एनएसई का लंबे समय से प्रतीक्षित IPO अब पहले से ज्यादा करीब माना जा रहा है। सेबी की सिद्धांत रूप से मिली मंजूरी के बाद सार्वजनिक निर्गम की राह में मौजूद एक बड़ी नियामकीय बाधा काफी हद तक दूर हो गई है, जिससे निवेशकों की नजर अब आगे की प्रक्रिया पर बनी हुई है।
NSE IPO की राह हुई आसान
भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख एक्सचेंज एनएसई का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा IPO अब पहले से ज्यादा करीब पहुंच गया है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने को-लोकेशन और डार्क फाइबर से जुड़े पुराने मामलों के निपटारे के लिए सिद्धांत रूप से मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद एनएसई के लिए कई वर्षों से चल रही सबसे बड़ी नियामकीय बाधा काफी हद तक दूर हो गई है और अब उसके शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने का रास्ता आसान माना जा रहा है।
NSE IPO की मुख्य बातें
- बड़ी राहत: सेबी से सिद्धांत रूप से मंजूरी
- समझौता राशि: 1,491.21 करोड़ रुपये
- NSE भुगतान: 714.74 करोड़ रुपये
- समायोजित राशि: 776.47 करोड़ रुपये पहले से जमा
- फायदा: IPO की राह हुई आसान
- फोकस: Listing प्रक्रिया में तेजी
एनएसई ने 30 जुलाई को जारी जानकारी में बताया कि सेबी ने 1,491.21 करोड़ रुपये के समझौते को सिद्धांत रूप से स्वीकार कर लिया है। इस राशि में से 714.74 करोड़ रुपये एनएसई को जमा करने होंगे, जबकि पहले से सेबी के पास जमा 776.47 करोड़ रुपये को कुल राशि में समायोजित कर दिया जाएगा। इस भुगतान को एनएसई के निदेशक मंडल ने अपनी बैठक में मंजूरी भी दे दी है।
यह मामला कई वर्षों से चल रहा था और वर्ष 2015 से जुड़े को-लोकेशन तथा डार्क फाइबर विवाद एनएसई के लिए बड़ी चुनौती बने हुए थे। इन्हीं कारणों से एक्सचेंज का सार्वजनिक निर्गम लगातार आगे बढ़ता रहा। अब समझौते के बाद माना जा रहा है कि कंपनी अपने लंबे समय से लंबित listing की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकेगी।
IPO में क्या होगा खास
जानकारी के अनुसार, एनएसई ने जून में सेबी के पास अपने दस्तावेज जमा किए थे। बाजार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कंपनी सितंबर के दौरान अपना सार्वजनिक निर्गम ला सकती है। इस निर्गम का आकार करीब 30,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। यदि ऐसा होता है तो देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज का मूल्यांकन 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। निवेशकों के लिए रोड शो भी जल्द शुरू किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
दस्तावेजों के अनुसार यह पूरा निर्गम Offer for Sale के रूप में होगा। इसमें नई हिस्सेदारी जारी नहीं की जाएगी, बल्कि मौजूदा शेयरधारक अपने कुछ शेयर बेचेंगे। कुल 14.89 करोड़ इक्विटी शेयर बिक्री के लिए पेश किए जाएंगे, जिससे मौजूदा निवेशकों की हिस्सेदारी में लगभग 6 प्रतिशत की कमी आएगी। वर्तमान में एनएसई के करीब 1.8 लाख शेयरधारक हैं।
IPO में निवेशकों के लिए अहम जानकारी
- इश्यू प्रकार: Offer for Sale
- कुल शेयर: 14.89 करोड़ इक्विटी शेयर
- QIB आरक्षण: 50%
- गैर-संस्थागत निवेशक: 15%
- Retail निवेशक: 35%
- कर्मचारी: निर्धारित सीमा के अनुसार आरक्षण
बड़े निवेशकों और आगे की प्रक्रिया पर नजर
इस बिक्री में भारतीय स्टेट बैंक सबसे अधिक शेयर बेचने वाला निवेशक होगा। इसके अलावा एमएस स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस), कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड, अरांडा इन्वेस्टमेंट्स, बैंक ऑफ बड़ौदा और स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया भी अपनी हिस्सेदारी का कुछ भाग बेचेंगे। कई सरकारी बीमा कंपनियां भी इस निर्गम में अपने शेयर बेचने की तैयारी में हैं।
हालांकि भारतीय जीवन बीमा निगम यानी एलआईसी, जो एनएसई के बड़े शेयरधारकों में शामिल है, इस सार्वजनिक निर्गम में अपनी हिस्सेदारी बेचने की योजना नहीं बना रहा है। इसका मतलब है कि एलआईसी फिलहाल कंपनी में अपना निवेश पहले की तरह बनाए रखेगा।
दस्तावेजों के मुताबिक कुल निर्गम का 50 प्रतिशत हिस्सा योग्य संस्थागत खरीदारों के लिए रखा गया है। वहीं 15 प्रतिशत हिस्सा गैर-संस्थागत निवेशकों के लिए और 35 प्रतिशत हिस्सा खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित रहेगा। इसके अलावा कर्मचारियों के लिए भी निर्धारित सीमा के अनुसार कुछ शेयर सुरक्षित रखे गए हैं।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने मामलों के निपटारे से एनएसई के सार्वजनिक निर्गम को नई गति मिल सकती है। यदि आगे की सभी जरूरी मंजूरियां समय पर मिल जाती हैं, तो यह देश के सबसे बड़े और चर्चित सार्वजनिक निर्गमों में से एक साबित हो सकता है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि कंपनी अपने DRHP के बाद अंतिम मंजूरी कब हासिल करती है और retail निवेशकों के लिए आवेदन की तारीखों का ऐलान कब किया जाता है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से दी गई है। निवेश से पहले आधिकारिक दस्तावेज और वित्तीय सलाह अवश्य लें।

