RBI NBFC Funding: फंडिंग स्रोत बढ़ाने की RBI की सलाह

भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (HFC) को अपनी फंडिंग के स्रोत बढ़ाने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों को किसी एक स्रोत पर ज्यादा निर्भर रहने से बचना चाहिए, क्योंकि बाजार में बदलाव या निवेशकों की धारणा बदलने पर इसका असर उनकी वित्तीय स्थिति पर पड़ सकता है।

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NBFC और HFC को फंडिंग के स्रोत बढ़ाने की सलाह

मुर्मू ने गुरुवार को मुंबई में आयोजित CII NBFCs & HFCs National Summit 2026 में कहा कि देश में ज्यादा मजबूत और सक्रिय कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार बनने से इन कंपनियों की फंडिंग व्यवस्था बेहतर हो सकती है। उनके अनुसार, सिक्योरिटाइजेशन का इस्तेमाल केवल पैसे की जरूरत पूरी करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसके जरिए जोखिम को दूसरी जगह बांटने और पूंजी को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

RBI की NBFC और HFC को अहम सलाह

  • फंडिंग के कई स्रोत विकसित करने पर जोर।
  • किसी एक फंडिंग स्रोत पर अत्यधिक निर्भरता से बचने की सलाह।
  • मजबूत कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार से फंडिंग व्यवस्था बेहतर हो सकती है।
  • सिक्योरिटाइजेशन को केवल नकदी जुटाने का माध्यम न बनाने की सलाह।
  • जोखिम वितरण और पूंजी के बेहतर इस्तेमाल पर ध्यान देने को कहा।

उन्होंने कहा कि NBFC और HFC पहले सीमित क्षेत्र में काम करने वाले कर्जदाता थे, लेकिन अब ये तकनीक आधारित संस्थान बन चुके हैं और बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत करने में मदद कर रहे हैं। हालांकि, तेजी से बढ़ते कारोबार के साथ इन कंपनियों को बेहतर प्रशासन, जोखिम प्रबंधन और ग्राहकों के हितों की सुरक्षा पर भी ध्यान देना जरूरी है।

NBFC के टिकाऊ विकास के लिए पांच क्षेत्र अहम

मुर्मू ने टिकाऊ विकास के लिए पांच प्रमुख क्षेत्रों को महत्वपूर्ण बताया। इनमें संस्थान का सही संचालन, नकदी का बेहतर प्रबंधन, कर्ज की गुणवत्ता और जोखिम, ग्राहकों के साथ उचित व्यवहार तथा डिजिटल बदलाव और साइबर सुरक्षा शामिल हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी के बोर्ड और वरिष्ठ अधिकारियों को पूरे संगठन में नियमों और नैतिक कामकाज की संस्कृति को मजबूत करना चाहिए।

नकदी प्रबंधन पर विशेष ध्यान जरूरी

उन्होंने नकदी प्रबंधन को भी बेहद जरूरी बताया। NBFC क्षेत्र बाजार की स्थिति और सीमित फंडिंग स्रोतों में बदलाव से प्रभावित हो सकता है। इसलिए कंपनियों को पहले से ऐसे इंतजाम रखने चाहिए, जिससे मुश्किल समय में भी उनके पास पर्याप्त नकदी उपलब्ध रहे।

NBFC के लिए पांच प्रमुख प्राथमिकताएं

  • संस्थान का बेहतर संचालन और मजबूत प्रशासन।
  • नकदी और लिक्विडिटी का प्रभावी प्रबंधन।
  • कर्ज की गुणवत्ता और जोखिम पर लगातार निगरानी।
  • ग्राहकों के साथ उचित और जिम्मेदार व्यवहार।
  • डिजिटल बदलाव के साथ साइबर सुरक्षा को मजबूत करना।

कर्ज की गुणवत्ता से समझौता नहीं करने की सलाह

कर्ज की गुणवत्ता को लेकर भी उन्होंने सावधानी बरतने को कहा। तेज कर्ज वृद्धि के साथ जोखिम बढ़ सकता है, इसलिए कंपनियों को नियमित जांच, शुरुआती चेतावनी व्यवस्था और जरूरत के अनुसार प्रावधान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कारोबार बढ़ाने के लिए कर्ज देने के नियमों और गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही AI और मशीन लर्निंग जैसी तकनीक का इस्तेमाल कर्ज लेने वालों में वित्तीय परेशानी के शुरुआती संकेत पहचानने के लिए बढ़ाया जा सकता है।

