वाले परिवार: पश्चिमी देशों में अधिक
  • ऑनलाइन निवेश: भारत और वैश्विक बाजार तक पहुंच
  • उपलब्ध विकल्प: म्यूचुअल फंड, AIF और डॉलर FD
  • भविष्य: महिलाओं की हिस्सेदारी और बढ़ने की संभावना

डिजिटल प्लेटफॉर्म ने आसान बनाया निवेश

हालांकि, रिपोर्ट में केवल निवेशकों की संख्या और उनकी भौगोलिक स्थिति का विश्लेषण किया गया है। इसमें यह जानकारी शामिल नहीं है कि महिलाओं और पुरुषों ने कितनी राशि निवेश की या उनके पोर्टफोलियो का आकार और निवेश का स्वरूप क्या रहा।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल वेल्थ प्लेटफॉर्म ने विदेशों में रहने वाले भारतीयों के लिए निवेश प्रक्रिया को पहले की तुलना में काफी आसान बना दिया है। पहले सीमा पार निवेश के दौरान टैक्स, नियमों, मुद्रा विनिमय और निवेश उत्पादों तक पहुंच जैसी कई चुनौतियां होती थीं, लेकिन अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भारत और वैश्विक बाजारों में निवेश के कई विकल्प उपलब्ध करा रहे हैं।

आने वाले वर्षों में और बढ़ सकती है भागीदारी

Belong भी अपने ग्राहकों को भारत और वैश्विक म्यूचुअल फंड, वैकल्पिक निवेश फंड (AIF) और अमेरिकी डॉलर आधारित फिक्स्ड डिपॉजिट जैसी कई निवेश सुविधाएं उपलब्ध कराता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले वर्षों में NRI निवेशकों के बीच महिलाओं की हिस्सेदारी और बढ़ने की संभावना है। यह बदलाव केवल आय में वृद्धि का नहीं, बल्कि वित्तीय स्वतंत्रता, डिजिटल पहुंच और बदलती पारिवारिक सोच का भी संकेत माना जा रहा है।

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I’m Gourav Kumar Singh, a graduate by education and a blogger by passion. Since starting my blogging journey in 2020, I have worked in digital marketing and content creation. Read more about me.

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