Microfinance Sector में आई बड़ी राहत! मई में सुधरी लोन रिकवरी, बढ़ा पोर्टफोलियो

भारत के माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में मई 2026 के दौरान सकारात्मक संकेत देखने को मिले हैं। CRIF High Mark की ताज़ा MicroLend Lite रिपोर्ट के अनुसार, उद्योग का कुल ऋण पोर्टफोलियो (Gross Loan Portfolio-GLP) लगातार दो महीनों की सुस्ती के बाद बढ़ा है। इसके साथ ही, डिफॉल्ट से जुड़े शुरुआती संकेतकों में भी सुधार दर्ज किया गया, जबकि नए ऋण वितरण का स्तर लगभग स्थिर बना रहा।

मई 2026 में माइक्रोफाइनेंस सेक्टर का लोन पोर्टफोलियो बढ़ा

मई 2026 में माइक्रोफाइनेंस उद्योग का ग्रॉस लोन पोर्टफोलियो 0.7% की मासिक बढ़त के साथ ₹333.5 लाख करोड़ पर पहुंच गया, जो अप्रैल में ₹331.2 लाख करोड़ था। मार्च में यह आंकड़ा ₹331 लाख करोड़ था। मार्च से मई के बीच कुल पोर्टफोलियो में लगभग 0.8% की वृद्धि दर्ज की गई। इसी अवधि में सक्रिय ऋणों (Active Loans) की संख्या बढ़कर 10.7 करोड़ हो गई, जो अप्रैल में 10.6 करोड़ थी।

पोर्टफोलियो में सुधार के साथ-साथ ऋण गुणवत्ता (Asset Quality) में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिला। 1-30 दिन की Portfolio at Risk (PAR) दर अप्रैल के 0.8% से घटकर मई में 0.6% रह गई। वहीं, 91-180 दिन की PAR भी 1.1% से घटकर 0.9% पर आ गई। कुल मिलाकर 1-180 दिन की PAR 2.5% से घटकर 2.2% रही। हालांकि, 31-90 दिन की PAR में मामूली बढ़ोतरी दर्ज हुई और यह 0.6% से बढ़कर 0.7% हो गई।

📊 माइक्रोफाइनेंस सेक्टर की प्रमुख बातें

  • GLP: ₹333.5 लाख करोड़
  • मासिक वृद्धि: 0.7%
  • सक्रिय ऋण: 10.7 करोड़
  • 1-30 दिन PAR: 0.6%
  • 1-180 दिन PAR: 2.2%
  • रिपोर्ट: CRIF High Mark MicroLend Lite

डिफॉल्ट संकेतकों में दर्ज हुआ सुधार

रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती चरण की बकाया राशि (Early-stage Delinquencies) में सुधार का मुख्य कारण बैंकों का बेहतर प्रदर्शन रहा, जबकि 91-180 दिन की देरी में कमी लगभग सभी प्रकार के ऋणदाताओं के बीच देखने को मिली। दूसरी ओर, 31-90 दिन की PAR में बढ़ोतरी का प्रमुख कारण NBFC-MFI श्रेणी रही।

माइक्रोफाइनेंस उद्योग में NBFC-MFI की हिस्सेदारी सबसे अधिक 43.4% रही। इसके बाद बैंकों की हिस्सेदारी 26.2%, सामान्य NBFCs की 13.3% और स्मॉल फाइनेंस बैंकों की 15.6% रही।

राज्यों की बात करें तो बिहार और उत्तर प्रदेश ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। बिहार का लोन पोर्टफोलियो 1.2% बढ़कर ₹54,000 करोड़ पहुंच गया, जबकि उत्तर प्रदेश में यह 1.3% की वृद्धि के साथ ₹40,600 करोड़ हो गया। इसके विपरीत, शीर्ष राज्यों में शामिल तमिलनाडु का पोर्टफोलियो 0.4% घटा। वहीं, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और राजस्थान में डिफॉल्ट का स्तर अब भी राष्ट्रीय औसत से ऊपर बना हुआ है।

📈 राज्यों और नए ऋण वितरण की स्थिति

  • बिहार: ₹54,000 करोड़
  • उत्तर प्रदेश: ₹40,600 करोड़
  • नए ऋण: ₹20,584 करोड़
  • वितरित ऋण: 33.1 लाख
  • औसत टिकट साइज: ₹61,000
  • संकेत: सतर्क लेंडिंग रणनीति जारी

नए ऋण वितरण में रही स्थिरता

नए ऋण वितरण (Fresh Loan Originations) में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया। मई में कुल ₹20,584 करोड़ के नए ऋण वितरित किए गए, जबकि अप्रैल में यह आंकड़ा ₹20,325 करोड़ था। इसी दौरान वितरित किए गए ऋणों की संख्या बढ़कर 33.1 लाख हो गई, जो अप्रैल में 32.7 लाख थी। हालांकि, औसत टिकट साइज ₹62,300 से घटकर ₹61,000 रह गया, जिससे संकेत मिलता है कि ऋणदाता अब भी सतर्क लेंडिंग रणनीति अपना रहे हैं।

आगे की संभावनाएं

विशेषज्ञों का मानना है कि पोर्टफोलियो में लगातार सुधार और डिफॉल्ट दरों में कमी माइक्रोफाइनेंस उद्योग के लिए सकारात्मक संकेत हैं। यदि आने वाले महीनों में यही रुझान जारी रहता है, तो सेक्टर की वृद्धि और वित्तीय स्थिरता दोनों को मजबूती मिल सकती है।

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I’m Gourav Kumar Singh, a graduate by education and a blogger by passion. Since starting my blogging journey in 2020, I have worked in digital marketing and content creation. Read more about me.

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