Sonam Wangchuk NEET Protest: आंदोलन से पहले नेताओं की ली परीक्षा

सोनम वांगचुक ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ हुए बड़े प्रदर्शन से जुड़ी कुछ ऐसी बातें साझा की हैं, जिनके बारे में पहले ज्यादा चर्चा नहीं हुई थी। उन्होंने बताया कि भूख हड़ताल शुरू करने से पहले उन्होंने प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के नेताओं की तैयारी और उनके हौसले को परखने का फैसला किया था। वांगचुक के अनुसार, वह यह देखना चाहते थे कि उनके समर्थन के बिना भी आंदोलन कुछ समय तक मजबूती से चल सकता है या नहीं।

सोनम वांगचुक ने आंदोलन से पहले नेताओं की परीक्षा ली

एक बातचीत में वांगचुक ने बताया कि उन्होंने CJP के नेताओं से कहा था कि वह एक सप्ताह के लिए स्विट्जरलैंड जाएंगे। उन्होंने साफ किया कि अगर नेता उस दौरान बिना भूख हड़ताल के प्रदर्शन को अपने दम पर संभाल लेते हैं, तभी वह वापस आकर अनशन करेंगे। उनके लिए यह एक तरह की परीक्षा थी, जिससे वह यह समझना चाहते थे कि आंदोलन से जुड़े लोगों की अपनी भागीदारी और उद्देश्य कितना मजबूत है।

वांगचुक के मुताबिक, जब वह एक सप्ताह बाद लौटे तो प्रदर्शनकारियों की संख्या कम होने के बावजूद CJP के लोग वहां डटे हुए थे। उन्हें लगा कि संगठन ने अपनी जिम्मेदारी निभाई है और ऐसे हालात में उनका सहयोग करना उचित होगा। उन्होंने कहा कि अगर आंदोलन कुछ ही दिनों में कमजोर पड़ जाता तो शायद वह इसमें अपना समर्थन नहीं देते।

उन्होंने यह भी बताया कि प्रदर्शन के दौरान एक समय ऐसा आया जब आंदोलन को खत्म करने या कुछ समय के लिए रोकने की स्थिति बन गई थी। खासकर 20 जुलाई की हिंसा के बाद प्रदर्शन का माहौल काफी बदल गया था। मंच को नुकसान पहुंचा था और कई लोग वहां से चले गए थे। इससे आंदोलन के नेतृत्व का मनोबल भी कमजोर हो गया था।

20 जुलाई की हिंसा के बाद कमजोर पड़ा मनोबल

वांगचुक ने बताया कि कुछ लोगों ने उनसे पूछा था कि इस स्थिति से बाहर कैसे निकला जाए। प्रदर्शन में मौजूद लोगों की संख्या कम होने का असर नेताओं के उत्साह पर भी पड़ रहा था। उन्होंने कहा कि उनकी अपनी हालत भी अनशन के 12वें और 13वें दिन तक काफी खराब हो चुकी थी। ऐसे समय में उन पर भूख हड़ताल खत्म करने का दबाव बढ़ने लगा था।

20 जुलाई के बाद नेतृत्व ने उनसे ऐसा संदेश लिखने को कहा था, जिसमें प्रदर्शनकारियों से आराम करने और अगले दिन आगे की रणनीति तय करने की बात कही जाए। वांगचुक ने बताया कि उन्होंने संदेश लिख भी दिया था, लेकिन उसे जारी नहीं किया गया। अगले दिन युवाओं की बड़ी संख्या में वापसी ने पूरे आंदोलन में नया उत्साह पैदा किया।

वांगचुक ने युवाओं की वापसी को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई को पुलिस कार्रवाई का सामना करने के बावजूद युवाओं का दोबारा प्रदर्शन में आना उल्लेखनीय था। उनके अनुसार, प्रदर्शन में मौजूद लोगों की संख्या का सीधा असर नेतृत्व के मनोबल पर पड़ रहा था। जब लोग चले गए तो हौसला कम हुआ और जब युवा वापस लौटे तो नेतृत्व का विश्वास फिर मजबूत हो गया।

✊ आंदोलन से जुड़ी अहम बातें

  • पहले परीक्षण: वांगचुक ने CJP नेताओं की तैयारी और हौसला परखा
  • एक सप्ताह: उन्होंने नेताओं को अपने बिना प्रदर्शन संभालने का मौका दिया
  • 20 जुलाई: हिंसा के बाद आंदोलन का माहौल बदल गया
  • मनोबल: प्रदर्शनकारियों की संख्या कम होने से नेतृत्व का उत्साह घटा
  • युवाओं की वापसी: अगले दिन बड़ी संख्या में युवाओं के लौटने से नया उत्साह आया

भूख हड़ताल खत्म करने का दबाव बढ़ा

उन्होंने बताया कि उस दौरान उन पर कई लोगों की ओर से अनशन खत्म करने का दबाव था। वह चाहते थे कि अगर भूख हड़ताल समाप्त करनी पड़े तो वहां विपक्षी नेताओं के साथ सरकार के मंत्री भी मौजूद हों, क्योंकि उनके लिए दोनों पक्ष मिलकर देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसके बाद कई विपक्षी नेता उनसे मिलने पहुंचे और सरकार की ओर से भी बातचीत शुरू हुई।

बाद में खुफिया विभाग के अधिकारियों के माध्यम से सरकार ने वांगचुक से संपर्क किया। 21 जुलाई की रात केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह अस्पताल में उनसे मिलने पहुंचे और उनसे भूख हड़ताल समाप्त करने का आग्रह किया। वांगचुक ने कहा कि प्रदर्शन को जारी रखने का फैसला इसलिए भी जरूरी था क्योंकि किसी मंत्री का इस्तीफा शिक्षा व्यवस्था में तुरंत बदलाव नहीं ला सकता, लेकिन इससे हुई घटनाओं के लिए जवाबदेही का संदेश जरूर जाता है।

🏛️ सरकार से संपर्क और वांगचुक का रुख

  • दबाव: वांगचुक पर भूख हड़ताल खत्म करने का दबाव बढ़ा
  • विपक्ष: कई विपक्षी नेता उनसे मिलने पहुंचे
  • सरकार: बातचीत की प्रक्रिया भी शुरू हुई
  • अस्पताल में मुलाकात: जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह उनसे मिलने पहुंचे
  • मुख्य मुद्दा: शिक्षा व्यवस्था में बदलाव और जवाबदेही पर जोर

अस्वीकरण: यह लेख उपलब्ध जानकारी और बयानों पर आधारित है। घटनाक्रम में बदलाव संभव है, इसलिए आधिकारिक सूचना देखें।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

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