जलवायु कार्यकर्ता, इंजीनियर और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक एक बार फिर चर्चा में हैं। लद्दाख से जुड़े मुद्दों को लेकर वह लंबे समय से काम कर रहे हैं। हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद दिल्ली पुलिस उन्हें अस्पताल लेकर गई। वांगचुक 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे। प्रदर्शन से जुड़े लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें जबरन अस्पताल ले जाया गया, जबकि पुलिस ने कहा कि उनकी बिगड़ती सेहत और चिकित्सा सलाह के आधार पर यह कदम उठाया गया।
सोनम वांगचुक कौन हैं और क्यों चर्चा में हैं?
सोनम वांगचुक का जन्म 1966 में लद्दाख के अलची क्षेत्र में हुआ था। बचपन से ही उन्होंने शिक्षा और पर्यावरण से जुड़े विषयों में रुचि दिखाई। उन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी श्रीनगर से Mechanical Engineering की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने लद्दाख में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए Students’ Educational and Cultural Movement of Ladakh (SECMOL) की स्थापना की।
वांगचुक को लद्दाख में शिक्षा सुधार और पर्यावरण संरक्षण के लिए जाना जाता है। उन्होंने SECMOL Campus को इस तरह डिजाइन किया, जहां कम ऊर्जा में भी छात्रों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। यह Campus Solar Energy का उपयोग करता है और पारंपरिक तरीकों से बनाए गए भवनों के जरिए ठंडे मौसम में भी गर्माहट बनाए रखता है।
शिक्षा सुधार और SECMOL का योगदान
उनकी सबसे प्रसिद्ध Innovation में Ice Stupa तकनीक शामिल है। इसके जरिए सर्दियों में जमा होने वाले पानी को बर्फ के बड़े ढेर के रूप में सुरक्षित रखा जाता है और गर्मियों में जब किसानों को पानी की जरूरत होती है, तब इसका उपयोग किया जाता है। यह तकनीक लद्दाख जैसे सूखे और ठंडे इलाकों में पानी की समस्या को कम करने का प्रयास है।
सोनम वांगचुक ने शिक्षा, जल संरक्षण और Sustainable Development के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। उन्हें उनके योगदान के लिए Ramon Magsaysay Award सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं। वह मानते हैं कि स्थानीय समस्याओं का समाधान स्थानीय सोच और नई तकनीक के जरिए किया जा सकता है।
पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय भूमिका
वांगचुक समय-समय पर सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों को लेकर आवाज उठाते रहे हैं। लद्दाख की पर्यावरण सुरक्षा और क्षेत्र से जुड़े अधिकारों को लेकर उन्होंने कई आंदोलनों में भाग लिया है। उनके विचारों को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आती रही हैं, लेकिन शिक्षा और पर्यावरण के क्षेत्र में उनके काम की काफी सराहना हुई है।
फिल्म “3 Idiots” के किरदार फुनसुख वांगड़ू को भी कई लोग सोनम वांगचुक के जीवन और कार्यों से प्रेरित मानते हैं। हालांकि, उनका वास्तविक काम शिक्षा सुधार, जल संरक्षण और पहाड़ी क्षेत्रों के लिए नए समाधान विकसित करने पर केंद्रित रहा है। वे युवाओं को अपनी परिस्थितियों के अनुसार सीखने और समाज के लिए उपयोगी काम करने के लिए प्रेरित करते हैं।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सार्वजनिक स्रोतों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर तैयार की गई है।

