गुरुवार, 3 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट देखने को मिली। निफ्टी 0.17 प्रतिशत गिरकर 23,873 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 0.55 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 76,152 पर पहुंच गया। बाजार में गिरावट की बड़ी वजह वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों को लेकर बढ़ी चिंता रही। निवेशकों को आशंका है कि बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करने के लिए अमेरिका समेत प्रमुख केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को ऊंचा रख सकते हैं।
भारतीय शेयर बाजार में लगातार चौथे दिन गिरावट
दुनिया के बॉन्ड बाजार में भी बिकवाली का दबाव देखने को मिला। लगातार महंगाई और सरकारों पर बढ़ते कर्ज के कारण निवेशक सरकारी बॉन्ड रखने के बदले ज्यादा मुनाफे की मांग कर रहे हैं। हालांकि, भारतीय बाजार के लिए एक सकारात्मक संकेत विदेशी निवेशकों की खरीदारी रही। बुधवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में करीब 6,688 करोड़ रुपये की खरीदारी की। कुछ बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि तेज गिरावट के बाद अच्छे शेयरों में खरीदारी का मौका बन सकता है।
3 सितंबर के बाजार की अहम बातें
- निफ्टी 0.17 प्रतिशत गिरकर 23,873 पर बंद हुआ।
- सेंसेक्स 0.55 प्रतिशत गिरकर 76,152 पर पहुंचा।
- बाजार में लगातार चौथे कारोबारी सत्र गिरावट रही।
- विदेशी निवेशकों ने करीब 6,688 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
- स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में मजबूती देखने को मिली।
गुरुवार को बड़े शेयरों में कमजोरी के बावजूद छोटे और मझोले शेयरों में सुधार देखने को मिला। निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 1.40 प्रतिशत की तेजी रही, जबकि निफ्टी मिडकैप 100 करीब 0.27 प्रतिशत ऊपर रहा। अलग-अलग क्षेत्रों की बात करें तो रियल्टी, मीडिया, केमिकल और निजी बैंकिंग शेयरों में खरीदारी हुई। इसके उलट आईटी, एफएमसीजी, ऑटो और फार्मा शेयरों पर बिकवाली का दबाव रहा।
कच्चे तेल की कीमत में करीब 1.5 प्रतिशत गिरावट
कच्चे तेल की कीमतों में भी तीन दिन से जारी तेजी पर ब्रेक लगा। तेल की कीमत करीब 1.5 प्रतिशत गिरकर 94.20 डॉलर प्रति बैरल हो गई। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को लेकर टिप्पणी के बाद तेल बाजार में कुछ राहत दिखाई दी। कच्चे तेल की कीमत घटने से अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर भी दबाव कुछ कम हुआ। अमेरिका की 10 साल की ट्रेजरी यील्ड करीब 4.77 प्रतिशत पर आ गई।
4 सितंबर के बाजार के लिए प्रमुख संकेत
- वैश्विक शेयर बाजारों का रुख।
- कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव।
- विदेशी निवेशकों की खरीदारी या बिकवाली।
- अमेरिका समेत प्रमुख केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर नीति।
- वैश्विक बॉन्ड यील्ड और महंगाई से जुड़े संकेत।
एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार
एशियाई बाजारों में शुक्रवार के कारोबार से पहले मिलाजुला रुख देखने को मिला। जापान का निक्केई 225 करीब 0.2 प्रतिशत गिरकर 64,214.48 पर रहा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 0.3 प्रतिशत बढ़कर 6,579.48 पर पहुंचा। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स में 0.2 प्रतिशत की गिरावट रही, जबकि एसके हाइनिक्स करीब 1.1 प्रतिशत नीचे रहा। हांगकांग का हैंग सेंग 0.6 प्रतिशत गिरा, वहीं चीन का शंघाई कंपोजिट मामूली बढ़त में रहा।
ताइवान और ऑस्ट्रेलिया के बाजार में भी हलचल
ऑस्ट्रेलिया के एसएंडपी/एएसएक्स 200 में करीब 0.5 प्रतिशत की तेजी रही, जबकि ताइवान के ताइएक्स में 0.7 प्रतिशत की गिरावट आई। ऐसे में 4 सितंबर को भारतीय बाजार की दिशा तय करने में वैश्विक संकेत, कच्चे तेल की कीमत, विदेशी निवेशकों की गतिविधि और ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें अहम भूमिका निभा सकती हैं। निवेशकों को बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच सावधानी से फैसले लेने की जरूरत होगी।
Frequently asked questions
4 सितंबर को शेयर बाजार के लिए कौन से संकेत अहम रहेंगे?
4 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार की दिशा पर वैश्विक बाजारों का रुख, कच्चे तेल की कीमत, विदेशी निवेशकों की गतिविधि और ब्याज दरों से जुड़ी उम्मीदों का असर पड़ सकता है।
3 सितंबर को निफ्टी और सेंसेक्स कितने पर बंद हुए?
3 सितंबर को निफ्टी 0.17 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,873 पर बंद हुआ। सेंसेक्स में 0.55 प्रतिशत की कमजोरी रही और यह 76,152 के स्तर पर बंद हुआ।
विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में कितनी खरीदारी की?
बुधवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में करीब 6,688 करोड़ रुपये की खरीदारी की। इसे घरेलू बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना गया, खासकर लगातार गिरावट के बीच।
कच्चे तेल की कीमत कितनी रही?
कच्चे तेल की कीमत करीब 1.5 प्रतिशत गिरकर 94.20 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। इससे पिछले तीन कारोबारी दिनों से जारी तेल की तेजी पर ब्रेक लगा।
कौन से शेयरों में 3 सितंबर को खरीदारी हुई?
3 सितंबर को रियल्टी, मीडिया, केमिकल और निजी बैंकिंग शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। दूसरी ओर आईटी, एफएमसीजी, ऑटो और फार्मा शेयरों पर बिकवाली का दबाव रहा।
निष्कर्ष
भारतीय शेयर बाजार में लगातार चौथे दिन गिरावट के बावजूद स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में सुधार दिखा। 4 सितंबर को बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल, विदेशी निवेश और ब्याज दरों से जुड़ी खबरों पर निर्भर रह सकती है। निवेशकों को उतार-चढ़ाव के बीच सावधानी बरतनी चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध कराई गई बाजार संबंधी जानकारी पर आधारित है। शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लें और बाजार की ताजा स्थिति की जांच करें।