ग्राहकों की सुरक्षा पर भी जोर

मुर्मू ने जिम्मेदार कर्ज देने और ग्राहकों की शिकायतों को सही समय पर दूर करने पर भी जोर दिया। खासकर कमजोर ग्राहकों के मामले में नई तकनीक और नई सेवाओं की रफ्तार ग्राहक सुरक्षा से आगे नहीं निकलनी चाहिए।

NBFC के लिए नियमों को डिजिटल सेवाओं के अनुसार लागू करेगा RBI

उन्होंने बताया कि RBI NBFC क्षेत्र के लिए जरूरत के अनुसार नियम बनाने की नीति जारी रखेगा। डिजिटल वित्त के लिए अलग नियम बनाने के बजाय मौजूदा नियमों को डिजिटल सेवाओं के अनुसार लागू करने पर ध्यान दिया गया है। पिछले कुछ वर्षों में नकदी जोखिम प्रबंधन, लिक्विडिटी कवरेज और NBFC के आकार के आधार पर नियमन जैसे कई कदम उठाए गए हैं।

NBFC का कर्ज GDP के 16.7 प्रतिशत तक पहुंचा

मुर्मू के अनुसार, NBFC का कर्ज फिलहाल देश की नाममात्र GDP का करीब 16.7 प्रतिशत है, जो एक साल पहले 15.9 प्रतिशत था। वहीं, इन कंपनियों द्वारा दिया गया कर्ज अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के कुल कर्ज का लगभग 27 प्रतिशत है, जो पिछले साल करीब 26 प्रतिशत था। उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि, बढ़ती आबादी, शहरों का विस्तार और डिजिटल सेवाओं के बढ़ने से आने वाले समय में NBFC और HFC के लिए कर्ज की मांग के बड़े अवसर मौजूद हैं।

Frequently asked questions

RBI ने NBFC को क्या सलाह दी है?

RBI के डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू ने NBFC और HFC को फंडिंग के कई स्रोत विकसित करने की सलाह दी है। उन्होंने किसी एक स्रोत पर अत्यधिक निर्भरता से बचने और वित्तीय मजबूती बनाए रखने पर जोर दिया।

कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार NBFC के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

एक मजबूत कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार NBFC और HFC को फंड जुटाने के लिए अतिरिक्त विकल्प दे सकता है। इससे कंपनियों की किसी एक फंडिंग स्रोत पर निर्भरता कम हो सकती है और उनकी वित्तीय व्यवस्था अधिक मजबूत बन सकती है।

NBFC के लिए सिक्योरिटाइजेशन को लेकर RBI की क्या सोच है?

मुर्मू के अनुसार, सिक्योरिटाइजेशन को केवल नकदी जुटाने के साधन तक सीमित नहीं रखना चाहिए। इसका इस्तेमाल जोखिम को बांटने और पूंजी के बेहतर उपयोग के लिए भी किया जा सकता है।

NBFC का कर्ज GDP के कितने प्रतिशत के बराबर है?

मुर्मू के अनुसार, NBFC का कर्ज फिलहाल भारत की नाममात्र GDP का करीब 16.7 प्रतिशत है। एक साल पहले यह आंकड़ा लगभग 15.9 प्रतिशत था, जिससे NBFC क्षेत्र के बढ़ते महत्व का पता चलता है।

NBFC के लिए किन क्षेत्रों पर ध्यान देना जरूरी है?

NBFC को मजबूत प्रशासन, नकदी प्रबंधन, कर्ज की गुणवत्ता, जोखिम नियंत्रण, ग्राहक सुरक्षा, डिजिटल बदलाव और साइबर सुरक्षा पर ध्यान देना जरूरी है। तेज कारोबार वृद्धि के साथ इन क्षेत्रों को मजबूत रखना वित्तीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।

निष्कर्ष

RBI की सलाह से साफ है कि NBFC और HFC के बढ़ते कारोबार के साथ उनकी वित्तीय मजबूती और जोखिम प्रबंधन भी महत्वपूर्ण है। फंडिंग के स्रोत बढ़ाने, कर्ज की गुणवत्ता बनाए रखने और ग्राहकों की सुरक्षा पर ध्यान देने से इन संस्थानों का विकास अधिक टिकाऊ हो सकता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध कराई गई समाचार जानकारी पर आधारित है। वित्तीय क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों और नियमों में समय के साथ बदलाव हो सकता है। निवेश या वित्तीय निर्णय लेने से पहले आधिकारिक स्रोतों और विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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