‘प्रोजेक्ट टेपेस्ट्री’ एक ग्लोबल ग्रुप है जिसका मकसद डिस्ट्रिब्यूटेड ट्रेनिंग के ज़रिए एडवांस्ड AI मॉडल बनाना है, साथ ही इसमें शामिल देशों और संस्थाओं को अपने डेटा और डिप्लॉयमेंट पर कंट्रोल बनाए रखने की सुविधा भी मिलती है। भारत की ओर से इसमें शामिल होने की पहल को ‘भारतजेन’ (BharatGen) लीड करेगा, जो सरकार द्वारा समर्थित एक मल्टीलिंगुअल और मल्टीमॉडल फ़ाउंडेशन मॉडल कंपनी है।
19 जून को AI अलायंस ने कहा कि भारतजेन ‘प्रोजेक्ट टेपेस्ट्री’ में भारत की भागीदारी को लीड करेगा और डिस्ट्रिब्यूटेड मॉडल ट्रेनिंग के काम को अभी से ही मिलकर आगे बढ़ाएगा।
IIT बॉम्बे के डायरेक्टर और भारतजेन के चेयरमैन शिरीष केदारे ने एक बयान में कहा, “IIT बॉम्बे और भारतजेन (जो IndiaAI मिशन द्वारा प्रायोजित हैं) ‘प्रोजेक्ट टेपेस्ट्री’ में एक फ़ाउंडिंग कॉन्ट्रिब्यूटर के तौर पर शामिल होकर खुश हैं, क्योंकि भारत अपनी भाषाओं और विशेषज्ञता पर आधारित एडवांस्ड AI बना रहा है।”
फ़ुल-स्टैक सॉवरेन AI कंपनी भारतजेन की देखरेख में, ‘प्रोजेक्ट टेपेस्ट्री’ का मकसद ज़्यादा सक्षम, सुलभ और उपयोगी AI बनाना है जो भारत के लिए एक आधार का काम करे। इसके लिए डेटा, टैलेंट और संसाधनों को एक साथ लाया जाएगा, जो कोई भी एक कंपनी अकेले नहीं कर सकती।
‘प्रोजेक्ट टेपेस्ट्री’ के लक्ष्यों को सपोर्ट करते हुए, भारतजेन इसके एंकर के तौर पर काम करेगा और डिस्ट्रिब्यूटेड मॉडल ट्रेनिंग के काम को अभी से ही मिलकर आगे बढ़ाएगा। “AI एक ज़रूरी इंफ़्रास्ट्रक्चर बनता जा रहा है।” इसे कौन विकसित करेगा, कौन इसमें बदलाव करेगा या कौन इससे फ़ायदा उठाएगा, यह किसी एक कंपनी या देश द्वारा तय नहीं किया जाना चाहिए। AI अलायंस के चीफ़ साइंस एडवाइज़र और AMI लैब्स के एग्ज़ीक्यूटिव चेयरमैन डॉ. यान लेकुन के अनुसार, “प्रोजेक्ट टेपेस्ट्री इस बात की परीक्षा है कि क्या एडवांस्ड AI को एक ओपन इंफ़्रास्ट्रक्चर के तौर पर बनाया जा सकता है: जो डिज़ाइन से ही सहयोगी, सक्षम और सॉवरेन (स्वतंत्र) हो।”
पिछले महीने शुरू हुआ यह सहयोग अमेरिका, फ़्रांस, भारत, वियतनाम, जापान, स्विट्ज़रलैंड और संयुक्त अरब अमीरात के संगठनों को एक साथ लाता है ताकि डेटा ओनरशिप को सेंट्रलाइज़ किए बिना मिलकर AI मॉडल बनाए जा सकें।
IIT बॉम्बे के नेतृत्व वाले सहयोग से ‘भारतजेन’ बनाया गया, जो सरकार द्वारा समर्थित एक ऑटोनॉमस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) प्रोजेक्ट है।
IndiaAI मिशन से 900 करोड़ रुपये से ज़्यादा की फ़ंडिंग के साथ, यह पहल बैंकिंग, कानून और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों में 22 भारतीय भाषाओं के लिए पॉपुलेशन-स्केल AI का इस्तेमाल कर रही है। ₹10,300 करोड़ के IndiaAI मिशन के तहत, BharatGen को अप्रैल में ₹988.6 करोड़ मिले। इसका मकसद हेल्थकेयर, खेती, शिक्षा और सरकारी कामकाज जैसे कई क्षेत्रों में भारतीय भाषाओं और ऐप्लिकेशन्स के लिए नेटिव फ़ाउंडेशन मॉडल बनाना है।
यह हालिया सहयोग, AI सॉवरेनिटी (AI पर अपना नियंत्रण) और ग्लोबल स्तर पर फ़्रंटियर मॉडल विकसित करने के लिए मिलकर काम करने के तरीकों पर बढ़ते ज़ोर के साथ मेल खाता है।
